पाराशर नगर में नर्मदा वॉल्व तक पहुंचा ड्रेनेज का पानी: मौत का रिसाव; नर्मदा लाइन में ड्रेनेज की सेंध
KHULASA FIRST
संवाददाता

निजी प्लंबरों की कारस्तानी से मचा हड़कंप, पार्षद ने की जांच
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल से उपजी त्रासदी की टीस अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अब वार्ड क्रमांक 80 के रहवासियों की सेहत पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। यहां पाराशर नगर और प्रगति नगर क्षेत्र में नर्मदा जल की मुख्य लाइन के वॉल्व चेंबर में ड्रेनेज का गंदा पानी मिलने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है।
स्वच्छ जल की जगह नलों से बदबूदार पानी आता देख क्षेत्र के रहवासी तरह घबरा गए, जिसके बाद हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई। स्थानीय लोगों की त्वरित शिकायतों के बाद जब स्थिति की गंभीरता को समझा गया तब जाकर प्रशासन हरकत में आया।
मामले की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय पार्षद प्रशांत बड़वे ने तत्परता दिखाते हुए स्थानीय सोसायटी के पदाधिकारियों के साथ मौके का मुआयना किया और नगर निगम के अमले को तत्काल जांच के निर्देश दिए। निगम की तकनीकी टीम द्वारा की गई सघन जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि क्षेत्र के कुछ रसूखदार और जागरूक कहे जाने वाले रहवासियों ने ही बिना किसी आधिकारिक अनुमति के अत्यंत दोषपूर्ण तरीके से ड्रेनेज पाइप लाइन जोड़ रखी थी। इसी अवैध इंजीनियरिंग के कारण ड्रेनेज लाइन में भारी रिसाव शुरू हुआ और वह गंदगी सीधे नर्मदा जल की पाइप लाइन में समाने लगी।
इस पूरे प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए जल कार्य विभाग प्रभारी एवं एमआईसी सदस्य अभिषेक शर्मा ने स्पष्ट किया कि करीब चार साल पहले निजी प्लंबरों की मदद से गुपचुप तरीके से किए गए ये सीवर कनेक्शन आज पूरे क्षेत्र के लिए मुसीबत बन गए हैं।
24 घंटे के भीतर लीकेज को दुरुस्त किया- उन्होंने बताया कि जैसे ही गंदा पानी आने का असली कारण पता चला, निगम की टीम ने युद्धस्तर पर कार्य कर 24 घंटे के भीतर लीकेज को दुरुस्त कर दिया है। इसके साथ ही नियमों का घोर उल्लंघन करने वाले संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर कड़े दंड की चेतावनी दी गई है।
निरीक्षण के दौरान रहवासियों ने क्षेत्र में व्याप्त अवैध अतिक्रमण की भी गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिससे भविष्य में अन्य नागरिक सेवाओं के बाधित होने का खतरा बना हुआ है। शहर में लगातार बढ़ती ऐसी घटनाओं ने निगम की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि देरी से होने वाले सुधार के कारण लोग बोरिंग या महंगे निजी टैंकरों पर निर्भर होने को मजबूर हैं।
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