इंदौर के मैकेनिकल इंजीनियर ने विकसित की विश्व की अनूठी जल शोधन तकनीक: भागीरथपुरा जैसी घटनाओं से निपटने में है सक्षम
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के क्रिस्टल फ्यूजन प्रायवेट लिमिटेड के संस्थापक मैकेनिकल इंजीनियर श्रेयांश अरजरिया द्वारा विकसित की गई जल शोधन तकनीक विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रही है। यह उन्नत तकनीक शून्य जल अपव्यय के सिद्धांत पर कार्य करती है एवं अत्यंत कम रखरखाव में उच्च गुणवत्ता का शुद्ध पेयजल प्रदान करने में सक्षम है।
पीएच-डी के शोधार्थी श्रेयांश ने बताया जल उपचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सक्षम यह विश्व की अपनी तरह की एकमात्र तकनीक है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ दिन पूर्व इंदौर के भागीरथपुरा में हुई जल त्रासदी जैसी घटनाओं से निपटने में भी यह पूर्णत सक्षम है।
दुर्घटनाग्रस्त अथवा अत्यधिक प्रदूषित जलस्रोतों को भी तेजी से सुरक्षित एवं उपयोगी बना सकती है। जहां अन्य परंपरागत जल शोधन प्रणाली विफल हो जाती है, वहीं क्रिस्टल फ्यूजन द्वारा विकसित यह तकनीक प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती है।
जल की प्रत्येक बूंद का हो संरक्षण
संस्थापक श्रेयांश अरजरिया ने बताया यह तकनीक भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर इंदौर में ही विकसित एवं डिजाइन की गई है। सह संस्थापक आराधना अरजरिया के अनुसार जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण उनका लक्ष्य है।
विगत दिनों भागीरथपुरा में हुई जल त्रासदी ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि भारत के प्रत्येक नागरिक का अधिकार है कि उसे शुद्ध पेयजल प्राप्त हो, इसके लिए इस घटना के बाद क्रिस्टल फ्यूजन संस्थापक द्वारा इंदौर के आईआईटी संस्थान के एसीई फाउंडेशन द्वारा भी इस संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त किया गया एवं उनके द्वारा इस तकनीक को शैक्षणिक स्तर पर परिमार्जित कर इस जल शोधन समाधान में वैज्ञानिक रूप से भी मजबूत व्यावहारिक सहायता प्राप्त की गई है।
स्वच्छ पेयजल प्रत्येक नागरिक का अधिकार
संस्थापक श्रेयांश के अनुसार संविधान की मंशा अनुरूप स्वच्छ पेयजल हर नागरिक का अधिकार है एवं यह तकनीक इस अधिकार को प्राप्त करने की दिशा में एक ठोस एवं बड़ा कदम है। हमारे शहरों में कुछ स्थानों पर गरीब एवं घनी बस्तियां हैं, जो शुद्ध पेयजल के लिए वाटर टैंकर पर निर्भर हैं।
इस दिशा में यह तकनीक मील का पत्थर साबित हो सकती है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड जैसे स्थानों पर आम आदमी की महंगी पैक्ड पानी की बोतल पर निर्भरता खत्म करने में सक्षम है।
शोध जारी: श्रेयांश के अनुसार इस तकनीक पर शोध जारी है, जिससे भविष्य में औद्योगिक स्तर पर फैक्ट्री, कॉल सेंटरों अथवा अत्यधिक जनसंख्या घनत्व वाले इलाकों में भी पेयजल समस्या का हल संभव है।
भविष्य की तकनीक को ध्यान में रखते हुए आमजन द्वारा दैनिक उपयोग होने वाले जल जैसे वाटर सॉफ्टनर एवं अन्य कार्यों के लिए भी इस तकनीक से उपलब्ध कराने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है।
जलसंकट से निपटने में होगा सहायक: श्रेयांश के मुताबिक तकनीकी रूप से यह न सिर्फ जल समस्या का समाधान है, बल्कि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत को स्थापित करने व सामाजिक समरसता प्राप्त करने में भी प्रेरणादायक मॉडल है।
यह तकनीक शहरी व ग्रामीण जलसंकट समाधान में सहायक है। आपदा प्रबंधन, औद्योगिक जल उपचार एवं ग्राम पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम द्वारा प्रदत्त जल सुरक्षा का भी मजबूत विकल्प है। उनके संस्थान क्रिस्टल फ्यूजन द्वारा भारत में इस तकनीक का पेटेंट कराया गया है।
कम रखरखाव में मिलेगा उच्च गुणवत्ता का शुद्ध पेयजल
उन्होंने बताया मध्य प्रदेश स्टार्टअप भोपाल में पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा एमएसएमई के तहत आयोजित सेमिनार में भी इस तकनीक का प्रदर्शन किया गया था, जहां इसे काफी सराहा गया। यह नवाचार तकनीकी नीतिगत औद्योगिक मानकों पर भी खरा उतरता है।
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