गैंगस्टर की शक्ति-प्रदर्शन यात्रा है: वीर शिवाजी महाराज के नाम पर ये शौर्य नहीं
KHULASA FIRST
संवाददाता

आमजन से ज्यादा हथियारों से लैस छंटे हुए गुंडे-बदमाश होते हैं शामिल
पुलिस-प्रशासन से अब तक नहीं ली अनुमति, जनता के दिल की बात- मिलेगी भी नहीं
खजराना मंदिर गर्भगृह से जुलूस तक, क्या कानून से ऊपर है गैंगस्टर सतीश भाऊ? गर्भगृह में अनाधिकृत प्रवेश पर भी हो कार्रवाई, आखिर कौन रोक रहा प्रशासन को?
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर की आस्था और कानून व्यवस्था दोनों इन दिनों सवालों के घेरे में हैं। एक ओर कुख्यात गैंगस्टर सतीश भाऊ का खजराना मंदिर के गर्भगृह में प्रतिबंध के बावजूद प्रवेश कर पूजा-अर्चना करना और उस पर कोई ठोस कार्रवाई न होना तो दूसरी ओर वीर छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के नाम पर निकाली जाने वाली तथाकथित शौर्य यात्रा चर्चा में है।
ये वही यात्रा है, जिसमें आमजन से ज्यादा हथियारों से लैस छंटे हुए गुंडे-बदमाशों का जमावड़ा होता है। यह आयोजन श्रद्धा का प्रतीक कम और शक्ति प्रदर्शन अधिक नजर आता है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर बिना अनुमति और विवादित पृष्ठभूमि के बावजूद कैसे एक गैंगस्टर पुलिस-प्रशासन को चुनौती देते हुए यह आयोजन कर रहा है? सवाल सीधा है, क्या यह श्रद्धा का आयोजन है या खुलेआम ताकत दिखाने का मंच? चूंकि अभी तक उसने यात्रा की परमिशन नहीं ली है। ऐसे में परमिशन मिलनी भी नहीं चाहिए। यदि यात्रा को परमिशन मिलती है, तो पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होना तय है।
उल्लेखनीय है 19 फरवरी को मराठा साम्राज्य के संस्थापक महान वीर योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं (1630-2026) जयंती है। बीते दो साल से इस दिन शहर का कुख्यात गैंगस्टर सतीश भाऊ शिवाजी महाराज की शौर्य यात्रा के नाम पर लोगों की आस्था से खेलते हुए शक्ति प्रदर्शन करता आ रहा है। शहर के विभिन्न हिस्सों से हर साल निकलने वाली यह यात्रा कथित तौर पर शिवाजी महाराज के सम्मान में आयोजित की जाती है, जो कि चिकमंगलूर चौराहा के पास मैदान से शुरू होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इसमें शामिल होने वालों में आम श्रद्धालुओं की अपेक्षा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग अधिक होते हैं। बीते वर्षों के वायरल वीडियो इसका खुलासा करते हैं। ये यात्रा कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाती है। शहरवासियों का स्पष्ट कहना है कि धार्मिक आयोजनों को अपराधियों के शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं बनने दिया जाना चाहिए। यदि आयोजन वास्तव में श्रद्धा और संस्कृति के सम्मान के लिए है, तो उसमें गुंडे-बदमाशों का क्या काम?
अब निगाहें पुलिस कमिश्नरेट और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। क्या वे कानून के अनुसार यात्रा को अनुमति नहीं देंगे या फिर शौर्य यात्रा के नाम पर कानून व्यवस्था को चुनौती देते हुए शहर की सड़कों पर शक्ति प्रर्दशन होगा। सूत्रों के अनुसार अभी तक इस वर्ष की यात्रा के लिए प्रशासन से आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई है। इसके बावजूद तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं। यदि अनुमति नहीं है, तो यह आयोजन किस आधार पर होगा? और यदि अनुमति दी जाती है, तो किन शर्तों पर?
अपराधियों को अलाऊ नहीं करेंगे
निर्णय जिला प्रशासन करेगा। पुलिस का सीधा हस्तक्षेप नहीं है। यदि निर्देश मिलते हैं तो क्या अपराध बनेगा, देखना पड़ेगा। वहीं शौर्य यात्रा निकालने के लिए जो भी नियम हैं, उनका पालन करना होगा। अपराधियों को अलाऊ नहीं करेंगे। यात्रा निकली तो निगरानी की जाएगी। -अमित सिंह, अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर
अभी तक अनुमति नहीं, जनता के हित देखेंगे पहले
अभी तक शौर्य यात्रा की कोई परमिशन नहीं हुई है। निर्णय लेना एसीपी के हाथ में है। बीते साल में निकली यात्रा की जानकारी ली जाएगी। कानून व्यवस्था सर्वोपरि है। जनता के हित को देखते हुए निर्णय लिया जाएगा। -राजेश व्यास, डीसीपी, जोन-3
ये सवाल पुलिस-प्रशासन को अब भी चिढ़ा रहे मुंह
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद भी अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
शौर्य यात्रा के नाम पर शहर की सड़कों पर गुंडे-बदमाशों के शक्ति प्रदर्शन को अनुमति दी जानी चाहिए?
पिछली दो यात्राओं में शामिल हथियारबंद लोगों की जांच और निगरानी क्यों नहीं हुई?
क्या कानून सिर्फ आम नागरिकों के लिए है, रसूखदार अपराधियों के लिए नहीं?
जब खजराना मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश पर स्पष्ट प्रतिबंध है, तो गैंगस्टर को किसके संरक्षण में प्रवेश मिला?
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