शहर को मेट्रो स्टेशन चाहिए या सांसे: डीसीपी कार्यालय सहित हुकुमचंद मिल की हरियाली भी न उजाड़ने की मांग
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के हृदयस्थल रीगल तिराहा पर इन दिनों विकास और पर्यावरण के बीच एक बड़ी जंग छिड़ी हुई है। प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए डीसीपी कार्यालय परिसर में लगे करीब 235 पेड़ों को काटने की तैयारी है, जिसका विरोध अब सड़कों पर उतर आया है।
नवगठित जनहित पार्टी के बैनर तले संघ के पूर्व स्वयंसेवक अभय जैन और उनके साथी 8 दिन से परिसर में ही डेरा डाले हुए हैं। ‘विकास के नाम पर विनाश मंजूर नहीं’ के नारों के साथ प्रदर्शनकारी इन पेड़ों को बचाने की जिद पर अड़े हैं।
इस आंदोलन की गूंज अब केवल इंदौर तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्वालियर से लॉ की छात्रा वंशिका शर्मा भी इस मुहिम का हिस्सा बनने शहर पहुंची हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभय जैन का स्पष्ट कहना है कि इंदौर का बेतरतीब विकास शहर की आबोहवा को जहरीला बना रहा है।
इस परिसर में नीम, बरगद और पीपल जैसे विशालकाय पेड़ हैं, जो न केवल शहर को ऑक्सीजन देते हैं, बल्कि हजारों तोतों का आशियाना भी हैं। अगर ये पेड़ कटे तो उन परिंदों का घर उजाड़ना तय है। जैन ने चेतावनी दी है कि वे पर्यावरण की कीमत पर कंक्रीट का जंगल खड़ा करने की अनुमति नहीं देंगे।
हुकुमचंद मिल परिसर की हरियाली को लेकर भी जारी है लड़ाई
आंदोलनकारियों का दर्द केवल डीसीपी दफ्तर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हुकुमचंद मिल परिसर के पेड़ों को लेकर भी वे आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। जनहित पार्टी की मांग है कि हुकुमचंद मिल परिसर को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया जाए। उनका सुझाव है कि प्रशासन मिल के बाहरी हिस्से में दुकानें बनाकर राजस्व जुटाए, लेकिन भीतर के घने जंगल को न छेड़े।
इस लड़ाई को कानूनी रूप देने के लिए पत्रकार सुचेंद्र मिश्रा के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की जा चुकी है, ताकि इन पेड़ों को कटने से बचाया जा सके। परिसर में जारी धरने को शहर की सामाजिक संस्थाओं और पर्यावरणविदों का भी समर्थन मिल रहा है। मनीष काले, डॉ. सुभाष बारोड़, मेहुल गरजे और लेखिका ममता नीर सहित कई प्रबुद्ध नागरिक इस आंदोलन में पेड़ों की ढाल बनकर खड़े हैं।
इनका कहना है कि शासन-प्रशासन को मेट्रो का रूट या स्टेशन का नक्शा इस तरह बदलना चाहिए कि पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो। फिलहाल, शासन की ओर से इस मामले में कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है, लेकिन जनहित पार्टी ने साफ कर दिया कि जब तक पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित होने तक धरना जारी रहेगा।
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