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किस प्रदेश के मंत्री के मामले में टल गई शीर्ष अदालत में सुनवाई: सैन्य अधिकारी पर क्या टिप्पणी की थी; चौथी बार मांग चुके हैं माफी

KHULASA FIRST

संवाददाता

09 फ़रवरी 2026, 11:58 पूर्वाह्न
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किस प्रदेश के मंत्री के मामले में टल गई शीर्ष अदालत में सुनवाई

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मंत्री विजय शाह द्वारा सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान को लेकर दायर मामले में सोमवार, 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। निर्धारित समय पर जैसे ही यह मामला सूचीबद्ध हुआ, कोर्ट का समय समाप्त हो गया, जिसके चलते सुनवाई टाल दी गई। अब इस प्रकरण पर आगामी तिथि में सुनवाई होगी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार राज्य सरकार की ओर से मामले से संबंधित रिपोर्ट पहले ही न्यायालय में प्रस्तुत की जा चुकी है। सुनवाई के दौरान मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही को लेकर किसी निर्णय की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन समयाभाव के कारण यह संभव नहीं हो सका।

इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार रात दिल्ली प्रवास के दौरान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि इस दौरान मंत्री विजय शाह से जुड़े मामले और उसके राजनीतिक-कानूनी प्रभावों पर चर्चा हुई। इसके अलावा, सरकार की ओर से सीनियर वकीलों से भी कानूनी सलाह ली गई है, ताकि सुप्रीम कोर्ट में राज्य का पक्ष प्रभावी ढंग से रखा जा सके।

इस पूरे प्रकरण को लेकर पार्टी और सरकार—दोनों स्तरों पर मंथन किया गया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी दिल्ली दौरे के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मिले थे। इसके बाद ही मंत्री विजय शाह से एक बार फिर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा गया।

7 फरवरी को मंत्री विजय शाह ने लिखित वक्तव्य पढ़ते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी, जिसका वीडियो भी जारी किया गया। यह इस मामले में उनकी चौथी माफी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और सुनवाई की प्रक्रिया को देखते हुए राज्य सरकार इस प्रकरण को गंभीरता से ले रही है और न्यायालय के रुख पर लगातार नजर बनाए हुए है।

गौरतलब है कि मंत्री विजय शाह ने 11 मई 2025 को महू के रायकुंडा क्षेत्र में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी, जिसके बाद यह मामला तूल पकड़ गया।

7 फरवरी को दोबारा माफी मांगते हुए मंत्री विजय शाह ने कहा था- “मैं पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुका हूं कि मेरा उद्देश्य किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या समाज के किसी वर्ग का अपमान करना नहीं था। जो शब्द कहे गए, वे निस्संदेह मेरी वास्तविक भावना के अनुरूप नहीं थे। वे देशभक्ति के उत्साह, उत्तेजना और आवेश में निकल गए। मेरी किसी भी प्रकार की दुर्भावना नहीं थी। मैंने अंतःकरण से क्षमा याचना की है और आज फिर कर रहा हूं। मेरी एक छोटी-सी त्रुटि से इतना बड़ा विवाद खड़ा होना मेरे लिए अत्यंत पीड़ादायक है। भारतीय सेना के प्रति मेरे मन में सदैव सम्मान रहा है और रहेगा।”




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