बोरिंग से ऐसे जहर बना नर्मदा का पानी: सीवरेज से नर्मदा लाइन में पहुंचा; अब तक हो चुकी है 20 लोगों की मौत
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में गंदे पानी से फैली गंभीर बीमारी ने भयावह रूप ले लिया है। अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 429 लोग अस्पताल में भर्ती हैं।
त्रासदी बैक्टीरिया के कारण हुई
नगर निगम और जिला प्रशासन की जांच में सामने आया है कि यह त्रासदी किसी फैक्ट्री के केमिकल से नहीं, बल्कि घातक फीकल कोलिफॉर्म बैक्टीरिया के कारण हुई।
पानी सीवरेज से दूषित हुआ
शुरुआत में आशंका थी कि पानी में औद्योगिक रसायन मिले हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट में हैवी मेटल, पीएच लेवल, क्लोराइड और टीडीएस सभी मानक सही पाए गए। इससे साफ हुआ कि पानी में कोई केमिकल नहीं था, बल्कि यह सीवरेज से दूषित हुआ था।
बोरिंग बनी जहर की वजह
भागीरथपुरा क्षेत्र में कुल 516 बोरिंग हैं, जिनमें 400 निजी और 116 सरकारी हैं। अब तक करीब 60 बोरिंग की जांच की गई, जिसमें 35 बोरिंग के सैंपल फेल पाए गए। इन सभी में फीकल कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मिला, जो मानव मल से उत्पन्न होता है।
बीमारी पूरे इलाके में फैल गई
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई बोरिंग के कनेक्शन अवैध रूप से नर्मदा की मेन पाइपलाइन से जुड़े हुए थे। सीवरेज लाइन से संपर्क में आने पर जब बोरिंग का पानी दूषित हुआ, तो उसी दूषित पानी ने नर्मदा जल आपूर्ति को भी प्रदूषित कर दिया, जिससे बीमारी पूरे इलाके में फैल गई।
पार्षद की गली में भी मिला बैक्टीरिया
जिन बोरिंग में बैक्टीरिया पाया गया, उनमें वार्ड 11, जोन-4 के पार्षद कमल बाघेला की गली की बोरिंग भी शामिल है। यहां कोलिफॉर्म बैक्टीरिया की संख्या 86 पाई गई, जबकि मानक अनुसार यह शून्य होनी चाहिए थी।
सबसे अधिक खतरनाक स्थिति मकान नंबर 1026, न्यू बस्ती, पटेल किराना वाली गली की बोरिंग में मिली, जहां बैक्टीरिया की संख्या 350 तक पहुंच गई। विशेषज्ञों के अनुसार इस पानी का एक घूंट भी किसी व्यक्ति को गंभीर रूप से बीमार कर सकता था।
अवैध टॉयलेट ने बढ़ाई समस्या
जांच में यह भी सामने आया कि मेन टंकी के पास बनी पुलिस चौकी का अवैध टॉयलेट, जो बिना सेप्टिक टैंक के बनाया गया था, लगातार मल-मूत्र को नीचे गुजर रही पाइपलाइन में छोड़ रहा था।
पाइपलाइन में लीकेज के चलते यह गंदगी नर्मदा की सप्लाई में मिलती रही और घरों तक पहुंचती रही।
प्रशासन की कार्रवाई
इंदौर जिला प्रशासन ने दूषित बोरिंग पर रेड मार्क लगाकर पानी के उपयोग पर रोक लगा दी है। सभी प्रभावित बोरिंग में क्लोरीन फ्लशिंग की गई, हालांकि पानी अभी भी पीने योग्य नहीं है।
प्रशासन ने घातक बोरिंग के कनेक्शन काट दिए हैं और नर्मदा लाइन से जुड़े अवैध कनेक्शन भी हटाए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए पूरे क्षेत्र की जल आपूर्ति प्रणाली की विस्तृत जांच की जा रही है।
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