जहरीले पानी कांड के बाद प्रशासन पर सवाल: सीएम और मुख्य सचिव तक पहुंची फाइलों में अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को लेकर बोला ये झूठ
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा क्षेत्र में जहरीले पानी से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन इस गंभीर घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी खुलकर सामने आ गई है। खुद महापौर पुष्यमित्र भार्गव सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते, ऐसे में काम करना मुश्किल हो जाता है।
महापौर ही नहीं, इंदौर के कई जनप्रतिनिधियों ने बैठकों में यह आरोप लगाया है कि अधिकारी फोन तक नहीं उठाते। इसके उलट, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के सामने पेश की गई रिपोर्टों में सब कुछ ठीक होने का दावा किया गया, जो अब सवालों के घेरे में है।
CM–CS कॉन्फ्रेंस में क्या कहा गया
बीते वर्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा कलेक्टर–एसपी कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। इस बैठक के बाद कार्रवाई विवरण तैयार किए गए। बैठक के प्रमुख एजेंडे में कृषि, स्वास्थ्य और पोषण, रोजगार, नगरीय विकास, सुशासन, कानून-व्यवस्था शामिल थे। इसी बैठक में सुशासन को लेकर कई अहम निर्देश दिए गए थे।
सबसे अहम निर्देश: जनप्रतिनिधियों को नेतृत्व
बैठक में एक स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को नेतृत्व दिया जाए और अधिकारियों को उनसे निरंतर संवाद रखना चाहिए। लेकिन इंदौर के मामले में अधिकारियों द्वारा दिया गया जवाब अब जमीनी हकीकत से बिल्कुल उलट नजर आ रहा है।
निर्देश बनाम अधिकारियों के जवाब (कागजों की सच्चाई)
निर्देश 1- विविध शासकीय गतिविधियों, योजनाओं के क्रियान्वयन में मप्र 2047 विजन को ध्यान में रख पांच सालों की कार्ययोजना पर काम करें।
जवाब- विजन मप्र 2047 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
निर्देश 2- स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को नेतृत्व दिया जाए, अधिकारियों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों से निरंतर संवाद रखना चाहिए।
जवाब- स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से निरंतर संवाद किया जा रहा है।
निर्देश 3- सभी कलेक्टर अपने जिलों में स्थानीय आवश्यकतानुसार नवाचार करें।
जवाब- जिले में नवाचार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
निर्देश 4- कलेक्टर, एसपी, सीईओ जिला पंचायत व डीएफओ जिले में टीम बनाकर काम करें।
जवाब- पालन किया जा रहा है।
निर्देश 5- कार्यपालिका मजिस्ट्रेट व पुलिस के बीच अच्छा समन्वय होना चाहिए।
जवाब- पालन किया जा रहा है।
निर्देश 6- भूमि विवादों का त्वरित व प्रभावी निराकरण होना चाहिए।
जवाब- इसके लिए राजस्व अधिकारियों को पालन के लिए निर्देशित किया गया है।
समन्वय के अभाव से जूझता इंदौर
जबकि महापौर और जनप्रतिनिधियों के बयान इन सभी दावों को झूठा साबित करते हैं। इंदौर इस समय प्रशासनिक समन्वय की गंभीर कमी से जूझ रहा है। पुलिस कमिश्नरी लागू होने के बाद हालात और जटिल हो गए हैं। पुलिस तंत्र एक अलग दिशा में चलता नजर आ रहा है।
सितंबर 2025 में इंदौर में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी हुई SAS सिस्टम हटाया गया। IAS को प्राथमिकता दी गई। MPIDC, IDA, नगर निगम में रेगुलर IAS पदस्थ हुए।संभागायुक्त, निगमायुक्त, IDA CEO बदले गए। इसके बावजूद चार महीने के भीतर ही भागीरथपुरा कांड के बाद निगमायुक्त बदल दिए गए।
अनुभवी अधिकारियों की कमी खल रही
वर्तमान में इंदौर में सबसे अनुभवी अधिकारी कलेक्टर शिवम वर्मा हैं, जो पहले करीब 18 महीने निगमायुक्त रह चुके हैं और अब चार महीने से कलेक्टर पद पर हैं। बाकी अधिकांश अधिकारी पहली बार इंदौर में पदस्थ हुए हैं, जिससे फील्ड स्तर पर कई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
इंदौर को हमेशा एक मजबूत लीडर मिला
इंदौर को पहले हमेशा एक मजबूत और निर्णायक अधिकारी लीड करता रहा है। कलेक्टर रहते आकाश त्रिपाठी, निगमायुक्त व कलेक्टर रहते मनीष सिंह, आईपीएस संतोष सिंह, संभागायुक्त संजय दुबे, कलेक्टर आशीष सिंह इन अधिकारियों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संतुलन बनाकर शहर को दिशा दी। लेकिन वर्तमान में ऐसे लीड अधिकारी की कमी साफ महसूस की जा रही है।
हालांकि, मौजूदा कलेक्टर शिवम वर्मा इस भूमिका को निभाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन हालात बताते हैं कि इंदौर को एक बार फिर मजबूत प्रशासनिक नेतृत्व की सख्त जरूरत है।
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