ईडी के डंडे से बचने के लिए हाई कोर्ट पहुंचा गुटखा माफिया किशोर वाधवानी: 2002 करोड़ की टैक्स डिमांड और मनी लांड्रिंग केस में कोर्ट को बनाया ढाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
गुटखे के काले कारोबार की आड़ में अखबार शुरू कर गुटखा माफिया किशोर वाधवानी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई अब सीधे हाई कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गई है। 2002 करोड़ रुपए की सबसे बड़ी टैक्स डिमांड और करोड़ों की मनी लांड्रिंग के आरोपों से घिरे वाधवानी ने ईडी की कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।
इसमें वाधवानी के साथ उसके समाचार-पत्र दबंग दुनिया को भी पक्षकार बनाया गया है। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने वाधवानी को आंशिक राहत देते हुए ईडी के किसी भी अंतिम निर्णय पर फिलहाल रोक लगा दी है।
हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि जांच, पूछताछ और प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं रहेगी। यानी ईडी की कार्रवाई जारी रहेगी, सिर्फ अंतिम फैसला अभी नहीं लिया जा सकेगा। इसी कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित बताई जा रही हैं।
यह पूरा मामला प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी टैक्स कार्रवाई से जुड़ा है। सेंट्रल जीएसटी और एक्साइज कमिश्नरेट ने हाल ही किशोर वाधवानी और उसके परिजन के खिलाफ करीब 2002 करोड़ रुपए की टैक्स डिमांड का नोटिस जारी किया था।
इसी जांच के दौरान दबंग दुनिया अखबार के नाम पर मनी लांड्रिंग के बड़े खेल का खुलासा हुआ। इसके बाद तुकोगंज थाने में किशोर वाधवानी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। इसी को आधार बनाकर प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की।
ईडी और डीजीसीआई की जांच में खुलुसा हुआ कि दबंग दुनिया अखबार की प्रतियों की बिक्री जानबूझकर कई गुना बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई। जहां वास्तविक बिक्री 5 से 8 हजार प्रतिदिन थी, जबकि कागजों में इसे 60 हजार से एक लाख प्रतियां प्रतिदिन तक दर्शाया गया।
चालान हो चुका है पेश- ईडी ने इस मामले में दिसंबर 2025 में स्पेशल कोर्ट, इंदौर में चालान पेश कर दिया था। इसमें किशोर वाधवानी, उसकी पत्नी पूनम वाधवानी, दबंग दुनिया प्राइवेट लिमिटेड और कंपनी के सीईओ पंकज मजेपुरिया को आरोपी बनाया गया है।
अब ईडी की सख्त कार्रवाई और हजारों करोड़ के टैक्स विवाद के बीच किशोर वाधवानी ने हाई कोर्ट की शरण ली, जहां से मिली आंशिक राहत के बावजूद जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है। आने वाले दिनों में यह मामला हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबी कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं।
फर्जी सर्कुलेशन पर पूरा हुआ खेल
जांच एजेंसियों का दावा है कि इस फर्जी सर्कुलेशन के जरिये अन्य व्यवसायों से अर्जित कालेधन को अखबार की बिक्री और विज्ञापन आय के रूप में वैध दिखाया गया। विज्ञापनों के नाम पर फर्जी बिल बनाए गए और कई ऐसे विज्ञापन दर्शाए, जो वास्तव में कभी प्रकाशित ही नहीं हुए।
इससे सरकार को राजस्व की भारी क्षति पहुंचाई गई। ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच दबंग दुनिया के जरिये करीब 11.66 करोड़ रुपए की मनी लांड्रिंग की गई।
इस अवधि में अखबार की 2.80 करोड़ प्रतियां बिकने का दावा किया गया और प्रति कॉपी दो रुपए के हिसाब से लाखों की आय दिखाई गई। साथ ही विज्ञापनों से भी करोड़ों की फर्जी आय दर्शाई गई।
मामले में पान मसाला कारोबार का कनेक्शन भी सामने आया है। जांच में पाया गया कि विमल नामक पान मसाला का परिवहन दबंग दुनिया लिखे वाहनों से किया गया।
साथ ही अखबार के कर्मचारियों को विशेष पहचान-पत्र और पास उपलब्ध कराए गए, ताकि इस गतिविधि को सुचारु रूप से चलाया जा सके।
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