खबर
Top News

अगर इस दिशा में है दरवाजा: कब नहीं लगता दोष; ये हैं ऊर्जा के असली स्रोत

KHULASA FIRST

संवाददाता

30 जनवरी 2026, 11:43 am
260 views
शेयर करें:
अगर इस दिशा में है दरवाजा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा का मतलब हमेशा बुरा नहीं होता। दोष तब समाप्त हो जाता है जब आप इन नियमों का पालन करते हैं।

इसे मानते हैं अत्यंत शुभ
दक्षिण दिशा को 9 हिस्सों (पदों) में बांटा जाता है। यदि मुख्य द्वार 'मृग' या 'कुशथ' (तीसरे और चौथे पद) पर है, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसे घर में रहने वाले लोग यशस्वी और धनवान होते हैं।

ऊंचाई का संतुलन
यदि आपके फ्लैट का दरवाजा दक्षिण में है, लेकिन घर का उत्तर या पूर्व हिस्सा दक्षिण के मुकाबले अधिक नीचा और खुला है, तो वास्तु दोष स्वतः ही कम हो जाता है।

मंगल का प्रभाव
यदि घर के मुख्य द्वार पर सिंदूरी रंग या लकड़ी का ठोस काम हो, तो यह नकारात्मक ऊर्जा को भीतर आने से रोकता है।

ज्यादा महत्व खिड़की और बालकनी
फ्लैट में मुख्य दरवाजे से ज्यादा महत्व खिड़की और बालकनी का होता है, क्योंकि वहीं से ताजी हवा और रोशनी आती है।

बालकनी
उत्तर या पूर्वधन के आगमन और सकारात्मक विचारों में वृद्धि करती है।

बड़ी खिड़कियां
उत्तर-पूर्व (ईशान) घर में शांति और स्पष्ट सोच लाती हैं।

छोटी खिड़कियां
दक्षिण या पश्चिम इन दिशाओं में कम और छोटी खिड़कियां होनी चाहिए ताकि नकारात्मक ऊर्जा न टिके।

दक्षिण मुखी फ्लैट हो तो ऐसा करें
अगर दरवाजा गलत पद पर भी है, तो आप इन बदलावों से उसे शुभ बना सकते हैं।

मुख्य द्वार पर पिरामिड
दरवाजे के ऊपर वास्तु पिरामिड या 'त्रिशक्ति' (ओम, स्वस्तिक, त्रिशूल) का चिन्ह लगाएं।

भारी सामान का स्थान
दक्षिण और पश्चिम की दीवारों के साथ भारी अलमारी या फर्नीचर रखें। इससे घर का 'भार संतुलन' सही रहता है।

रोशनी का प्रबंध
दक्षिण मुखी प्रवेश द्वार पर हमेशा तेज और सात्विक रोशनी रखें। वहां अंधेरा होना तनाव को निमंत्रण दे सकता है।

पौधों का जादू
बालकनी यदि उत्तर-पूर्व में है, तो वहां छोटे और पवित्र पौधे (जैसे तुलसी) लगाएं।

फ्लैट खरीदते समय केवल मुख्य द्वार न देखें, बल्कि यह देखें कि 'किचन' दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में है या नहीं। यह अग्नि तत्व दक्षिण दिशा के दोष को सोखने की क्षमता रखता है।


संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!