खबर
Top News

राष्ट्रीय सुरक्षा और राहुल गांधी की राजनीतिक अपरिपक्वता

KHULASA FIRST

संवाददाता

08 फ़रवरी 2026, 3:52 pm
423 views
शेयर करें:
राष्ट्रीय सुरक्षा और राहुल गांधी की राजनीतिक अपरिपक्वता

ललित गर्ग वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रश्न केवल एक वक्तव्य का नहीं, बल्कि राजनीतिक परिपक्वता, जिम्मेदारी और राष्ट्रीय हित की समझ का है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक वक्तव्यों में संवेदनशीलता अनिवार्य है। सीमाओं से जुड़े तथ्य, सैन्य तैनाती, रणनीतिक आकलन-ये सब ऐसे विषय हैं जिन पर आधे-अधूरे संदर्भ या चयनित उद्धरण अनावश्यक भ्रम पैदा कर सकते हैं।

नीति-निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा और संसदीय विमर्श जैसे गंभीर विषय किसी भी लोकतंत्र की रीढ़ होते हैं। संसद केवल सत्ता और विपक्ष के टकराव का मंच नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, सामूहिक विवेक और जिम्मेदार अभिव्यक्ति का सर्वोच्च स्थल है। ऐसे में जब राष्ट्रपति के अभिभाषण जैसे संवैधानिक और गरिमामय पर चर्चा चल रही हो, तब किसी भी नेता से अपेक्षा स्वाभाविक है वह शब्दों, संदर्भों और समय-तीनों के प्रति अतिरिक्त सावधानी बरते।

हालिया घटनाक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक के कुछ अंशों का हवाला देकर चीनी सेना की कथित घुसपैठ को लेकर जो बयान दिया गया, उसने इसी अपेक्षा पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए।

सरकार का आरोप रहा इस बयान ने लोकसभा को गुमराह करने का प्रयास किया, जबकि विपक्ष ने इसे सच दबाने की कोशिश बताकर पलटवार किया। परिणाम संसद की कार्यवाही बाधित हुई, तीखी बहस ने पूरे दिन का सत्र स्थगित करा दिया और राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र मूल मुद्दों से हटकर आरोप-प्रत्यारोप बन गया।

यह प्रश्न केवल एक वक्तव्य का नहीं, बल्कि राजनीतिक परिपक्वता, जिम्मेदारी और राष्ट्रीय हित की समझ का है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक वक्तव्यों में संवेदनशीलता अनिवार्य होती है। सीमाओं से जुड़े तथ्य, सैन्य तैनाती, रणनीतिक आकलन-ये सब ऐसे विषय हैं जिन पर आधे-अधूरे संदर्भ या चयनित उद्धरण अनावश्यक भ्रम पैदा कर सकते हैं।

यही कारण है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने इसे संसदीय नियमों के उल्लंघन और राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ बताया। लोकसभा अध्यक्ष के व्यवस्था देने के बावजूद किसी नेता का अपने वक्तव्य पर अड़े रहना कार्यवाही को ठप कर दे, तो सवाल उठता है उद्देश्य सच सामने लाना था या राजनीतिक लाभ साधना।

विपक्ष का दायित्व सत्ता से सवाल करना है, यह लोकतंत्र का प्राण है किंतु सवालों की भाषा, मंच और समय-तीनों लोकतांत्रिक मर्यादाओं से बंधे हैं। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का समय सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर समग्र विमर्श का होता है।

उस दौरान सैन्य पुस्तकों के चयनित अंशों को राजनीतिक हथियार बनाना, वह भी बिना समुचित संदर्भ और संस्थागत प्रक्रिया, स्वाभाविक रूप से विवाद को जन्म देता है। विपक्ष का यह कहना सरकार असहज प्रश्नों को दबाना चाहती है, परिचित एवं बेतूका राजनीतिक तर्क है परंतु सरकार का राष्ट्रीय सुरक्षा को राजनीतिक रंग देना अनुचित है, उतना ही वजनदार प्रतिवाद है। दोनों पक्षों के बीच संतुलन वहीं संभव है, जहां तथ्य, प्रक्रिया और समय का सम्मान हो।

संसद में अप्रकाशित ‘संस्मरण’ के जिक्र पर विवाद स्वाभाविक है, क्योंकि संसदीय परंपराओं और स्थापित नियमों के अनुसार किसी सदस्य द्वारा संसद के पटल पर ऐसी प्रकाशित या अप्रकाशित पुस्तक, लेख या पत्रिका की सामग्री को प्रमाण के रूप में उद्धृत करना स्वीकार्य नहीं, जिसे सदन के समक्ष औपचारिक रूप से प्रस्तुत (टेबल) न किया गया हो, विशेष रूप से ऐसी पुस्तकों या लेखों के अंश, जिनकी न संसदीय सत्यापन प्रक्रिया हुई हो न जिन्हें सदन की अनुमति से अभिलेखित किया गया हो, उन्हें तथ्यात्मक प्रमाण मानना संसदीय मर्यादा के विरुद्ध है।

इस दृष्टि से राहुल गांधी द्वारा किसी अप्रकाशित पुस्तक के अंशों को सीधे उद्धृत कर उन्हें नीतिगत या राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करना न केवल संसदीय नियमों की अवहेलना थी, बल्कि इससे सदन की गरिमा और कार्यवाही की विश्वसनीयता भी आहत हुई।

राहुल गांधी केवल कांग्रेस के नेता ही नहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। कम से कम राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में तो उन्हें भारतीय सेनाओं के नैरेटिव के साथ खड़े होना चाहिए। दुर्भाग्य से ऐसा नहीं करते। चीन और पाकिस्तान को लेकर मोदी सरकार को तो घेरते हैं, लेकिन स्मरण नहीं रखते इन दोनों देशों ने भारतीय भूभाग पर तब अतिक्रमण किया, जब कांग्रेस सत्ता में थी।

गलवान में चीनी सेना के साथ खूनी टकराव के मामले में तत्कालीन सेनाध्यक्ष की अप्रकाशित पुस्तक के कथित अंश का जैसा उल्लेख राहुल गांधी ने किया, उस पर हंगामा होना ही था। जो पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई, उसका उल्लेख कैसे कर सकते हैं? राहुल गांधी का आरोप मोदी सरकार ने चीनी सेना के अतिक्रमणकारी रवैये पर साहस नहीं दिखाया, बेबुनियाद एवं भ्रमित करने वाला आरोप है।

मकसर मोदी सरकार को कमजोर दिखाना- यह पहली बार नहीं है, जब राहुल गांधी ने यह कहने की कोशिश की हो कि प्रधानमंत्री मोदी चीन का डटकर मुकाबला करने से बचते हैं। वे मोदी सरकार को कमजोर दिखाने के लिए यह भी कहते रहे हैं कि चीन ने हमारी जमीन पर कब्जा कर रखा है।

वे यहां तक कह चुके हैं कि चीनी सेना ने भारतीय सैनिकों की पिटाई की थी। इसके लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट की फटकार भी सुननी पड़ी थी। इसके बाद भी वे यह समझने के लिए तैयार नहीं कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में सतही आरोपों के आधार पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।

जबकि सच्चाई यह है और सब जानते हैं गलवन में चीनी सेना को करारा जवाब मिला था और इसी कारण वह वार्ता की मेज पर आया और लद्दाख में कई इलाकों में यथास्थिति कायम हो पाई।

कांग्रेस की भूमिका पर भी गंभीर आत्ममंथन आवश्यक है। एक समय देश को नेतृत्व देने वाली पार्टी आज बार-बार ऐसे प्रसंगों में उलझती दिखती है, जहां बयानबाजी मुद्दों पर भारी पड़ जाती है। राहुल गांधी प्रभावशाली वक्ता हैं, जनभावनाओं को छूने की क्षमता रखते हैं और युवाओं में संवाद स्थापित कर सकते हैं किंतु यही कारण है उनसे अधिक जिम्मेदारी की अपेक्षा भी की जाती है।

बार-बार ऐसे मुद्दे उठाना जिन्हें सत्ता पक्ष राष्ट्रीय एकता के लिए घातक बताता हो, कांग्रेस की छवि को गैर-जिम्मेदार विपक्ष के रूप में मजबूत करता है।

यह धारणा चाहे पूरी तरह सही न हो, लेकिन राजनीति में धारणा भी उतनी ही प्रभावशाली है जितने तथ्य। तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो परिपक्व लोकतंत्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस के लिए अलग-अलग संसदीय समितियां, बंद सत्र और संस्थागत प्रक्रियाएं होती हैं।

सार्वजनिक बयान देते समय नेता प्रायः संकेतों और नीतिगत प्रश्नों तक सीमित रहते हैं, विस्तृत सैन्य विवरणों से परहेज करते हैं। भारत में भी ऐसी परंपरा विकसित होनी चाहिए, जहां विपक्ष सरकार से जवाबदेही मांगे परंतु सेना और सुरक्षा संस्थानों की साख को राजनीतिक संघर्ष का अखाड़ा न बनाया जाए। यही संतुलन लोकतंत्र को मजबूत करता है।

सरकार भी पारदर्शिता बरते
सरकार को पारदर्शिता से घबराना नहीं चाहिए। यदि विपक्ष किसी पुस्तक, रिपोर्ट या बयान का हवाला देता है, तो उसका संस्थागत और तथ्यपरक उत्तर दिया जाना चाहिए। केवल नियमों के उल्लंघन का हवाला देकर बहस को समाप्त करना भी स्वस्थ परंपरा नहीं कही जा सकती।

राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर पूर्ण मौन भी लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व के विपरीत है। अतः दोनों पक्षों को अपनी-अपनी सीमाएं पहचाननी होंगी। अंततः प्रश्न राहुल गांधी की परिपक्वता का भी है। परिपक्वता का अर्थ चुप रहना नहीं, बल्कि यह समझना है कि कौन-सा प्रश्न कब, कहां और कैसे उठाया जाए।

एक राष्ट्रीय नेता से अपेक्षा है भावनात्मक आवेग के बजाय रणनीतिक विवेक से काम ले। इसी तरह विपक्ष की सामूहिक जिम्मेदारी है वह संसद को ठप करने के बजाय उसे प्रभावी बहस का मंच बनाए। संसद का स्थगन किसी की जीत नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हार होता है।

इस पूरे प्रसंग ने एक बार फिर स्पष्ट किया है भारत जैसे विविध और संवेदनशील लोकतंत्र में शब्दों की शक्ति अत्यंत गहरी है। राष्ट्रीय एकता केवल सीमाओं की रक्षा से नहीं, बल्कि जिम्मेदार राजनीति से भी सुरक्षित रहती है। कांग्रेस को सोचना होगा क्या तात्कालिक राजनीतिक लाभ दीर्घकालिक विश्वसनीयता से अधिक महत्वपूर्ण है।

राहुल गांधी को आत्मविश्लेषण करना होगा नेतृत्व केवल सवाल उठाने से नहीं, बल्कि मर्यादित और समयबद्ध विवेक से भी बनता है और सरकार को याद रखना होगा सशक्त राष्ट्र वही है जो सवालों नहीं, जवाबों से मजबूत होता है। यह संतुलन स्थापित हो सका, तभी संसद का प्रत्येक सत्र वास्तव में राष्ट्र के हित में सार्थक सिद्ध होगा।

संबंधित समाचार

एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट आने तक नहीं छोड़ूंगा अयोध्या
Top News

एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट आने तक नहीं छोड़ूंगा अयोध्या:सहयोगियों से बोले चंपत राय

10 minutes ago
फायरिंग कांड का मास्टरमाइंड गिरफ्तार
Top News

फायरिंग कांड का मास्टरमाइंड गिरफ्तार:इस दल के पूर्व नेता समेत दो आरोपी दबोचे

11 minutes ago
शिव भक्ति का सैलाब
Top News

शिव भक्ति का सैलाब:अमरनाथ यात्रा-2026

21 minutes ago
परीक्षा में हिजाब
Top News

परीक्षा में हिजाब:पगड़ी और कलावा की होगी जांच; उतरवाया नहीं जाएगा,जूते-मोजे पहनकर नहीं मिलेगा प्रवेश

23 minutes ago
उपचुनाव पर सियासत तेज
Top News

उपचुनाव पर सियासत तेज:कौन बोला-भाजपा की अंदरूनी आग से प्रदेश नहीं जलना चाहिए

39 minutes ago
ड्रग्स केस में पीसीसी चीफ के भाई तलब
Top News

ड्रग्स केस में पीसीसी चीफ के भाई तलब:युवती के बयान से बढ़ीं मुश्किलें; शोषण और ड्रग्स सप्लाई के आरोपों की जांच तेज

about 1 hour ago
हिना कॉलोनी में ड्रेनेज लाइन फूटी
Top News

हिना कॉलोनी में ड्रेनेज लाइन फूटी:सड़कों पर बह रहा है गंदा पानी; मुख्य मार्ग पर जमा मल-मूत्र बना बड़ी मुसीबत, क्षेत्र में बीमारियों का बढ़ा खतरा

about 1 hour ago
उपचुनाव पर इस मंत्री का बड़ा बयान
Top News

उपचुनाव पर इस मंत्री का बड़ा बयान:टिकट नहीं बदलेंगे; पार्टी का फैसला सर्वोपरि

about 1 hour ago
सड़कों पर कब्जा तंत्र
Top News

सड़कों पर कब्जा तंत्र:व्यवस्था के आगे ट्रैफिक सिस्टम सरेंडर

about 1 hour ago
पुजारियों का शक्ति प्रदर्शन
Top News

पुजारियों का शक्ति प्रदर्शन:न्याय यात्रा निकाल सरकार को सौंपा ज्ञापन; मंदिरों के सरकारीकरण का किया विरोध

about 1 hour ago
बागवान बनते कैलाश
Top News

बागवान बनते कैलाश:हरियाली में भी ‘अपन का इंदौर’ नंबर वन

about 2 hours ago
इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री डाॅ.मोहन यादव
Top News

इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री डाॅ.मोहन यादव:बोले-युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता; बच्चों के बीच जाकर किया संवाद

about 2 hours ago
किस मंत्री ने की पूर्व सीएम की तारीफ
Top News

किस मंत्री ने की पूर्व सीएम की तारीफ:बोले- 80 साल के नौजवान हैं; कांग्रेस के युवा नेता उनसे सीख लें

about 2 hours ago
शेर नहीं, शिकारी होंगे शिकार
Top News

शेर नहीं, शिकारी होंगे शिकार:मुख्यमंत्री तो नहीं, मंत्री जरूर हो सकते हैं टारगेट

about 2 hours ago
चढ़ावा चोरी मामला
Top News

चढ़ावा चोरी मामला:कौन बोला- यह कलंक; हम खुद को छोटा महसूस कर रहे, पोस्टर वार तेज

about 2 hours ago
बुलेट पर निकले सीएम
Top News

बुलेट पर निकले सीएम:पैदल घूमकर देखा काम; जलेबी बनाई, चाय पी और जनता से किया संवाद

about 3 hours ago
भाजपा कार्यालय से नरोत्तम समर्थकों की गिरफ्तारी शुरू
Top News

भाजपा कार्यालय से नरोत्तम समर्थकों की गिरफ्तारी शुरू:पूरे जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी; विशेष सशस्त्र बल की तीन कंपनियां तैनात

about 3 hours ago
उपचुनाव
Top News

उपचुनाव:पूर्व मंत्री का टिकट कटते ही बगावत; लंबा जाम, पथराव-आंसू गैस, एसपी समेत इतने पुलिसकर्मी घायल

about 4 hours ago
दतिया विधानसभा उपचुनाव
Top News

दतिया विधानसभा उपचुनाव:भाजपा ने आशुतोष तिवारी को बनाया प्रत्याशी; नरोत्तम मिश्रा के हाथ लगी निराशा

about 21 hours ago
विवादित किस बयान पर भड़का महासंघ
Top News

विवादित किस बयान पर भड़का महासंघ:अध्यक्ष बोले-पहले अपने अखाड़ों की व्यवस्था देखें

about 21 hours ago

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!