हजारों प्लॉट धारकों के लिए राहत की खबर: 35 साल का इंतजार खत्म होने की उम्मीद; एसीएस बोले- भूमाफियाओं की चिंता छोड़ो प्रशासन निपट लेगा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
विकास प्राधिकरण (IDA) की बहुप्रतीक्षित स्कीम 171 को लेकर जल्द बड़ा फैसला हो सकता है। नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव एसीएस संजय दुबे के सख्त निर्देशों के बाद IDA अब अगली बोर्ड बैठक में इस योजना को मुक्त करने का प्रस्ताव लाने की तैयारी में है।
खत्म हो सकता है 35 साल पुराना इंतजार
यदि प्रस्ताव पास होता है, तो हजारों प्लॉटधारकों का 35 साल पुराना इंतजार खत्म हो सकता है। बताया जा रहा है कि 2 फरवरी को IDA के सीईओ परीक्षित झाड़े भोपाल में ACS संजय दुबे से मिले थे। इस बैठक में स्कीम 171 को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और अनावश्यक देरी खत्म करने के निर्देश दिए गए।
पीड़ित प्लॉटधारकों से सीईओ की सीधी बातचीत
4 फरवरी को स्कीम 171 से प्रभावित प्लॉटधारकों के प्रतिनिधि IDA कार्यालय पहुंचे थे। यहां बंद कमरे में हुई बैठक में सीईओ ने भरोसा दिलाया कि नियमानुसार अगली बोर्ड बैठक में योजना को लेकर प्रस्ताव रखा जाएगा और सभी हितधारकों की सहमति से निर्णय लिया जाएगा।
भूमाफिया की चिंता छोड़ो
स्कीम 171 को मुक्त करने में सबसे बड़ी अड़चन भूमाफियाओं की संभावित सक्रियता को बताया जा रहा था। इसी मुद्दे पर एसीएस संजय दुबे ने स्पष्ट कहा कि भूमाफियाओं से निपटने के लिए शासन, जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सक्षम हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जब IDA द्वारा 5.90 करोड़ रुपए की राशि पहले ही जमा कराई जा चुकी है और न तो वहां कोई नया विकास संभव है, न ही नई योजना लाई जा सकती है, तो फिर स्कीम को मुक्त करने में देरी का कोई औचित्य नहीं है।
पहले भी अटकी थी प्रक्रिया
इस योजना को लेकर अगस्त 2025 की बोर्ड बैठक में एक प्रस्ताव तो लाया गया था, लेकिन उसमें एक नया शर्तीय पेंच जोड़ दिया गया। इसका उद्देश्य भूमाफियाओं के जमीन खेल को रोकना था, लेकिन इसका असर सीधे आम प्लॉटधारकों पर पड़ा और मामला फिर अटक गया।
अब जाकर दिख रहा समाधान
स्कीम 171 की जमीन पर एक समय भूमाफियाओं का बड़ा कब्जा था। तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह ने अभियान चलाकर प्लॉटधारकों को कब्जा दिलवाया था। इसके बाद IAS आशीष सिंह के कार्यकाल में भी स्कीम को मुक्त कराने के प्रयास हुए और विकास शुल्क भी जमा कराया गया।
वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा भी लगातार इस मुद्दे को शासन स्तर पर उठा रहे थे। अब ACS के हस्तक्षेप के बाद मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है।
अगस्त 2025 के बोर्ड संकल्प ने बढ़ाई उलझन
8 अगस्त 2025 को हुई IDA बोर्ड बैठक में पारित संकल्प के अनुसार, स्कीम 171 की कुल 151.33 हेक्टेयर भूमि में से 115.828 हेक्टेयर निजी स्वामित्व की और 35.725 हेक्टेयर शासकीय भूमि है। कुल भूधारकों की संख्या 221 बताई गई थी।
इस संकल्प में यह भी तय किया गया था कि केवल 13 सहकारी गृह निर्माण संस्थाओं की भूमि को ही स्कीम से मुक्त करने पर विचार किया जाएगा, जबकि निजी भू-स्वामियों और शासकीय भूमि को योजना के अंतर्गत ही रखा जाएगा।
इस फैसले का असर क्या पड़ा?
इस निर्णय के चलते आम निजी प्लॉटधारकों को राहत नहीं मिल सकी और केवल सहकारी संस्थाओं तक ही लाभ सीमित रह गया। इसी कारण हजारों लोग अब तक असमंजस और परेशानी में रहे।
13 सोसायटियों के करीब 6 हजार प्लॉटधारक हैं प्रभावित
स्कीम 171 में शामिल 13 सहकारी गृह निर्माण संस्थाओं में करीब 6 हजार प्लॉटधारक हैं, जो पिछले 35 वर्षों से योजना मुक्त होने का इंतजार कर रहे हैं। इनमें देवी अहिल्या श्रमिक कामगार, इंदौर विकास गृह निर्माण, मजदूर पंचायत, मारुति, सन्नी को-ऑपरेटिव, रजत, संजना, अप्सरा, न्याय विभाग कर्मचारी और श्रीकृपा गृह निर्माण सहकारी संस्थाएं शामिल हैं।
अब निगाहें अगली बोर्ड बैठक पर
ACS के स्पष्ट निर्देशों और प्रशासनिक स्तर पर बनी सहमति के बाद अब सभी की निगाहें IDA की अगली बोर्ड बैठक पर टिकी हैं। अगर प्रस्ताव बिना नई शर्तों के पास होता है, तो यह हजारों प्लॉटधारकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।
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