अमावस्यायुक्त प्रतिपदा में शुरू होगा हिंदू नव वर्ष: जानिए- तिथि क्षय के कारण शुभ नहीं होगा नव संवत्सर का पहला दिन
KHULASA FIRST
संवाददाता

हेमंत उपाध्याय 99930-99008 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हिंदू कैलेंडर की गणना जितनी वैज्ञानिक है, उतनी ही विस्मयकारी भी। सामान्यतः चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के सूर्योदय के साथ हिंदू नव वर्ष का उल्लास शुरू होता है, लेकिन इस वर्ष काल-गणना के चक्र में एक दुर्लभ स्थिति बन रही है।
इस वर्ष प्रतिपदा तिथि का क्षय होने के कारण, अमावस्या के साये में ही नव संवत्सर का स्वागत किया जाएगा। 2026 जैसी ही स्थिति वर्ष 2021 और वर्ष 2024 में भी आंशिक रूप से देखी गई थी, लेकिन पूरी तरह से ‘तिथि क्षय’ और समय का ऐसा गणित 2018 में अधिक स्पष्ट था।
ज्योतिषीय गणित के अनुसार, जब कोई तिथि एक सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाती है, तो उसे ‘क्षय तिथि’ कहा जाता है। इस बार प्रतिपदा तिथि के साथ भी ऐसा ही हो रहा है, जिससे संवत पूजन और संकल्प की स्थिति अमावस्या के मेल के साथ बन रही है।
यह स्थिति न केवल पंचांग प्रेमियों के लिए शोध का विषय है, बल्कि आम जनमानस के लिए भी यह समझना आवश्यक है कि क्यों इस बार नव वर्ष का स्वागत सूर्योदय की प्रतीक्षा किए बिना, अमावस्या युक्त बेला में ही शास्त्रीय विधि से किया जाएगा।
मध्य प्रदेश ज्योतिष एवं विद्वत परिषद के प्रदेशाध्यक्ष आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा ने खुलासा फर्स्ट से चर्चा करते हुए कहा कि जब प्रतिपदा ही क्षय है तो किसे गुड़ी पड़वा कहेंगे। आचार्य शर्मा के अनुसार अमावस्या तिथि सुबह 6 बजकर 53 मिनट तक रहेगी।
इसका अर्थ है कि सूर्योदय में भी अमावस्या तिथि होगी। अलग- अलग पंचांगों, ज्योतिषियों के अपने-अपने मत-मतांतर के चलते वर्ष 2026 में गुड़ी पड़वा (हिंदू नव वर्ष) की गणना के अनुसार 19 मार्च को बताई जा रही है, लेकिन सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि होगी।
‘अमावस्या से शुरुआत’ का क्या अर्थ है?
पंडितों और पंचांग के अनुसार जब हम कहते हैं कि शुरुआत अमावस्या से होगी, तो इसका अर्थ यह है कि नव वर्ष का संकल्प काल (प्रतिपदा का प्रारंभ) 18 मार्च की दोपहर से ही शुरू हो जाएगा। प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह चार बजकर 52 मिनट तक है।
प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सूर्योदय के बाद बहुत जल्दी समाप्त हो रही है और अगले दिन (20 मार्च) के सूर्योदय तक नहीं टिक रही, इसे तकनीकी रूप से ‘क्षय’ की स्थिति के करीब माना जाता है।
उदया तिथि का महत्व बताते हुए शास्त्रों में कहा गया है कि यद्दिने सूर्योदयकाले प्रतिपदा सा एव ग्राह्या अर्थात् जिस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा हो, उसी दिन गुड़ी पड़वा मनाया जाना चाहिए।
आचार्यजी के अनुसार 18 मार्च को भले ही प्रतिपदा शुरू हो रही है, लेकिन वह ‘अमावस्या विद्धा’ (अमावस्या से मिली हुई) होने के कारण मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं मानी जाती। इस कारण नया वर्ष चैत्र शुक्ल दूज से प्रारंभ होगा।
आचार्य रामचंद्र शर्मा के अनुसार विक्रम संवत की शुरुआत 57 ईसा पूर्व में हुई थी। सम्राट विक्रमादित्य ने उज्जैन पर आक्रमण करने वाले शकों को पराजित कर उन्हें देश से बाहर खदेड़ दिया था। इस महान विजय के उपलक्ष्य में उन्होंने ‘विक्रम संवत’ का प्रवर्तन किया।
मान्यता है कि राजा विक्रमादित्य ने केवल जीत की खुशी में ही यह संवत शुरू नहीं किया, बल्कि उन्होंने प्रजा को ऋणमुक्त किया था। उस समय नियम था कि जो राजा अपनी प्रजा के ऋणों को चुका देता था, वह नया संवत चलाने का अधिकार रखता था। इस बार विक्रम संवत 2083 का प्रारंभ होगा।
विक्रम संवत 2083 (वर्ष 2026-27) के आगमन के साथ ग्रहों की स्थिति में बड़े परिवर्तन होने की संभावना है। इस वर्ष के राजा बृहस्पति (गुरु) और मंत्री शनि होने के कारण यह वर्ष न्याय, ज्ञान और आर्थिक बदलावों का वर्ष रहेगा। ज्योतिषीय मत और आकलन के अनुसार इसके साथ ही जहां धार्मिक उन्माद की स्थिति निर्मित हो सकती है, वहीं धर्म की राजनीति भी तेज हो सकती है।
क्यों होता है तिथि का क्षय
आचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक के अनुसार खगोलीय कारण हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित है। एक ‘तिथि’ वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से आगे निकल जाता है। अगर कोई तिथि एक सूर्योदय के बाद शुरू हो और अगले सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाए, तो उसे ‘तिथि क्षय’ कहा जाता है। 2026 में यही हो रहा है।
जब भी अमावस्या और प्रतिपदा का टकराव होता है, तो निर्णयसिंधु के अनुसार अमायुक्ता न कर्तव्या प्रतिपद् शुभकर्मणि”(अर्थात्: अमावस्या से मिली हुई प्रतिपदा में शुभ कार्य नहीं करने चाहिए।
अब जानिये आपकी राशि के अनुसार संवत 2083 का भविष्यफल
मेष- यह वर्ष मेष राशि के जातकों की प्रगति के नए रास्ते खोल सकता है। राहु-केतु का गोचर जहां साहस बढ़ाएगा, वहीं नौकरी में पदोन्नति और स्थान परिवर्तन के योग भी हैं। सिरदर्द और आंखों की समस्या से सावधान रहें। हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें।
वृषभ- वृषभ राशि के जातकों के लिए आर्थिक दृष्टि से यह वर्ष मिश्रित रहेगा। शनि की ढय्या का असर समाप्त होने से मानसिक शांति मिल सकती है। व्यापार में कोई भी निवेश सोच-समझकर करें। विदेश यात्रा के योग भी बन रहे हैं। खान-पान पर नियंत्रण रखना चाहिये वर्ना पेट के रोग परेशान कर सकते हैं। शुक्रवार को छोटी कन्याओं को मिश्री बांटना लाभकारी होगा।
मिथुन- मिथुन राशि वालों के लिए हिंदू नव वर्ष भाग्यशाली रहने वाला है। गुरु की कृपा से अटके हुए काम पूरे हो सकते हैं। विद्यार्थियों को प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता मिलने के योग हैं। इस राशि के जातकों को धन लाभ के भी योग हैं। कंधे और नसों से जुड़ी समस्याओं का ध्यान रखना आवश्यक है। शुभ फल के लिए पक्षियों को दाना डालें।
कर्क- शनि की ढय्या के कारण संघर्ष करना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में अपने सहकर्मियों से विवाद से बचना लाभकारी होगा। अपना धैर्य बनाए रखें। अपनी माता के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। शुभ फल के लिए सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
सिंह- आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। कोर्ट-कचहरी के मामलों में राहत मिलेगी। नया व्यवसाय शुरू करने के लिए समय उत्तम है। कामों में पिता का सहयोग मिलेगा। अपने हृदय और रक्तचाप का ध्यान रखें। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना लाभकारी होगा।
कन्या- बुद्धि और कौशल से आपमें कठिन कार्यों को भी सरल बनाने की क्षमता है। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। बैंकिंग और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ के योग हैं। पैरों में दर्द के साथ थकान की समस्या रह सकती है। बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाना लाभप्रद होगा।
तुला- लग्जरी और सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ सकता है। शनि की स्थिति अनुकूल रहेगी। कला, संगीत और मीडिया क्षेत्र वालों के लिए यह वाकई सुनहरा समय है। त्वचा संबंधी रोगों से बचें। श्री सूक्त का पाठ करना लाभदायक होगा।
वृश्चिक- शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव से कार्यों में विलंब हो सकता है। इसलिये संयम बरतें। अपने गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें। जमीन-जायदाद के मामलों में लाभ होने के योग हैं। वाहन चलाते समय सतर्क रहें और सावधानी रखें। शनिवार को शनि मंदिर में तिल के तेल का दीपक जलाने से शुभ फल मिलेगा।
धनु- आर्थिक स्थिरता आने के योग हैं। परिवार में मांगलिक कार्य के योग हैं। नौकरी में बड़े पद की प्राप्ति हो सकती है। धार्मिक यात्राओं पर जाने के योग हैं । लिवर संबंधी परेशानी से बचें। शुभ फल के लिए माथे पर केसर का तिलक लगाएं।
मकर- साढ़ेसाती का अंतिम चरण काफी कुछ सिखाकर जाएगा। पुराने निवेशों से लाभ मिल सकता है। आपकी कड़ी मेहनत का फल मिलेगा। संपत्ति खरीदने के योग भी हैं। दांतों और हड्डियों की समस्या उत्पन्न हो सकती है। शुभ फल के लिए शाम के समय ‘ओम शं शनैश्चराय नमः’ का जप करें।
कुंभ- मानसिक तनाव रह सकता है। आध्यात्मिक प्रगति के योग और कार्यक्षेत्र में बदलाव की संभावना बन रही है। अपने खर्चों पर नियंत्रण रखें। नींद न आने की समस्या हो सकती है, योग करना लाभकारी होगा। शनिवार को छाया दान करें।
मीन- साढ़ेसाती शुरू होने से आपकी जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। गुरु का गोचर ज्ञान और विवेक को बढ़ाएगा। व्यापार से लाभ होगा। नए मित्र काम में सहायक होंगे। गले और कान की समस्याओं का ध्यान रखें। गुरुवार को चने की दाल का दान करना लाभकारी होगा।
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