आबकारी घोटाला: सहायक आयुक्त की बढ़ी मुश्किलें; घोटाले की रकम बढ़ाई, सरकार ने नया आरोप पत्र थमाया
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आबकारी घोटाले में फंसे तत्कालीन सहायक आयुक्त संजीव दुबे की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। राज्य सरकार ने अब घोटाले की राशि 41.71 करोड़ से बढ़ाकर 68.80 करोड़ रुपए कर दी है और इस संबंध में दुबे को नया पूरक आरोप पत्र जारी किया गया है।
घोटाले की रकम में की गई बढ़ोतरी
वर्तमान में जबलपुर में पदस्थ संजीव दुबे के खिलाफ यह कार्रवाई वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा की गई है। विभागीय जांच पहले से जारी थी, लेकिन वित्त विभाग की विस्तृत पड़ताल के बाद घोटाले की रकम में बड़ी बढ़ोतरी सामने आई है।
नया आरोप पत्र
संजीव दुबे को पहले जारी आरोप पत्र में घोटाले की राशि 41.71 करोड़ रुपए आंकी गई थी। अब विभाग के अपर सचिव राजेश ओगरे द्वारा जारी पूरक आरोप पत्र में यह आंकड़ा बढ़ाकर 68.80 करोड़ रुपए कर दिया गया है।
आरोप पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2015-16 से 2017-18 के दौरान, इंदौर में सहायक आयुक्त आबकारी रहते हुए दुबे के कार्यकाल में कूटरचित चालानों के जरिए यह बड़ा घोटाला किया गया। वित्त विभाग की जांच में सामने आया कि राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
नियम-3 का उल्लंघन बताया गया
नए आरोप पत्र में संजीव दुबे पर गंभीर लापरवाही, उदासीनता और शासकीय कर्तव्यों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 का उल्लंघन बताया गया है।
इसके तहत मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम-10 के अनुसार कड़ी विभागीय सजा का प्रावधान है। अब दुबे को इस पूरक आरोप पत्र पर भी जवाब पेश करना होगा।
अब तक चार्जशीट नहीं
इस घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत की है। 25 और 26 दिसंबर को ईडी की जांच रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें ठेकेदारों और शराब दुकानों से जुड़े लोगों को आरोपी बनाया गया।
हालांकि ईडी की चार्जशीट में अभी तक किसी आबकारी अधिकारी को औपचारिक आरोपी नहीं बनाया गया है, लेकिन ठेकेदारों के बयानों में बार-बार संजीव दुबे सहित अन्य अधिकारियों के नाम सामने आए हैं।
ईडी को दिए गए बयानों में कहा गया कि चालान घोटाले से बची नकद राशि आबकारी विभाग के अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी और फर्जी चालान बनाने वाले लोग दुकानों में दुबे के निर्देश पर रखे गए थे।
मुख्य आरोपी का बड़ा खुलासा
मुख्य आरोपी अंश त्रिवेदी ने ईडी को बताया कि बैंक में कम राशि का चालान भरकर शेष रकम नकद के रूप में अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी। इस तरह राजस्व चोरी कर शराब अधिक कीमत की उठाई जाती थी।
अन्य अधिकारियों के नाम भी आए सामने
इस मामले में मंदसौर के जिला आबकारी अधिकारी बीएल दांगी, उनके साले कन्हैयालाल दांगी, और तत्कालीन एडीईओ सुखनंदन पाठक का नाम भी ठेकेदारों के बयानों में सामने आया है।
ठेकेदारों ने बताया कि कई शराब दुकानें बिना किसी लिखित अनुबंध के, मौखिक आदेशों पर संचालित कराई गईं, जो नियमों का सीधा उल्लंघन था।
घोटाला कैसे किया गया
घोटाला चालान भरने की प्रक्रिया में हेराफेरी से किया गया। ठेकेदार चालान में अंकों में राशि कम भरते, शब्दों में राशि नहीं लिखते, जैसे 5,000 की जगह 50,000 दिखाकर शराब उठाते, इस तरह कम भुगतान कर ज्यादा मूल्य की शराब ली जाती रही।
अब तक की रिकवरी और बाकी रकम
कुल आकलित घोटाला: करीब 70 करोड़ रुपए
अब तक रिकवरी: 22.16 करोड़ रुपए
बाकी बकाया: करीब 49 करोड़ रुपए
ईडी के पीएमएलए केस में ये 14 आरोपी
इस मामले में 14 आरोपियों के नाम तय किए हैं। इनमें अंश त्रिवेदी, राजू दशवंत (जो दोनों गिरफ्तार होकर जेल में हैं), विजय श्रीवास्तव, अविनाश मंडलोई, राकेश जायसवाल, प्रदीप जायसवाल, राहुल चौकसे, दीपक जायसवाल, योगेंद्र जायसवाल, मिलियन ट्रेडर्स भोपाल प्राइवेट लिमिटेड, सूर्य प्रकाश अरोरा, गोपाल शिवहरे, मुकेश शिवहरे और भारती शिवहरे शामिल हैं। फिलहाल, आबकारी अधिकारियों को चालान में आरोपी नहीं बनाया गया है।
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