कानून के रक्षक या स्क्रिप्ट राइटर: फिल्मी कहानी; असली तबाही, आईपीएस की बनाई फर्जी ड्रग्स स्क्रिप्ट हाई कोर्ट में ध्वस्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

जवान बरी IPS कटघरे में
फर्जी ड्रग्स कांड में आईपीएस की भूमिका का खुलासा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में फरवरी 2025 में जब यह खबर फैली कि एक थाने का जवान रुपए लेकर ड्रग्स बिकवाता है, तब पूरे पुलिस महकमे की साख पर ऐसा दाग लगा कि आम नागरिकों के मन में हर वर्दीधारी को शक की नजर से देखा जाने लगा था।
मंगलवार को जब इस प्रकरण में सभी आरोपियों विजय, शाहनवाज और कांस्टेबल लखन गुप्ता को हाई कोर्ट द्वारा दोषमुक्त कर दिया गया, तब यह साफ हो गया कि असल अपराधी कोई और थे।
अब इस मामले में बरी हुए सभी आरोपियों ने उस पूरे षड्यंत्र के खिलाफ, जिसे कथित तौर पर कुछ पुलिस अधिकारियों ने रचा था, हाई कोर्ट में क्षतिपूर्ति और दोषियों को दंडित कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत करने का फैसला किया है।
अपनी सर्विस बुक चमकाने आईपीएस ने जवान को फंसाया
इस फर्जी ड्रग्स कांड की परतें जैसे-जैसे खुलती जा रही हैं, वैसे-वैसे यह सवाल और गहराता जा रहा है कि क्या आईपीएस कानून के रक्षक हैं या अपनी सर्विस बुक चमकाने के लिए अधीनस्थों को बलि का बकरा बनाने वाले निर्देशक? मंगलवार को हाई कोर्ट से बहाल हुआ जवान भले ही न्याय पा गया हो, लेकिन इस फर्जी एमडी कांड का खुलासा होने के बाद सिस्टम पर गहरा सवालिया निशान लग गया है।
ऐसे हुई इस फर्जी खेल की शुरुआत
दरअसल, इस पूरे खेल की शुरुआत आजाद नगर निवासी शाहरुख से हुई, जो करीब आठ वर्ष से एक महिला मित्र तनुआलिया के साथ रह रहा था। शाहरुख की पत्नी नरगिस को यह रिश्ता स्वीकार नहीं था। इसी बात को लेकर नरगिस ने आजाद नगर थाने में कई बार शिकायतें की।
आरोप था कि शाहरुख दूसरी महिला के साथ रहता है और सोशल मीडिया पर जानबूझकर ऐसे वीडियो पोस्ट करता है, जिनसे नरगिस को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा सके। चूंकि शाहरुख कानूनी रूप से तनुआलिया के साथ नहीं रह रहा था, इसलिए नरगिस ने पहले थाने, फिर एसीपी और अंततः डीसीपी तक अपनी शिकायत पहुंचाई।
अपना ही गुणगान करते रहे आईपीएस
इसी बीच अखबारों में नाम छपवाने की होड़ शुरू हुई। आईपीएस करणदीप सिंह अपने कार्यकाल में दावा करते रहे कि उनके काम की गूंज भोपाल तक सुनाई देती है। दूसरी ओर डीसीपी विनोद मीणा कुछ महीने पहले ही उज्जैन से ट्रांसफर होकर इंदौर आए थे।
उसी दौरान प्रशिक्षु आईपीएस आदित्य सिंघारिया को तेजाजी नगर थाने में टीआई का कार्य सीखने के लिए पदस्थ किया गया। आरोप है कि इन तीनों आईपीएस अधिकारियों ने मिलकर पूरे फर्जी ड्रग्स कांड की पटकथा लिखी। एसीपी करणदीप ने अपने खास जवान अरुण गुरइया से कहा कि कोई बड़ा काम करो, जिससे जल्दी प्रदेशभर में नाम हो जाए।
विभाग के विभीषण के खेल में आईपीएस
इस पूरे खेल में कांस्टेबल लखन गुप्ता को भी जानबूझकर फंसाया गया। डीसीपी विनोद मीणा और एसीपी करणदीप के खास जवान संजय मालाकार और राजू बघेल की वारंट तामीली को लेकर लखन से कहासुनी हो गई थी। इसकी शिकायत ऊपर तक पहुंची और एसीपी ने लखन को कैबिन में बुलाकर अपमानित किया।
आरोप है कि इसके बाद शाहरुख को मोहरा बनाकर लखन के खिलाफ यह बयान दिलवाया गया कि वह हर महीने 35 हजार रुपए लेकर ड्रग्स बिकवाता है। लखन की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने अधिकारी से गाली न देने को कहा था। इसी का बदला लेते हुए उसे जेल भिजवा दिया गया।
अब षड्यंत्रकारी अफसरों को घेरने की तैयारी
हाई कोर्ट में मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता नितिन पाराशर ने बताया कि थाना आजाद नगर के अपराध क्रमांक 124/2025 में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22 के तहत बनाया गया पूरा केस खारिज कर दिया है। सभी आरोपी दोषमुक्त करार दे दिए गए। अब इस पूरे षड्यंत्र में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हाई कोर्ट में क्षतिपूर्ति व दंडात्मक कार्रवाई के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा।
ऐसे बनाया शाहरुख को मोहरा
शाहरुख की गिरफ्तारी के बाद एसीपी के खास जवान अरुण गुरइया ने उस पर दबाव बनाया कि वह कोई बड़ा ड्रग्स केस करवा दे। पहले किसी ड्रग्स माफिया को पकड़वाने की बात हुई, लेकिन सीपी संतोष सिंह के आने के बाद अधिकांश माफिया शहर छोड़ चुके थे।
इसके चलते शाहरुख पर कहीं से बड़ी खेप मंगवाने का दबाव डाला गया। शाहरुख ने मंदसौर के खजूरिया गांव से एमडी दिलवाने की बात कही, लेकिन ड्रग्स सौदागर पहले रुपए वीडियो कॉल पर दिखाने की शर्त रखते हैं। इसके लिए थाने में डेढ़ लाख और एसीपी स्तर से ढाई लाख मिलाकर कुल चार लाख रुपए इकट्ठा किए गए।
लैब रिपोर्ट में निकला था यूरिया
इस फर्जी कांड का खुलासा 27 जून 2025 को हुआ, जब भोपाल की सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट में कथित एमडी ड्रग्स की जगह यूरिया (पोटेशियम नाइट्रेट) बताया गया। रिपोर्ट आते ही अधिकारियों ने अपनी किरकिरी होने से बचने के लिए उसे दूसरी लैब में भेजने की बात शुरू कर दी।
ऐसे पकड़ी थी एमडी
26 फरवरी की रात 9 बजे सबइंस्पेक्टर रवि बट्टी, एएसआई मनोज दुबे, प्रधान आरक्षक देवेंद्र परिहार, आरक्षक गोविंद, देवेंद्र राणा और अभिनव शर्मा रालामंडल की ओर जा रहे थे। पुलिस ने दावा किया कि दो व्यक्ति भागते दिखे, जिन्हें पकड़ने पर 198 ग्राम एमडी बरामद हुई। जवानों ने यह तक कह दिया कि अनुभव के आधार पर चखने पर उन्हें यह एमडी लगी। इसके बाद शाहरुख और विकास को पकड़कर थाने लाए और फर्जी केस दर्ज कर दिया गया।
मंदसौर में नहीं मिली तो इंदौर से अरेंज की ड्रग्स
24 और 25 फरवरी 2025 को आजाद नगर व तेजाजी नगर थाने का स्टाफ मंदसौर पहुंचा, जहां गोलू नामक व्यक्ति से ड्रग्स मिलने की बात थी, लेकिन सौदा फेल हो गया। इसके बाद खेत में काम कर रहे विजय पाटीदार को उठाकर गांधी नगर ले जाया गया। जब पूरी प्लानिंग फेल होती दिखी तो डीसीपी विनोद मीणा को सूचना दी गई।
आरोप है कि इसके बाद इंदौर से 198 ग्राम एमडी मंगवाई गई। पुलिस की सबसे बड़ी चूक यह रही कि यह साबित करने वाला कोई नहीं था कि एमडी असली है। इसलिए आजाद नगर थाने में बंद शाहरुख को चखवाई गई और फिर मीडिया में परोसने की पूरी स्क्रिप्ट तैयार हुई। 26 फरवरी 2025 को इस फर्जी प्लान को अमलीजामा पहनाया गया।
पुलिस ने होटल से पकड़ा था राहुल को
नरगिस ने 16 जनवरी को तत्कालीन एसीपी करणदीप सिंह को लिखित आवेदन दिया, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो 18 जनवरी को उसने तत्कालीन डीसीपी विनोद मीणा को आवेदन सौंपा। इसमें आरोप लगाया गया कि उसका पति एमडी समेत हर तरह का नशा करता है और उसे परेशान करता है।
डीसीपी के निर्देश पर एसीपी करणदीप सिंह को पूरे मामले की जांच सौंपी गई। 24 जनवरी को एसीपी ने शाहरुख और उसके साथ रहने वाली महिला तनुआलिया की लोकेशन ट्रेस करवाई। इस काम के लिए राजू बघेल, संजय मालाकार, प्रदीप पटेल और तेजाजी नगर थाने से अरुण गुरइया को लगाया गया।
उसी दिन भंवरकुआं क्षेत्र के होटल रोज में तनुआलिया का मोबाइल ट्रेस हुआ और पुलिस ने शाहरुख को होटल से पकड़ लिया। हैरानी की बात यह रही कि होटल का डीवीआर संजय मालाकार ने निकाल लिया, ताकि कोई सबूत शेष न रहे।
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