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जेल प्रहरी से ठगी: गैस एजेंसी दिलाने के नाम पर लगाया 20 लाख का चूना

KHULASA FIRST

संवाददाता

14 जनवरी 2026, 7:20 पूर्वाह्न
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जेल प्रहरी से ठगी

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
शहर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय कारागार से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ वर्दी की आड़ में 'ठगी का सिंडिकेट' चलाया जा रहा था। सेना से सेवानिवृत्त होकर जेल प्रहरी बने एक जवान को उसके ही साथियों ने राजनीति और ऊंचे संपर्कों का झांसा देकर लाखों की चपत लगा दी।

दरअसल, जबलपुर की सिविल लाइंस पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर दो जेल प्रहरियों सहित चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन पर आरोप है कि इन्होंने अपने ही एक साथी जेल प्रहरी धीरेन्द्र द्विवेदी को पत्नी के नाम पर गैस एजेंसी दिलाने का झांसा देकर 20 लाख रुपए ठग लिए।

आरोपियों ने फर्जीवाड़ा छिपाने के लिए जाली लाइसेंस और सर्टिफिकेट तक बनाकर दे दिए थे। पीड़ित धीरेन्द्र द्विवेदी (वर्तमान पदस्थापना- सागर जेल) वर्ष 2022 में जबलपुर जेल में पदस्थ थे। इसी दौरान उनकी पहचान जेल प्रहरी जितेन्द्र धाकड़ से हुई।

विश्वास का जाल
जितेन्द्र ने धीरेन्द्र को बताया कि उसके राजनीतिक संपर्क बहुत मजबूत हैं। उसने उदाहरण दिया कि सतना में पदस्थ जेल प्रहरी अनिल शर्मा (पूर्व फौजी) को भी उसने पेट्रोल पंप का लाइसेंस दिलाया है।

बड़ी डील का झांसा
अनिल शर्मा ने धीरेन्द्र की बात योगेश मिश्रा नामक व्यक्ति से कराई। योगेश ने खुद को विशेषज्ञ बताते हुए उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी और एजेंसी दिलाने का दावा किया और इसके बदले 25 से 30 लाख रुपए का खर्च बताया।

किस्तों में वसूली और फर्जी दस्तावेज
धीरेन्द्र ने अपनी पत्नी निशा के नाम पर एजेंसी लेने के लिए हामी भर दी। इसके बाद वसूली का दौर शुरू हुआ।

नकद और बैंक ट्रांसफर
जितेन्द्र धाकड़ ने पहले 1.95 लाख रुपये लिए। इसके बाद योगेश मिश्रा ने करीब 18 से 19 लाख रुपये अपनी मां मूर्ति मिश्रा के बैंक खाते में ट्रांसफर करवाए।

फर्जी लाइसेंस
जब समय बीतने लगा और धीरेन्द्र ने दबाव बनाया, तो आरोपियों ने उन्हें चुप कराने के लिए एक 'गैस एजेंसी लाइसेंस' और 'प्रमाणपत्र' थमा दिया। जब धीरेन्द्र ने इन दस्तावेजों की सत्यता की जांच कराई, तो पता चला कि वे पूरी तरह फर्जी और जाली थे।

न्यायालय की शरण और पुलिस कार्रवाई
जब आरोपियों ने पैसे वापस करने से इनकार कर दिया, तो पीड़ित ने कोर्ट में परिवाद दायर किया। कोर्ट के सख्त रुख के बाद सिविल लाइंस पुलिस ने चारों आरोपियों जितेन्द्र धाकड़ (जेल प्रहरी), अनिल शर्मा (जेल प्रहरी, सतना), योगेश मिश्रा और मूर्ति मिश्रा पर धोखाधड़ी (420), फर्जी दस्तावेज बनाना (467, 468), आपराधिक षड़यंत्र (120B) और आईटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

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