आबकारी सहायक आयुक्त पर FIR का मामला: हाईकोर्ट ने मांगी ठेकेदार के वीडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हाईकोर्ट ने निलंबित आबकारी सहायक आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए मृतक शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना के सुसाइड वीडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट (FSL) 13 फरवरी तक पेश करने के निर्देश दिए हैं।
मामला और आरोप
देवास की सहायक आयुक्त आबकारी मंदाकिनी दीक्षित को शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना से पांच दुकानों के बदले हर महीने 7.5 लाख रुपए रिश्वत मांगने का आरोप लगने के बाद निलंबित किया गया था।
दीक्षित ने इन आरोपों को चुनौती दी है। वहीं, मृतक ठेकेदार की मां संतोष बाई ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें दीक्षित पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
हाईकोर्ट ने मांगी मोबाइल की फॉरेंसिक रिपोर्ट
हाईकोर्ट में टीआई कनाडिया सहर्ष यादव पेश हुए। कोर्ट ने मकवाना द्वारा मृत्यु से पहले मोबाइल में बनाए गए सुसाइड वीडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि दीक्षित के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी या नहीं।
ठेकेदार मकवाना का केस
दिनेश मकवाना इंदौर-कनाडिया के रहने वाले थे और देवास में उनके शराब के ठेके थे। 8 नवंबर 2025 को मकवाना ने सुसाइड कर लिया था। कुछ दिन बाद उनका वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने सुसाइड से पहले मंदाकिनी दीक्षित पर गंभीर आरोप लगाए थे और बताया कि उनके दबाव और प्रताड़ना के कारण उन्होंने जान देने का निर्णय लिया।
मां के आरोप
संतोष बाई ने याचिका में कहा कि दीक्षित हर महीने उनके बेटे से प्रति दुकान 1.5 लाख रुपये की रिश्वत मांग रही थीं। मकवाना के पास पांच दुकानें थीं, इसलिए कुल 7.5 लाख रुपये प्रति माह देने पड़ते थे। अब तक मकवाना ने लगभग 20-22 लाख रुपये दीक्षित को दे दिए थे।
यदि मकवाना राशि नहीं देता तो उसे वेयरहाउस से माल नहीं उठाने दिया जाता और शराब बिक्री पर भी दबाव बनाया जाता था। याचिकाकर्ता ने कहा कि इसी तरह की प्रताड़ना और शोषण के कारण मकवाना ने आत्महत्या की।
याचिका में पक्षकार
ठेकेदार की मां ने याचिका में प्रमुख सचिव, गृह विभाग, मध्य प्रदेश शासन, पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह, एरिया असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस और टीआई कनाडिया को पक्षकार बनाया है। मंदाकिनी दीक्षित को भी याचिका में शामिल किया गया है।
सुसाइड वीडियो में आरोप
वीडियो में मकवाना ने बताया कि मंदाकिनी दीक्षित ने एक दुकान से 1.5 से 2 लाख रुपये मांगे। उनके पास पांच दुकानें थीं, इसलिए हर माह साढ़े सात लाख रुपये की मांग की गई। मकवाना ने अब तक 20-22 लाख रुपये दीक्षित को दिए।
रुपए न देने पर उन्हें वेयरहाउस से माल नहीं लेने दिया गया। इसी दबाव और परेशानियों के चलते मकवाना ने आत्महत्या करने का फैसला किया। हाईकोर्ट 13 फरवरी को फॉरेंसिक रिपोर्ट को देखने के बाद इस मामले में अगले कदम का फैसला करेगा।
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