मोदी-शाह के खास नितिन बन गए बॉस: दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल भाजपा में शुरू हुआ ‘नबीन अध्याय'
KHULASA FIRST
संवाददाता

‘नित्य-नूतन' करने वाली भाजपा ने नए अध्यक्ष के जरिये पेश की राजनीतिक क्षेत्र में नई मिसाल
शिवराज से वसुंधरा, भूपेंद्र से प्रधान तक देखते रह गए, मोदी-शाह की जोड़ी फिर सिरमौर
आरएसएस सहित दल को भी ‘जुगलजोड़ी' ने किया हतप्रभ, किया वही जो ठान रखा था
बिहार जीत के शोर में अकस्मात कार्यकारी अध्यक्ष, मुंबई जीत के उल्लास में एकाएक स्थायी अध्यक्ष की प्रक्रिया पूर्ण
नबीन पर पश्चिम बंगाल में पार्टी की फ़तह का दबाव, दक्षिणी क्षेत्र में पार्टी का परचम फहराना भी चुनौती
भाजपा के महत्वाकांक्षी नेताओं को नए अध्यक्ष की दो-टूक- शॉर्टकट नहीं, पेशंस से मिलेगा पार्टी में पद
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अब नितिनजी ही मेरे बॉस... के साथ ‘जुगलजोड़ी' ने अपने खास को कमलदल कुटुंब का मुखिया मनोनीत कर दिया। इसके साथ ही भारतीय राजनीति में ‘नित्य-नूतन' करने वाले दल ने इस ‘नवीन अध्याय' की शुरुआत कर दी।
जैसे ‘मिशन-2023' में तयशुदा चेहरे टुकरते ही रह गए, वैसे ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के मसले पर भी हुआ। नामचीन सब धरे रह गए और एक बार फिर ‘नबीन' फैसला हो गया। अब मातृसंस्था से लेकर पार्टी गलियारों तक में इस बात पर चिंतन-मंथन है कि इस ‘नवीनता' की तलाश कब और कैसे हुई, जो किसी को कानोकान खबर तक न हुई?
उधर, नए मुखिया ने भी पद संभालते ही ये साफ कर दिया कि भाजपा में शॉर्टकट राजनीति नहीं चलना है, जो आजकल पार्टी में चलन है। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु व केरल के आगामी चुनावों की जिम्मेदारी के साथ नूतन अध्यक्ष ने तावड़े व राम माधव जैसे नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए भाजपा में ‘नबीन अध्याय’ लिखना भी शुरू कर दिया।
आ खिर वही हुआ, जिसका अंदाजा था। देश ही नहीं, दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल भाजपा में अंतत्वोगत्वा चली ‘जुगलजोड़ी' की ही। न ‘मातृसंस्था' का ‘जोर' चला, न उम्रदराज को ताजपोशी के शोर को तव्वजो मिली। भाजपा में शीर्ष स्तर पर आखिर हुआ वही, जो ‘राम रचि राखा' की तर्ज पर पहले से तय था।
मोदी-शाह का खासमखास पार्टी का ‘बॉस' बन ही गया। इसके साथ ही सत्ता व संगठन स्तर पर ‘दो ध्रुवीय' व्यवस्था की उम्मीदें धूल-धूसरित हो गईं। ‘एक ध्रुव' ही अब पूर्ववत सत्ता व संगठन के बीच बना रहेगा।
जैसा निवर्तमान मुखिया के दौर में था, वैसा ही नूतन अध्यक्ष के समय भी बने रहना है। सब तरह के शुभ-मंगल की कामना के साथ ‘कमलदल' में एक नए ‘नबीन अध्याय' का मंगलवार को विधिवत शुभारंभ हो गया।
जी हां, बात है भाजपा की। नितिन नबीन अब इस दल के विधिवत राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। अब तक वे कार्यकारी अध्यक्ष थे। पार्टी संविधान के मुताबिक बनी प्रक्रिया को पार कर वे मंगलवार को पार्टी ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी बॉस बन गए।
जी हां, क्योंकि प्रधानमंत्री ने नए अध्यक्ष की ताजपोशी में अपने उद्बोधन में साफ कर दिया कि अब आज से नितिनजी मेरे बॉस! मेरे कामकाज की समीक्षा व उस पर नंबर देने का काम भी नितिनजी ही करेंगे।
मोदी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को ‘बॉस' स्वीकारने की बात ने देशभर में पसरी पार्टी को साफ संदेश दे दिया कि ‘नबीन' में भी ‘पुरातन' ही देखा-समझा व महसूस किया जाए। पद पर उम्र का पैमाना नहीं, ओहदे की अहमियत को स्थापित करते प्रधानमंत्री ने शीर्ष नेताओं को इशारे में साफ कर दिया कि जब वे मेरे बॉस हो सकते हैं, तो शेष सब भी समझ लें कि नितिन नबीन की अहमियत क्या है? लिहाजा कोई किंतु-परंतु का लिहाज नहीं किया जाएगा।
46 साल की भाजपा कुल-कुटुंब का मुखिया 45 साल के नबीन को बनाकर कमलदल ने एक लंबी व अमिट लकीर भी देश के राजनीतिक पटल पर लिख दी। एक तरफ कांग्रेस सहित अन्य दलों में जहां नेतृत्व का संकट है, वहीं भाजपा में एक ‘कल के आए छोरे' को अध्यक्ष जैसे पद पर पदांकित कर दिया।
ये फैसला पार्टी विचारधारा की पुष्टता व संगठन की दृढ़ता का खुलासा भी करता है, जहां व्यक्ति नहीं, विचार प्रबल होता है। नितिन मेरे बॉस कहकर मोदी ने ये भी साफ कर दिया कि जिस तरह मातृसंस्था आरएसएस की शाखा का मुख्य शिक्षक भले ही वह तरुण ही क्यों न हो, उस शाखा का भी बॉस होता है, जिसमें सरसंघचालक शामिल हो।
वैसे ही मातृसंस्था की राजनीतिक शाखा भाजपा के भी अब ‘मुख्य शिक्षक' 45 साल के नबीन हो गए। उनके अधीन मोदी-शाह ही नहीं, राजनाथ-शिवराज भी होंगे।
बिहार के जश्न में अस्थायी, मुंबई उत्सव में स्थायी अध्यक्ष, सब हुआ झटपट
मोदी-शाह की जोड़ी ने नए अध्यक्ष पद पर ताजपोशी बेहद तुरत-फुरत की। सालभर से भी ज्यादा समय तक इसे लेकर जबरदस्त माहौल बना हुआ था। अध्यक्ष पद का मामला इस कदर खास हो गया था कि दिल्ली में सरसंघचालक तक से इस संबंध में मीडिया के सवाल-जवाब हो गए थे।
उन्हें सफाई भी देना पड़ी थी कि हमारे हाथ में होता तो क्या विलंब होता? लिहाजा मोदी-शाह की जोड़ी ने भी देर नहीं की। पार्टी जिस वक्त बिहार जीत के जश्न में निमग्न थी, उसी वक्त अकस्मात कार्यकारी अध्यक्ष की घोषणा हो गई। सबको लगा, अब बात गई 6 महीने तक। उसके बाद ही स्थायी अध्यक्ष आएगा।
जब तक नए समीकरण बनते, इस बार महाराष्ट्र के नगरीय निकाय, खासकर मुंबई जीत के शोर में एकाएक स्थायी अध्यक्ष के चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो गया। कोई कुछ समझ पाता, तब तक शाह-मोदी की जोड़ी ने हाथ पकड़कर नबीन को अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाकर मुंह भी मीठा करा दिया।
‘जुगलजोड़ी' ने दल को ही नहीं, ‘मातृसंस्था' को भी चौंका दिया
मोदी-शाह की जोड़ी ने नए अध्यक्ष की ताजपोशी के मामले में न सिर्फ पार्टी नेताओं, बल्कि मातृसंस्था को भी हतप्रभ कर दिया। कहां तो ये शोर मचा था कि इस बार भाजपा का नया अध्यक्ष आरएसएस की पसंद का होगा और कहां अकस्मात नितिन नबीन उभरकर सामने आ गए।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व मौजूदा केंद्रीय कृषिमंत्री शिवराजसिंह चौहान को इस पद का सहज व प्रबल दावेदार माना जा रहा था। उन्हें सालभर से आरएसएस की पसंद भी बार-बार प्रचारित किया जा रहा था, लेकिन शिवराज सहित वसुंधरा राजे, भूपेंद्र सिंह, भूपेंद्र प्रधान भी टुकुर-टुकुर देखते ही रह गए।
‘जुगलजोड़ी' ने वही किया, जो ठान रखा था। इस जोड़ी के जरिये अध्यक्ष पद का फैसला भी वैसा ही हुआ, जैसा मिशन-2023 के समय मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का चयन हुआ था। तयशुदा नेता मुंह ताकते रह गए और दल की कमान भी नबीन को दे दी गई।
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