देश की वीरांगना का अपमान कर चेहरे पर बेशर्म वाली हंसी: क्या मंत्री जी माफी मांगने के लिए भी स्क्रिप्ट लेकर आए
KHULASA FIRST
संवाददाता

चार बार माफी के बाद भी माफीनामा लिखकर लाना पड़ा, शर्म आना चाहिए
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हैरानी की बात यह है कि शनिवार को इंदौर के रेसीडेंसी क्षेत्र में जब मंत्री विजय शाह कर्नल सोफिया को लेकर माफीनामा पढ़ रहे थे, तो वह भी बिना तैयारी के नहीं, बल्कि पूरी लिखित स्क्रिप्ट के साथ। मीडिया के सवालों के दौरान मंत्री शाह का रवैया भी अपने आप में कई सवाल खड़े करता नजर आया।
माफी मांगने आए मंत्री जी पूरे समय ऐसी हंसी-हंसी मुद्रा में दिखे, मानो वह किसी गंभीर गलती पर पछतावा जताने नहीं, बल्कि सिर्फ यह औपचारिकता निभाने आए हों कि बोल दिया था, इसलिए माफी मांगनी पड़ रही है। यदि वास्तव में उन्हें अपने बयान पर जरा भी मलाल या आत्मग्लानि होती, तो वह मीडिया से चर्चा से पहले कैमरों के सामने इस तरह बेशर्मी भरी मुस्कान के साथ खड़े नजर नहीं आते। उनके चेहरे पर न पश्चाताप था, न संकोच और न ही शब्दों की जिम्मेदारी का कोई भार था।
संवेदनशील मुद्दों को भी हल्के में ले रहे
यह पूरा घटनाक्रम यही संकेत देता है कि मंत्री विजय शाह इंदौर केवल औपचारिकता निभाने आए थे, न कि अपने बयान की गंभीरता को समझने। कैमरों के सामने मुस्कुराते रहना और माफी को एक मजबूरी की तरह पेश करना, यह साफ दर्शाता है कि सत्ता के अहंकार में संवेदनशील मुद्दों को भी हल्के में लिया जा रहा है।
सवाल यह है कि क्या यह वही गंभीरता है, जिसकी उम्मीद जनता एक संवैधानिक पद पर बैठे मंत्री से करती है, या फिर अब माफी भी एक राजनीतिक ड्रामा बनकर रह गई है? सवाल यह है कि क्या अब मंत्री जी को माफी मांगने के लिए भी स्क्रिप्ट की जरूरत पड़ने लगी है? क्या शब्द इतने अविश्वसनीय हो चुके हैं कि बिना कागज के बोलना भी जोखिम भरा हो गया है?
बार-बार माफी मांगना गलती सुधारने का संकेत नहीं
दरअसल, यह कोई पहली बार नहीं है जब सत्ता के नशे में शब्दों की मर्यादा तार-तार हुई हो। जनवरी 2013 में निर्भया कांड के बाद जब पूरा देश महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहस कर रहा था, तब भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने बयान दिया था एक ही शब्द है मर्यादा, मर्यादा का उल्लंघन होता है तो सीता हरण हो जाता है। ऐसे बयान उस मानसिकता को उजागर करते हैं, जहां अपराधियों पर सवाल उठाने के बजाय महिलाओं और पौराणिक पात्रों को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। कैलाश विजयवर्गीय इससे अलग नहीं रहे।
कुछ वर्ष पहले निर्भया कांड जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उन्होंने माता सीता को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी, जिसके बाद माफी मांगने का सिलसिला शुरू हुआ था। सबसे गंभीर सवाल यह है कि इतने सीनियर और अनुभवी मंत्री क्या बोलने से पहले सोचते नहीं हैं?
या फिर सत्ता का अहंकार विवेक पर हावी हो चुका है? क्या उम्र के साथ अनुभव बढ़ने के बजाय समझ कम होती जा रही है? बार-बार माफी मांगना गलती सुधारने का संकेत नहीं, बल्कि यह साबित करता है कि गलती करना आदत बन चुकी है। जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर कब मंत्री जी की जुबान पर लगाम लगेगी, या फिर अगली माफी की स्क्रिप्ट भी पहले से तैयार रखी जाएगी?
11 मई को रायकुंडा गांव में शाह द्वारा दिया गया विवादित बयान
बीते वर्ष 11 मई को इंदौर के महू क्षेत्र के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह द्वारा दिया गया विवादित और आपत्तिजनक बयान अब कानूनी शिकंजे में बदल चुका है। कार्यक्रम में मंत्री शाह ने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा था कि जिन आतंकियों ने लोगों को मारा, उन्होंने कपड़े उतरवाए और हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ा।
इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री का नाम लेते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री ने उन्हीं की बहन को भेजकर उनकी ऐसी-तैसी करवाई। मंत्री द्वारा सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई इस आपत्तिजनक टिप्पणी ने सियासी और सामाजिक हलकों में तीखा आक्रोश पैदा कर दिया।
अपने ही गैर-जिम्मेदाराना और विवादित बयानों के लिए मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय शाह अब तक चार बार सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं। 13 मई 2025, 14 मई 2025, फिर 23 मई 2025 और अब 07 फरवरी 2026, एक ही बयान और एक ही विषय पर इतनी बार माफी मांगने का रिकॉर्ड शायद ही किसी मंत्री के नाम दर्ज हो। यह रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज हो या नहीं, लेकिन सियासी शर्मनाक घटनाओं की सूची में जरूर दर्ज किया जाना चाहिए।
यह है मंत्रीजी की स्क्रिप्ट
1. मैंने पहले भी कई बार कहा है, आज फिर दोहरा रहा हूं, मेरा ऐसा कोई उद्देश्य नहीं था कि किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या समाज के किसी भी वर्ग क अपमान हो।
2. निस्संदेह मेरे शब्द, मेरी भावना के अनरूप निकले थे, गलती नहीं थे। शब्द देशभक्त के उत्साह, उत्तेजना और आवेश के पीछे की भावना को अवश्य देखा जाना चाहिए। आप सब से याचना की है, कई बार की है, आज फिर कर रहा हूं जानते हैं कि मेरी कोई दुर्भावना नहीं थी।
3. यह मेरे लिए अत्यंत पीड़ादायक है कि मेरी त्रुटि से ऐसा विवाद उत्पन्न हुआ। मुझे विश्वास है कि मेरी भावना को सही संदर्भ में समझा जाएगा।
4. भारतीय सेना के प्रति मेरे मन में सदैव अत्यंत सम्मान रहा है और रहेगा।
5. सार्वजनिक जीवन में रहते हुए शब्दों की मर्यादा और संवेदनशीलता अत्यंत आवश्यक है। इस घटना से मैंने आत्ममंथन किया है। मैंने सबक लिया है, जिम्मेदारी मानता हूं। भविष्य में वाणी पर नियंत्रण रहेगा और ऐसी गलती नहीं होगी।
6. एक बार पुनः मैं इस प्रकरण से आहत सभी नागरिकों से विशेषकर भारतीय सेना से बिना किसी शर्त के क्षमा याचना करता हूं।
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