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दान की जमीन पर बहुमंजिला प्लॉट संयुक्तिकरण कैसे: सराफा में अवैध निर्माण; नगर निगम पर गंभीर सवाल

KHULASA FIRST

संवाददाता

14 जनवरी 2026, 10:24 पूर्वाह्न
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दान की जमीन पर बहुमंजिला प्लॉट संयुक्तिकरण कैसे

अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे के पीछे नगर निगम में भ्रष्टाचार की गहरी परतें छिपी हैं। अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में नियमों की अनदेखी के दुष्परिणाम का अब खुलासा होने लगा है। भागीरथपुरा में जहरीला पानी पीने से हुई मौतें हों या शहर के मध्य बेलगाम अवैध निर्माण, इन सबके पीछे संरक्षण, प्रोटेक्शन मनी और राजनीतिक दबाव की चर्चा आम है।

हालात यह है हर विभाग में नेताओं के करीबी ठेकेदार हावी बताए जा रहे हैं, जो अवैध निर्माण के जरिए न केवल लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि राजस्व की खुली चोरी भी। इस पूरे खेल में लाभ बिल्डरों और अधिकारियों को मिल रहा है, जबकि कीमत आम जनता चुका रही है।

नगर निगम के कामकाज को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर में पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक नियमों को ताक पर रख निर्माण किए जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी क्षेत्र हो या शहर का हृदयस्थल सराफा बाजार, हर जगह भवन अनुमति शाखा, अतिक्रमण दस्ता, जोनल कार्यालय और जिम्मेदार अधिकारियों की कथित मिलीभगत से अनुमति के विपरीत निर्माण खुलेआम फल-फूल रहा है।

नियमानुसार दान की गई भूमि को न बेचा जा सकता है न उस पर व्यावसायिक बहुमंजिला निर्माण की स्वीकृति दी जा सकती है। इसके बावजूद सराफा बाजार में एक से अधिक प्लॉट को जोड़कर बहुमंजिला इमारत बन रही है, जिसका कोई स्वीकृत नक्शा अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है।

बीओ-बीआई की मिलीभगत, पर्दे के पीछे संरक्षण का आरोप
सूत्रों के अनुसार अवैध निर्माण केवल मैदानी कर्मचारियों की लापरवाही का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रभावशाली सामाजिक और राजनीतिक संरक्षण बताया जा रहा है। लंबे समय से ‘प्रोटेक्शन मनी’ के चलते कई अवैध निर्माण पूरे हो चुके हैं, जबकि कुछ जारी हैं।

44, बड़ा सराफा, दान की जमीन पर अवैध बहुमंजिला निर्माण: ताजा मामला प्लॉट क्रमांक 44, बड़ा सराफा बाजार का है, जहां जगदीश मंदिर को दान में मिली जमीन पर बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत बनाए जाने का आरोप है। बताया जा रहा है जमीन पुजारी परिवार द्वारा करीब 40 करोड़ रुपए में बेची गई है।

खरीदार बिल्डरों ने रसूख के दम पर निगम के नियम-कायदों को दरकिनार कर निर्माण शुरू कर दिया। आरोप है निगम अधिकारी कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचे, लेकिन बिना किसी ठोस कदम के लौट आए। पहले दुकानदारों की आपत्तियों के चलते कुछ समय के लिए काम रुका, लेकिन बाद में कथित ‘सेटिंग’ से दोबारा शुरू हो गया।

‘राम भरोसे’ निर्माण: स्थानीय लोगों के अनुसार इमारत चार से पांच मंजिला प्रस्तावित है, जबकि न वैध भवन अनुमति स्थल पर प्रदर्शित है न स्वीकृत नक्शा सार्वजनिक। इसी तरह मोरसली गली में भी एक व्यावसायिक अवैध निर्माण चर्चा का विषय है। बाजार में चर्चा है एक पुराने मार्केट को तोड़कर इसी तर्ज पर नया निर्माण किया जाएगा।

पार्किंग में भी घोटाले का आरोप: बजाज खाना चौक स्थित निगम पार्किंग परिसर में भी अवैध दुकानों के निर्माण का आरोप सामने आया है। कहा जा रहा है इन दुकानों से हर माह किराया वसूला जा रहा है, जो निगम के खाते में न जाकर एक पूर्व पार्षद तक पहुंच रहा है। व्यापारियों ने त्योहारों के दौरान अवैध चंदाखोरी का विरोध किया था।

सुमित जैन पर गंभीर आरोप
सूत्रों का दावा है नियम-विरुद्ध इमारतों का निर्माण सुमित जैन द्वारा कराया जा रहा है। राजनीतिक रसूख के चलते कथित स्वीकृत नक्शे को दरकिनार किया जा रहा है। निरीक्षण के लिए पहुंचे अफसरों को खाली हाथ लौटना पड़ा, ऐसा भी आरोप लगा ।

जगदीश भवन का फर्स्ट फ्लोर प्लान
निर्माणाधीन जगदीश भवन के फर्स्ट फ्लोर प्लान की ड्रॉइंग डेट 18 अक्टूबर 2024 और आर्किटेक्ट का नाम बसेर एंड एसोसिएट्स दर्शाया है। प्लान में 8×10 फीट से लेकर 19×10.6 फीट तक की दुकानें, आर्केड, लिफ्ट और सीढ़ियों की व्यवस्था प्रदर्शित है।

धरोहर मार्ग पर नियमों की अनदेखी
शक्कर बाजार धरोहर मार्ग घोषित है, जहां सीमित निर्माण की अनुमति है। इसके बावजूद 44, बड़ा सराफा क्षेत्र में सड़क तक अवैध निर्माण का आरोप है। अलग-अलग प्लॉट्स को जोड़कर व्यावसायिक भवन बनाना भी नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है।

रास्ते बंद, जनता परेशान
पूर्व में छत भरने के दौरान भैरव मंदिर–थाना चौराहे पर सड़क पर ही निर्माण सामग्री तैयार की गई, जिससे शक्कर बाजार और बड़ा सराफा सहित आसपास के मार्ग अवरुद्ध हो गए। न निगम से अनुमति ली गई थी न पुलिस से ।

पहले भी संरक्षण में हुए अवैध निर्माण
राजमोहल्ला जोन–2 में पहले भी संरक्षण में अवैध निर्माण होने के आरोप लगते रहे हैं।

बंबई बाजार: रेसिडेंशियल नक्शे पर कमर्शियल मार्केट
बंबई बाजार स्थित मकान क्रमांक 1, 2, 3 और 4 के लिए रेसिडेंशियल नक्शा स्वीकृत कराया गया। नियमों की अनदेखी करते हुए कमर्शियल बिल्डिंग और मार्केट का निर्माण कर दिया गया। नगर निगम ने 2016 में निर्माण को अवैध घोषित कर अतिक्रमण की कार्रवाई की थी।

इसके बावजूद 2019 में दोबारा रेसिडेंशियल नक्शा पास कराया गया और उसी भवन को कमर्शियल मार्केट में तब्दील कर दिया गया। शिकायत राजमोहल्ला जोन–2 में की गई। जांच में निर्माण को अवैध मानते हुए नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन भवन अधिकारी ने ठोस कार्रवाई से परहेज किया। उक्त भवनों का संयुक्तिकरण भी किया गया, जो नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है।

जवाहर मार्ग: खतरनाक घोषित मकान में अवैध निर्माण
दूसरा मामला जवाहर मार्ग, बंबई बाजार पुलिस चौकी के सामने स्थित मकान क्रमांक 276 एवं 276/1 का है। यह मकान हाजी नसुरुद्दीन और हाजी शम्सुद्दीन के स्वामित्व में है, जिसे नगर निगम पहले ही खतरनाक घोषित कर चुका था।

मालिकों ने मरम्मत के नाम पर गार्डर–फर्शी डालकर अवैध निर्माण कर लिया। राजमोहल्ला जोन के भवन अधिकारी विवेश जैन ने तीन नोटिस जारी किए थे, जिनका जवाब 22 दिसंबर 2023 तक मांगा गया था, लेकिन आज तक नहीं दिया गया।

इसी बीच पूरा अवैध निर्माण कर लिया गया। चौंकाने वाली बात यह है इस अवैध रूप से निर्मित भवन का व्यावसायिक उपयोग शुरू हो चुका है और दुकानें संचालित हैं, बावजूद अब तक कोई प्रभावी अतिक्रमण कार्रवाई नहीं की गई। भवन अधिकारी विवेश जैन की भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

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