हाई कोर्ट-जिला कोर्ट के वकील सड़क पर: रावत हत्याकांड में पुलिस की भूमिका कटघरे में; कानून व्यवस्था पर सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

वकीलों के सामने झुकी पुलिस, चौराहे पर कानून ठप
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में लगातार बढ़ते अपराधों और गंभीर मामलों में पुलिस की कथित उदासीनता को लेकर हाईकोर्ट और जिला कोर्ट के अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश है। छोटा बांगड़दा क्षेत्र में हुई हत्या के मामले में वकीलों ने एरोड्रम थाना प्रभारी और विवेचक के खिलाफ जांच व सख्त कार्रवाई की मांग की है।
गणतंत्र दिवस पर संजय रावत की चाकुओं से गोदकर सरेआम हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड ने पुलिस व्यवस्था की पोल खोल दी। छोटा बांगड़दा में हुए संजय रावत हत्याकांड को लेकर पुलिस अफसरों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वकीलों ने चेतावनी दी है कि सात दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
पूछताछ के बाद सभी आरोपियों को जेल भेजा
एरोड्रम थाना प्रभारी तरुण भाटी के अनुसार हत्या के आरोपी मोहित यादव, अनिकेत, ऋषभ वर्मा और पार्थ यादव को दो दिन के रिमांड पर लेने का अनुरोध किया गया था। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के बाद सभी आरोपियों को जेल भेजा गया। हालांकि वकीलों का आरोप है कि आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड होने के बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और प्रभावी रिमांड की कार्रवाई नहीं की।
संजय का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था
जानकारी के अनुसार हेड कांस्टेबल के बेटे संजय रावत हत्याकांड को लेकर अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह से मिलने पहुंचा। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष मनीष यादव ने बताया कि संजय एक रजिस्टर्ड मुंशी था और वह वरिष्ठ अधिवक्ता लोकेश भटनागर सहित कई अधिवक्ताओं के साथ करीब 15 वर्षों से कार्यरत था।
उन्होंने कहा कि संजय का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और वह पूरी तरह निर्विवादित व्यक्ति था। मामूली गाड़ी टकराने के विवाद के अपराधियों ने चाकुओं से गोदकर उसकी निर्मम हत्या कर दी। जबकि 26 जनवरी को ड्राय डे और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के दावे किए गए थे, लेकिन आरोपी शराब और एमडी ड्रग्स के नशे में थे। इसके बावजूद पुलिस ने न तो समय रहते कार्रवाई की और न ही आरोपियों से सख्ती से पूछताछ के लिए रिमांड लिया।
बिना रिमांड के कोर्ट में पेश कर दिया: आरोप है कि जब एक ओर संजय का अंतिम संस्कार चल रहा था, उसी समय दूसरी ओर आरोपियों को बिना रिमांड के कोर्ट में पेश कर दिया गया। एक दिन का भी पुलिस रिमांड नहीं मांगा गया, जो जांच की गंभीरता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
अध्यक्ष यादव ने कहा, एरोड्रम थाना प्रभारी तरुण सिंह भाटी और विवेचक के खिलाफ जांच व सख्त कार्रवाई करते हुए सस्पेंड किया जाए। इस दौरान अध्यक्ष मनीष यादव ने कहा कि इंदौर में कमिश्नरी सिस्टम पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। इंदौर के प्रभारी मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री हैं, इसके बावजूद शहर में जंगलराज जैसे हालात बनते जा रहे हैं।.
वकीलों ने चेतावनी दी है यदि सात दिन के भीतर थाना प्रभारी, विवेचक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे की रणनीति तय करेंगे और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
अफसरों की कमजोरी से पुलिसकर्मी खुद को असहाय महसूस कर रहे
दोपहर में संजय रावत हत्याकांड में पुलिस की कथित लापरवाही को लेकर वकीलों का प्रतिनिधिमंडल ज्ञापन सौंपकर कमिश्नर कार्यालय से लौट रहा था। इसी दौरान पालासिया चौराहे पर यातायात पुलिस नियमित चेकिंग अभियान के तहत चालानी कार्रवाई कर रही थी।
बताया जा रहा है कि चेकिंग के दौरान मौजूद एक पुलिसकर्मी ने एक वकील की बाइक रोककर उसकी चाबी निकाल ली। इस पर वकील ने नियम-कानून का हवाला देते हुए आपत्ति जताई। बात बढ़ते-बढ़ते हंगामे में बदल गई और कुछ ही देर में मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
मामला जब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा तो उन्होंने चेकिंग पॉइंट पर तैनात पुलिसकर्मियों को तत्काल चेकिंग बंद करने के निर्देश दे दिए। कहा कि पहले वकीलों को रवाना होने दिया जाए, उसके बाद ही चेकिंग दोबारा शुरू की जाए। कानून ठप और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी खुद को असहाय महसूस करते रहे। इससे पूरे महकमे में आक्रोश है।
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