1 हजार से अधिक स्वास्थ्यकर्मी तैनात: भागीरथपुरा जल त्रासदी; घर-घर सर्वे और रियल टाइम मॉनिटरिंग शुरू
KHULASA FIRST
संवाददाता

क्षेत्रवासियों को पानी शुद्ध करने की गोलियां, ओआरएस, जिंक टैबलेट वितरित करने के साथ ही पानी उबालकर पीने की दी जा रही सलाह
दूषित पेयजल से 17 मौतें, शहरभर में संक्रमण का खतरा
बीमार पति के लिए दवा लेने पहुंची वृद्धा
मंत्री पुत्र आकाश विजयवर्गीय पहुंचे स्वास्थ्य केंद्र
बेटे को लील लिया… अब मेहमानों को तो बचा लूं...
कलेक्टर शिवम वर्मा और निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने किया भागीरथपुरा का दौरा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा में दूषित जल से 17 लोगों की मौत होने के एक सप्ताह बाद अब स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट हो गया है। क्षेत्र के लगभग 5 हजार घरों में करीब 50 हजार की आबादी निवास करती है, जिनके स्वास्थ्य परीक्षण और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य अमला तैनात किया गया, जिसमें चिकित्सक, नर्सिंग ऑफिसर, सीएचओ, आशा एवं एएनएम शामिल हैं। प्रति 25 घरों पर 5 सदस्यों की एक टीम बनाई गई है। इस तरह करीब 1000 स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैनात की गई टीमें प्रत्येक परिवार के सदस्यों की स्वास्थ्य जानकारी जुटा रही हैं। दूषित पानी से संक्रमण के लक्षण मिलने पर संबंधित व्यक्ति को तुरंत स्वास्थ्य केंद्र भेजा जा रहा है। परिवारों को पानी शुद्ध करने की गोलियां, ओआरएस, जिंक टैबलेट वितरित करने के साथ ही पानी उबालकर पीने की सलाह दी जा रही है।
कोबो टूल से रियल टाइम सर्वे, क्लोरीनेटेड पानी पर जोर... स्वास्थ्य विभाग ने भारत सरकार के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. चंद्रशेखर गेदाम एवं जिला प्रशासन के सहयोग से प्रभावित क्षेत्र में कोबो टूल का प्रशिक्षण दिया। इस टूल के माध्यम से स्थिति का रियल टाइम मूल्यांकन किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधवप्रसाद हासानी के निर्देशन में लगभग 200 टीमें गठित की गईं।
इन टीमों ने पहले से चिह्नित घरों में कोबो टूल से सर्वे कर प्रत्येक घर को 10 ओआरएस पैकेट, 30 जिंक टैबलेट और क्लीनवेट ड्रॉप वितरित किए। क्षेत्र के रहवासियों को बताया गया कि 10 लीटर पानी में 8 से 10 बूंद क्लीनवेट डालने के एक घंटे बाद पानी पूरी तरह शुद्ध हो जाता है।
स्वास्थ्य परामर्श, फॉलोअप और आईईसी गतिविधियां... सर्वे के दौरान स्वास्थ्य परामर्श, टोल-फ्री नंबर की जानकारी, दवा का पूरा डोज लेने का संदेश, हाथ धोने की विधि का प्रदर्शन और संदिग्ध लक्षणों वाले व्यक्तियों का चिह्नांकन किया गया। स्वस्थ होकर घर लौटे मरीजों का भी फॉलोअप लिया गया। टीमों ने अब तक 2745 घरों तक पहुंच बनाते हुए करीब 14 हजार लोगों को किट वितरण, परामर्श और आईईसी गतिविधियों से जोड़ा है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में रोगाणुमुक्त, क्लोरीनेटेड पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
एम्बुलेंस, 24x7 डॉक्टर और अस्पतालों में मुफ्त इलाज... कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशानुसार क्षेत्र में 5 एम्बुलेंस तैनात की गई हैं और 24x7 चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है। मरीजों को एमवायएच, अरबिंदो और बच्चों को चाचा नेहरू अस्पताल रैफर किया जा रहा है। वहीं निजी अस्पतालों में जाने वाले मरीजों को भी निःशुल्क उपचार, जांच और दवाइयां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सोमवार को भागीरथपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उल्टी-दस्त के 38 केस सामने आए, जिनमें से 6 मरीजों को रैफर किया गया। वर्तमान में कुल 110 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 15 आईसीयू में उपचाररत हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हासानी ने बताया लगातार निगरानी, त्वरित उपचार और जल शुद्धिकरण उपायों के चलते अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता बरत रहा है।
महापौर के खिलाफ एनएसयूआई का प्रदर्शन, पोस्टर पर फेंका गोबर
दूषित पानी से मौतों पर सियासत गरमा गई है। एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के पास बस स्टॉप पर विरोध प्रदर्शन कर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर महापौर के फ्लैक्स-पोस्टर पर गोबर फेंककर विरोध जताया। महापौर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उनसेे तत्काल इस्तीफा देने की मांग की गई है। चौकसे ने चेतावनी दी कि यदि
पानी की गुणवत्ता में सुधार और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी दिनों में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
110 मरीज अस्पताल में भर्ती, 15 आईसीयू में 63 नए मामलों ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता
भागीरथपुरा में नर्मदा की पीने के पानी की लाइन में दूषित जल मिल जाने से उत्पन्न जलजनित त्रासदी से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों बीमार हैं।
वर्तमान में 110 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें 15 की हालत गंभीर होने पर उन्हें आईसीयू में रखा गया है। सोमवार को 63 नए मरीज पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार भागीरथपुरा के लोगों के संपर्क में आने वाले रिश्तेदारों और परिचितों में भी उल्टी-दस्त, पेटदर्द जैसे लक्षण पाए गए हैं। इन्हीं संपर्कों के आधार पर अस्पतालों में भर्ती 63 नए मरीजों की पहचान हुई, जिससे यह आशंका गहराई है कि संक्रमण अब भागीरथपुरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहर के अन्य क्षेत्रों में भी फैल सकता है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर हैं। पूरे मामले की मॉनिटरिंग अपर कलेक्टर पंवार नवजीवन विजय द्वारा की जा रही है। प्रशासन द्वारा 63 मरीजों का डेटा एकत्र कर उनसे संपर्क किया जा रहा है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ अस्पतालों में भर्ती मरीजों के नाम-पते दर्ज करने में त्रुटियां हुईं, जिसके कारण मरीजों के पते भागीरथपुरा के बजाय शहर के अन्य क्षेत्रों के दर्ज हो गए। इससे वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन हो गया।
रविवार को कलेक्टर शिवम वर्मा ने भी स्वास्थ्य विभाग को शहर के सभी क्षेत्रों में दूषित जल से होने वाले संक्रमण के लक्षणों की गहन जांच कर 7 दिन में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नगर निगम की टीम से समन्वय कर जहां भी दूषित जल की शिकायत मिले, वहां तत्काल कार्रवाई करने के आदेश जारी किए गए हैं।
स्थानीय रहवासियों का कहना है नर्मदा जल सप्लाई वाले अन्य इलाकों में भी कई बार नलों से पहले गंदा पानी आता है, जिसे बहाने के बाद ही पीने योग्य पानी मिल पाता है। यह स्थिति पेयजल व्यवस्था की गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अब तो...सद्बुद्धि दें, मां रेवा
इंदौर के लिए भागीरथपुरा की घटना गहरा आघात है। सबसे स्वच्छ शहर में पानी के साथ पसरी राजनीतिक गंदगी भी यहां की जनता पी रही है। थाली के बाद घंटा चर्चा में है। इस बीच सबसे बड़ा दर्द उस मां नर्मदा का है, जिसको आधुनिक साधनों से पहले गुजरात फिर चरणों में इंदौर लाया गया। अब उस जीवनदानी मां के जल को जहरीला बना दिया गया।
दर्द उस निमाड़ का भी है, जहां मां नर्मदा के नाम के बिना सांसें नहीं चलती। जल परियोजना का पहला चरण आना था, लेकिन निमाड़ इंदौर की प्यास बुझाने में पीछे छूट गया। नर्मदे हर की गूंज मां रेवा के किनारों पर अनंत काल तक गूंजती रहेंगी, लेकिन क्या नर्मदा जल का नाम खराब करने वाले शर्मिंदा होंगे।
मां अहिल्या की नगरी नर्मदाजी आने के बाद भी क्यों स्वच्छ पानी को तरस रही है। इसके प्रचार में जितना पैसा खर्च हुआ, या मिलने के बाद कान्ह नाले में बह गया, वो भी छोड़ दें, तो भी इस नाले के किनारे किन रसूखदारों का कब्जा है, ये सवाल तो बनता है।
बात कर रहे हैं उस इंदौर की, जिसने अपनी पूरी क्षमता के साथ एक विचारधारा को ताकत दी है। शहर आज अचानक सदमे में है, बड़े भविष्य को लेकर परेशान है और बच्चे अपने स्वच्छ शहर को लेकर संशय में।
नर्मदाजी के चरणों के नाम पर कई नेता और अफसर न जाने कौन-कौन तर गए लेकिन मां नर्मदा के पानी को विषैला बनाने वाले अपने पाप कहां धोने जाएंगे? मां नर्मदा ही इनको मोक्ष दें...
नर्मदे हर
जल संकट और स्वास्थ्य सेवाओं का लिया जायजा
भागीरथपुरा क्षेत्र में जल प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच प्रशासनिक सक्रियता तेज हो गई है। आज सुबह कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने संयुक्त रूप से प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का सूक्ष्म निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने न केवल राहत कार्यों की समीक्षा की, बल्कि जमीनी स्तर पर चल रहे सुधार कार्यों की गुणवत्ता भी परखी।
कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान स्पष्ट किया कि प्रशासन की निगरानी में क्षेत्र में रिंग सर्वे का कार्य निरंतर जारी है। स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार पानी के सैंपल एकत्र कर रही है, जिनकी सख्त मॉनिटरिंग की जा रही है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए प्रभावित नागरिकों को समुचित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, साथ ही स्वास्थ्य विभाग व निगम की टीमें घर-घर जाकर लोगों को पानी उबालकर व छानकर पीने के लिए जागरूक कर रही हैं।
अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए... क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने व्यापक इंतजाम किए हैं। आयुक्त क्षितिज सिंघल ने टैंकरों के माध्यम से किए जा रहे जल वितरण कार्य का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने पाइपलाइन में लीकेज सुधार के कार्यों का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि मरम्मत कार्य की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।
निगम ने पूरे भागीरथपुरा क्षेत्र को 32 बीट में विभाजित किया है ताकि दूषित जल पर नियंत्रण, स्वच्छता अभियान और स्वच्छ पानी की आपूर्ति हर घर तक प्रभावी ढंग से की जा सके। आयुक्त ने इन सभी बीट प्रभारियों के कार्यों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। वर्तमान में जिला प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें क्षेत्र में मुस्तैदी से डटी हुई हैं ताकि स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य बनाया जा सके।
भागीरथपुरा जलकांड की सबसे दर्दनाक तस्वीर, 5 माह के मासूम को खो चुकी मां की पीड़ा
भागीरथपुरा जलकांड के बाद भले ही सत्ता पक्ष खुद को बचाने की कोशिशों में जुटा हो, विपक्ष इस त्रासदी को मुद्दा बना रहा हो और मीडिया में तरह-तरह की खबरें चल रही हों, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का असली दर्द वे परिवार झेल रहे हैं, जिन्होंने अपनों को खो दिया। सोमवार को सोशल मीडिया पर सामने आई एक हृदयविदारक तस्वीर ने पूरे शहर को झकझोरकर रख दिया।
10 साल की मन्नत के बाद मिला था बेटा, जहरीले पानी ने छीन ली सांसें
भागीरथपुरा के आरोग्य क्लिनिक में सोमवार को ऐसा ही एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला। यहां साधना साहू नामक महिला दवाइयां लेने पहुंची थी। साधना वही मां है, जिसने 10 वर्षों की लंबी मन्नतों के बाद अपने 5 माह के बेटे अव्यान को जन्म दिया था। दूषित और जहरीले पानी ने उनके बेटे की जिंदगी छीन ली।
क्लिनिक में मीडिया से बात करते हुए साधना की आंखों में आंसू थम नहीं रहे थे। उन्होंने भर्राई आवाज में कहा, मेरे बच्चे को तो इस जहरीले पानी ने मुझसे छीन लिया… अब घर आए मेहमानों की तबीयत भी यहां के पानी से बिगड़ रही है। मैं उनके लिए दवाई लेने आई हूं। मेरा बेटा तो नहीं बचा, अब कम से कम मेहमानों को तो बचा लूं।
नर्मदा जल मिलाकर पिलाया गया दूध, उल्टी-दस्त से बिगड़ी हालत
साधना के पति ने बताया बच्चे को दूध में नर्मदा का पानी मिलाकर पिलाया जाता था। उसी पानी की वजह से उसे लगातार उल्टी-दस्त की शिकायत होने लगी। हालत बिगड़ने पर तीन पुलिया स्थित एक शिशु रोग विशेषज्ञ के पास ले गए, जहां से दवाइयां देकर तीन दिन बाद फिर जांच के लिए बुलाया गया था।
सुबह 4 बजे बिगड़ी तबीयत, रास्ते में ही थम गई सांसें... परिवार के अनुसार तीसरे दिन सुबह करीब 4 बजे अचानक बच्चे की हालत बेहद गंभीर हो गई। परिजन उसे नजदीकी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
सरकारी मदद मिली, लेकिन क्या मुआवजा बच्चे को लौटा सकता है?
घटना के बाद सरकार द्वारा घोषित आर्थिक सहायता राशि उक्त परिवार को प्राप्त हो चुकी है, लेकिन यह सवाल अब भी जिंदा है कि क्या मुआवजा उस मासूम की जान लौटा सकता है? और क्या इस जलकांड के जिम्मेदारों पर कभी ठोस कार्रवाई होगी?
भागीरथपुरा जलकांड सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि उन टूटे हुए सपनों और उजड़े परिवारों की त्रासदी है, जिनकी पीड़ा हर बूंद पानी के साथ बह रही है।
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