लाठी, लूट और लापरवाही: लसूड़िया पुलिस की बर्बरता पर हाई कोर्ट ने डीसीपी को किया तलब
KHULASA FIRST
संवाददाता

चौराहे से थाने तक पिटाई, कैमरों से बचकर छीने गए रुपए
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
लसूड़िया थाना क्षेत्र में देर रात चाय पीना एक रियल एस्टेट कंपनी के सेल्स मैनेजर को इतना महंगा पड़ेगा, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। होटल संचालक से हुए मामूली विवाद के बाद पुलिसकर्मियों द्वारा खुलेआम मारपीट, थाने में कथित बर्बरता और पैसे छीने जाने का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। पुलिस इसे सामान्य घटना बताकर टालती रही लेकिन जैसे ही मामला कोर्ट में पहुंचा, अधिकारियों के पसीने छूट गए।
दुकान वाला मांग रहा था चाय की दोगुना कीमत... फरियादी हर्ष जावरिया ने बताया 28 दिसंबर 2025 की रात वह बॉम्बे हॉस्पिटल के सामने स्थित श्रीनाथ रेस्टोरेंट पर दोस्तों के साथ चाय पी रहा था। रात ज्यादा होने के कारण होटल संचालक ने चाय के दोगुना पैसे मांगे। सभी ने 60 रुपए का भुगतान कर दिया था, लेकिन अतिरिक्त रकम मांगने पर संचालक और हर्ष के बीच बहस हो गई। इस पर होटल संचालक ने लसूड़िया थाने के दो पुलिस जवान उत्कर्ष उर्फ उज्ज्वल गुरुनंग और नागेंद्रसिंह पंडोलिया को मौके पर बुला लिया।
थाने ले जाकर फिर पीटा, रुपए छीन लिए... आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने आते ही चौराहे पर हर्ष से मारपीट की और उसके पैरों व पीठ पर डंडे मारे। इसके बाद उसे थाने ले गए। फरियादी का आरोप है कि थाने में लगे कैमरों से बचते हुए पुलिसकर्मी उसे ऐसे स्थान पर ले गए, जहां कोई निगरानी नहीं थी।
वहां दोबारा मारपीट की गई। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन लेकर घटना से जुड़े फोटो-वीडियो डिलीट कर दिए और उसकी जेब से 2400 रुपए भी निकाल लिए। घटना के अगले दिन 29 दिसंबर को हर्ष जावरिया ने डीसीपी जोन-2 को लिखित शिकायत दी, लेकिन कई दिन तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। जब पुलिस स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो फरियादी ने हाई कोर्ट में निजी याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने मामले में डीसीपी जोन-2 को 25 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी... लसूड़िया थाना क्षेत्र में कथित पुलिस बर्बरता के इस मामले में हाई कोर्ट ने पुलिस की निष्क्रियता पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने कहा घटना 28 दिसंबर 2025 की रात शहर के बीचोबीच हुई, इसके बावजूद न तो दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की गई और न ही निष्पक्ष जांच के संकेत मिले। याचिकाकर्ता द्वारा चोटों की तस्वीरें पेश किए जाने के बाद भी सीसीटीवी फुटेज का न मिलना कोर्ट के लिए गंभीर चिंता का विषय रहा।
कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अपने पूर्व आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें बड़े शहरों के पुलिसकर्मियों को बॉडी कैमरा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पूर्व निर्देशों पर गंभीरता से अमल नहीं हुआ है। कोर्ट ने संकेत दिए कि यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए तो ऐसी घटनाएं आम नागरिकों के भरोसे को और कमजोर करेंगी।
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