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शिवभक्ति की दिव्य रात्रि है महाशिवरात्रि: उमड़ेगा भक्ति का ज्वार और बरसेगा आशीर्वाद

KHULASA FIRST

संवाददाता

04 फ़रवरी 2026, 1:05 अपराह्न
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शिवभक्ति की दिव्य रात्रि है महाशिवरात्रि

हेमंत उपाध्याय 99930-99008 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
‘न मे द्वेषरागौ न मे लोभमोहौ, मदो नैव मे नैव मात्सर्यभावः। न धर्मो न चार्थो न कामो न मोक्षः चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्।।’

आदि शंकराचार्य के इस निर्वाणषट्कम् स्तोत्र का अर्थ है आत्मा वास्तव में सभी मानवीय विकारों और सांसारिक बंधनों से मुक्त है। न किसी से नफरत करती है न प्रेम, न लालच।

यहां तक कि वह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के चार लक्ष्यों के बंधनों में भी नहीं है। केवल शुद्ध चेतना और आनंद का स्वरूप है। वही शिव है।

शिव और शक्ति का मिलन केवल एक विवाह की कथा नहीं
महाशिवरात्रि ( 15 फरवरी ) केवल तिथि नहीं है। इसे ऐसी संधि वेला भी कहा जा सकता है, जब काल यानी समय भगवान महाकाल में विलीन हो जाता है। यूं तो यह फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की घनी अंधियारी रात है, लेकिन आत्म प्रकाश का मार्ग दिखाती है।

महाशिवरात्रि पर्व उस परमानंद का उत्सव भी है, जहां शिव और शक्ति का मिलन केवल विवाह की कथा नहीं, पुरुष और प्रकृति के पूर्ण सामंजस्य का प्रतीक भी है।

‘ज्योतिर्लिंग’ का प्राकट्योत्सव
शिव पुराण में उल्लेख है महाशिवरात्रि की इसी दिव्य रात्रि को ब्रह्मांड के प्रथम प्रकाश स्तंभ ‘ज्योतिर्लिंग’ का प्राकट्य हुआ था। यह वह रात है जब सृष्टि की ऊर्जा उर्ध्वगामी यानी ऊपर की ओर प्रवाहित होती है।

पुराणों में बताया गया है जहां अन्य त्योहार बाहरी हर्षोल्लास के होते हैं, वहीं महाशिवरात्रि अंतर्मुखी होकर भीतर की शून्यता को शिवत्व से भरने का अवसर है। भगवान शिव ‘आशुतोष’ हैं, जो केवल श्रद्धा से भरे गए एक लोटा जल और बेलपत्र से तृप्त हो जाते हैं।

महर्षि वेदव्यास ने शिव पुराण में स्पष्ट लिखा है महादेव केवल कर्मकांड नहीं, ‘आत्म-संयम’ से प्रसन्न होते हैं। महाशिवरात्रि का उपवास दरअसल अपनी इंद्रियों को बाहरी आकर्षणों से हटाकर अपनी आत्मा में स्थित होने का उपक्रम है।

आगम शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि ‘विजय की रात्रि’ है। खुद के अहंकार पर और मृत्यु के भय पर विजय। जब हम ॐ नमः शिवाय का जप करते हैं, तो केवल मंत्र नहीं पढ़ते बल्कि ब्रह्मांड के पांच तत्वों यानी पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश को अपने भीतर संतुलित करते हैं।

महाशिवरात्रि पर्व यह भी सीख देता है विष को गले में थामकर भी संसार का मंगल कैसे किया जाता है। यही कारण है आज भी यह पर्व अपने विशिष्ट महत्व के कारण शिवभक्ति का अनूठा माध्यम है।

राशि अनुसार शिव पूजन
मेष : शहद और गुड़ मिश्रित जल से अभिषेक कर अंत में ‘अबीर’ अर्पित करें।

वृषभ : कच्चे दूध और दही से स्नान कराएं। सफेद सुगंधित फूल और चावल अर्पित करें।

मिथुन: गन्ने के रस से अभिषेक करें। ताजी ‘दूर्वा’ और मूंग अर्पित करना अत्यंत शुभ रहेगा।

कर्क : शिवलिंग पर शुद्ध घी और पंचामृत चढ़ाएं। शीतल जल से स्नान कराकर ‘श्वेत चंदन’ का तिलक लगाएं।

सिंह : केसरयुक्त जल अर्पित करें। आक के फूल चढ़ाएं। मंदिर में लाल चंदन का धूप जलाएं।

कन्या : महादेव को बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करें। गन्ने के रस से अभिषेक भी उत्तम फलदायी होगा।

तुला : शिवलिंग पर इत्र अर्पित करें। चंदन या श्रीखंड का लेप करें।

वृश्चिक : पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक कर लाल पुष्प और बेलपत्र की जड़ अर्पित करें।

धनु : केसरयुक्त दूध अर्पित करें। चने की दाल और पीले फूलों की माला चढ़ाएं।

मकर : गंगाजल में काले तिल मिलाकर अभिषेक करें। शमी के पत्ते अर्पित करें।

कुंभ : नारियल पानी से स्नान कराएं। नीले रंग के पुष्प और तिल अर्पित करना श्रेष्ठ रहेगा।

मीन : केसर मिश्रित जल अर्पित करें। कमल का पुष्प या पीले कनेर के फूल चढ़ाएं।

राशि अनुसार फलादेश
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि पर्व पर चंद्रमा की स्थिति और ग्रहों के गोचर से प्रत्येक राशि के जातक को शुभ फल प्राप्त होगा।

मेष: साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी। लंबे समय से रुके हुए कार्य गति पकड़ेंगे। कर्ज की स्थिति में सुधार होगा।

वृषभ: भौतिक सुख-सुविधाओं और ऐश्वर्य की प्राप्ति, दांपत्य जीवन में मधुरता। घर में शांति रहेगी।

मिथुन: व्यापारिक दृष्टिकोण से अत्यंत फलदायी। वाणी का प्रभाव बढ़ेगा। रुके हुए सौदे पूरे होंगे।

कर्क: चंद्रमा के अधिपति होने से मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी। माता के स्वास्थ्य में सुधार, पारिवारिक सुख प्राप्त होगा।

सिंह: मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। सरकारी कार्यों अथवा राजनीति से जुड़े लोगों को बड़ी सफलता मिलेगी।

कन्या: शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। स्वास्थ्य संबंधी पुरानी समस्याओं का अंत होगा। कार्यक्षेत्र में तर्कशक्ति की प्रशंसा होगी।

तुला: व्यापार और प्रेम संबंधों के बीच संतुलन बनेगा। अटके धन की प्राप्ति होगी। कलात्मक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।

वृश्चिक: किसी बड़े परिवर्तन या रूपांतरण के संकेत हैं। आकस्मिक दुर्घटनाओं के योग टलेंगे । आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि होगी।

धनु: उच्च शिक्षा और आध्यात्मिक प्रगति के योग हैं। भाग्य का साथ मिलेगा। संतान पक्ष से सुखद समाचार प्राप्त होंगे।

मकर: कर्मक्षेत्र में आ रही बाधाएं दूर होंगी। शनि के प्रभाव के कारण जो संघर्ष चल रहा था, उसमें शिव कृपा से स्थिरता आएगी।

कुंभ: नए शोध या नवीन व्यापारिक अवसरों के मार्ग खुलेंगे। भीतर का अंतर्ज्ञान बढ़ेगा जो सही निर्णय लेने में सहायक होगा।

मीन: आध्यात्मिक मोक्ष और शांति की प्राप्ति। अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगेगी, विदेशों से जुड़े कार्यों में सफलता मिलेगी।

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