नई आबकारी नीति से बदलेगा खेल: शराब ठेकेदारों की मोनोपोली होगी खत्म; तस्करों की भी टूटेगी कमर, यह होगा बदलाव
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश सरकार नई आबकारी नीति के जरिए शराब कारोबार में जमे सिंडिकेट और अंतरराज्यीय तस्करी पर नकेल कसने जा रही है। इस नीति के तहत जहां वर्षों से चली आ रही शराब ठेकेदारों की मोनोपोली को खत्म किया जाएगा।
क्यूआर कोड अनिवार्य होगा
वहीं तस्करी पर लगाम कसने के लिए ‘ट्रेस एंड ट्रैक’ सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसमें हर शराब बोतल पर क्यूआर कोड अनिवार्य होगा।
बदलावों का खाका तैयार किया
सरकार की इस नई पहल के पीछे मुख्य सचिव अनुराग जैन की अहम भूमिका मानी जा रही है। उन्होंने आबकारी विभाग को सख्त निर्देश देते हुए नीति में संरचनात्मक बदलावों का खाका तैयार कराया है।
करोड़ों का होता है राजस्व प्राप्त
प्रस्तावित नीति को जल्द ही कैबिनेट में लाए जाने की संभावना है। फिलहाल राज्य को आबकारी से सालाना करीब 16 हजार करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होता है।
खत्म होगी रिन्यू पॉलिसी
अब तक आबकारी नीति के तहत पुराने ठेकेदार ऊंची बोली देकर ठेकों का रिन्यू कर लेते थे, जिससे नए खिलाड़ियों की एंट्री मुश्किल हो जाती थी।
नई नीति में इस रिन्यू सिस्टम को पूरी तरह समाप्त कर सभी शराब दुकानों को टेंडर प्रक्रिया से देने की तैयारी है। इससे लंबे समय से एक ही समूह के हाथों में सिमटे ठेकों का संतुलन टूटेगा।
ग्रुपिंग सिस्टम में भी बदलाव की तैयारी
सरकार शराब दुकानों की ग्रुपिंग व्यवस्था पर भी पुनर्विचार कर रही है। बड़े ग्रुप बनाए रखने या उन्हें छोटे हिस्सों में बांटने को लेकर राजस्व पर पड़ने वाले असर का अध्ययन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि छोटे ग्रुप बनने से बड़े ठेकेदारों की पकड़ कमजोर होगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
क्यूआर कोड से पकड़े जाएंगे ‘बड़े खिलाड़ी’
तस्करी रोकने के लिए सरकार ‘ट्रेस एंड ट्रैक’ सिस्टम लागू करने जा रही है, जिसे पिछले दो साल से ठेकेदारों के दबाव में टाला जा रहा था। अब हर शराब बोतल पर क्यूआर कोड होगा, जिससे यह साफ पता चलेगा कि शराब किस दुकान या डिस्टलरी से निकली है।
इससे तस्करी पकड़े जाने पर केवल ड्राइवर या क्लीनर ही नहीं, बल्कि ठेकेदार और डिस्टलरी संचालक भी सीधे जिम्मेदार ठहराए जा सकेंगे।
ठेकेदारों की नाराजगी, मुनाफे का रोना
वहीं दूसरी ओर शराब ठेकेदार नई नीति से खासे असहज नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में मुनाफा लगातार घट रहा है और प्रॉफिट मार्जिन 25 फीसदी से भी नीचे चला गया है। ठेकेदारों की मांग है कि इसे बढ़ाकर पुराने स्तर यानी करीब 37 फीसदी तक किया जाए।
15 से 20 फीसदी बढ़ोतरी तय
सरकार ने साफ कर दिया है कि नई नीति में ठेकों की कीमत मौजूदा दरों से 15 से 20 फीसदी ज्यादा ही रहेगी। पिछली नीति में यह बढ़ोतरी 20 फीसदी थी। इस बार भी इसी दायरे में रहने के संकेत हैं, हालांकि ठेकेदार इसे अत्यधिक बता रहे हैं। नई आबकारी नीति को लेकर सरकार और शराब कारोबारियों के बीच खींचतान तेज हो गई है।
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