किस नगर निगम में इतने करोड़ का फर्जी बिल घोटाला: कितने निगमायुक्त के कार्यकाल में किस विभाग में हुई अनियमितता
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर नगर निगम में बिल घोटाला का मामला एक बार फिर उठा है। इस मामले में जेल में बंद ठेकेदारों ने हाईकोर्ट में लिखित आवेदन दिया है।आरोप लगाए गए हैं कि यह घोटाला 500 करोड़ का है।
तीन निगमायुक्तों के समय का मामला
तीन निगमायुक्तों के समय ड्रेनेज विभाग में इस तरह खेल होने के आरोप के साथ ही इस मामले में 2015 से ड्रेनेज विभाग में फर्जी बिलों के जरिए अवैध रूप से पैसे लेने की बात की जा रही है।
राठौर के साथ ठेकेदारों की याचिका
फर्जी बिल घोटाले में गिरफ्तार किए गए इंजीनियर अभय राठौर के साथ ठेकेदारों ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट में ठेकेदारों का आरोप
जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट में ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने ऐसे फोटोकॉपी साक्ष्य पेश किए थे, जिनमें मूल दस्तावेज नहीं थे। घोटाले में इंजीनियर अभय राठौर और अन्य अधिकारियों के नाम का खुलासा हुआ है।
जारी नहीं हुई जांच रिपोर्ट
पता चला है कि इस मामले में महापौर ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की, लेकिन यह जांच रिपोर्ट शासन स्तर पर कभी जारी ही नहीं की गई। बताया जाता है कि ठेकेदार ने इस घोटाले के पीछे इंदौर नगर निगम पर ऐसे आरोप लगाए हैं जो गंभीर हैं। इसमें कहा गया है कि लंबे समय से नगर निगम में फर्जी बिल बनाकर पैसे लिए जा रहे हैं।
मनीष सिंह से लेकर प्रतिभा पाल का कार्यकाल
जानकारी के अनुसार ड्रेनेज विभाग में फर्जी बिल बनाकर निगम आयुक्त मनीष सिंह से लेकर प्रतिभा पाल के कार्यकाल के दौरान लगभग 500 करोड़ रुपए की अवैध धनराशि ली गई है।
हाईकोर्ट में दिया ठेकेदारों ने आवेदन
ठेकेदारों के हाईकोर्ट में दिए आवेदन में लिखा है कि 2015 से चल रहे इस मामले में जरूरी दस्तावेज जब्त नहीं किए गए।
इन पर नहीं दर्ज हुआ कोई केस
इसके साथ ही इस मामले में ड्रेनेज विभाग के जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, जैसे कमलसिंह, धराचंद पालीवाल, सुरेंद्र बागोरा, आनंद, विजय, इनके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं हुआ। केवल प्रतिभा पाल के कार्यकाल के दौरान के ही अपराध दर्ज हुए हैं।
अब अधिकारियों के खिलाफ हो जांच
इस मामले में जांच के लिए दिए अन्य अनेक नाम को भी नजरअंदाज कर दिया गया। इसके लिए हाईकोर्ट में केस भी दायर हैं। इन सभी अधिकारियों के खिलाफ जांच होनी चाहिए।
मंजूर हुई याचिका
इंदौर हाईकोर्ट ने मामले में रिवीजन याचिका मंजूर की है। फोटोकॉपी को साक्ष्य के रूप में माने जाने संबंधी ट्रायल कोर्ट के आदेश को खारिज किया है। साथ ही राज्य सरकार को यह अधिकार दिए हैं कि सरकार नए सिरे से फिर से साक्ष्य, दस्तावेज धारा 63(2) में कानून के तहत पेश कर सकती है।
जानिये है क्या मामला
पूरे मामले का खुलासा अप्रैल 2025 में हुआ था। इससे पहले ही फरवरी 2025 में तत्कालीन निगम आयुक्त हर्षिका सिंह ने कुछ कंपनियों पर बिना काम किए ही बिल लगाने का आरोप लगाया था। इसकी भी जांच करवाई थी।
तब यह पता चला था
जांच के दौरान जानकारी मिली थी कि पांच साल पुरानी ड्रेनेज लाइन डालने के लिए 20 ऐसे कार्यों के नाम पर जो हुए ही नहीं 28 करोड़ रुपए के बिल लेखा शाखा भेजे थे। जब इस फाइल की जांच की जा रही थी, तो इंजीनियर सुनील गुप्ता की कार से इन बिलों की मूल फाइल चोरी हो गई थी।
इतने करोड़ तक पहुंचा घोटाला
कई फाइलों की फोटोकॉपी निकालकर जांच हुई थी। घोटाला लगातार बढ़ते हुए करीब 150 करोड़ तक पहुंच गया था। मुख्य आरोपी के तौर पर इंजीनियर अभय राठौर का नाम सामने आया था।
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