लापरवाही पर गिरेगी गाज: विद्यार्थियों के लिए अभिभावक की भूमिका में नजर आएंगे अफसर
KHULASA FIRST
संवाददाता

छात्रों को मिलेगा ‘अपनत्व’ का संबल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रशासन अब कागजी फाइलों से निकलकर मानवीय संवेदनाओं और धरातल की समस्याओं के समाधान की ओर कदम बढ़ा रहा है। जिले के छात्रावासों में रह रहे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और मानसिक स्वास्थ्य को संबल प्रदान करने के लिए कलेक्टर शिवम वर्मा ने ‘अपनत्व’ अभियान का शंखनाद किया है।
इस अभिनव पहल के तहत प्रशासनिक अधिकारी केवल निरीक्षणकर्ता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए अभिभावक की भूमिका में नजर आएंगे। वे न केवल होस्टलों की बुनियादी सुविधाओं जैसे प्रकाश, स्वच्छता और सुरक्षा की मॉनिटरिंग करेंगे, बल्कि सीधे छात्रों से संवाद कर उनकी व्यक्तिगत और शैक्षणिक समस्याओं का निराकरण भी करेंगे।
सोमवार को समय-सीमा पत्रों (टीएल) की उच्च स्तरीय बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि विकास और जनसेवा में किसी भी स्तर की शिथिलता अक्षम्य होगी। प्रशासनिक कार्यप्रणाली में शुचिता और जवाबदेही तय करने के लिए बैठक में कड़े तेवर देखने को मिले।
सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों के निराकरण में लापरवाही बरतने वाले विभागों और अधिकारियों को न केवल फटकार लगाई गई, बल्कि गंभीर लापरवाही पर तत्काल पेनल्टी भी अधिरोपित की गई।
शहर से ब्लैक स्पॉट्स को समाप्त करें- शहर की नब्ज और पर्यावरण को लेकर भी प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को दो टूक चेतावनी देते हुए कलेक्टर ने ईटीपी प्लांट के संचालन को अनिवार्य बताया है। मानकों का उल्लंघन करने वाली फैक्ट्रियों पर सीलिंग और एफआईआर जैसी कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, इंदौर की सुगम यातायात व्यवस्था के लिए नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस के संयुक्त समन्वय से ब्लैक स्पॉट्स को समाप्त करने, लेफ्ट टर्न फ्री करने और लिंक रोड से अतिक्रमण हटाने की कार्ययोजना पर युद्ध स्तर पर कार्य करने की बात कही गई। फ्लायओवरों के निर्माण की समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए प्रशासन अब ईज ऑफ लिविंग के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में अग्रसर है।
विशेष जांच समिति का गठन किया
यही नहीं शिकायतों के लंबित रहने के कारणों की गहराई से जांच के लिए जॉइंट कलेक्टर की अध्यक्षता में एक विशेष जांच समिति का गठन किया गया है, जो देरी के उत्तरदायी कारकों का विश्लेषण करेगी। शासन का लक्ष्य स्पष्ट है शिकायतों का केवल निराकरण न हो, बल्कि वह गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक हो। ‘संकल्प से समाधान’ अभियान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के पात्र व्यक्ति तक पहुंचाकर शत-प्रतिशत संतुष्टि सुनिश्चित की जाए।
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