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परदेशीपुरा में गंदे पानी की सप्लाय से मचा हड़कंप: दिव्य विहार कॉलोनी में बोरिंग से आ रहा सीवरेज का पानी

KHULASA FIRST

संवाददाता

23 जनवरी 2026, 11:58 पूर्वाह्न
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परदेशीपुरा में गंदे पानी की सप्लाय से मचा हड़कंप

नाले से गुजर रही पीने के पानी की सप्लाय पाइप लाइन

मंत्री विजयवर्गीय का मौखिक आदेश हो रहा छलनी

भागीरथपुरा जल त्रासदी : भागीरथपुरा में होने वाली मौतों के बाद बने भयावह हालात से रहवासियों में संक्रामक बीमारी को लेकर डर

महू में दूषित पानी से 25 लोग बीमार

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम जोन 5 के परदेशीपुरा क्षेत्र में ड्रेनेजयुक्त गंदा व दूषित पानी सप्लाय किया जा रहा है। इससे रहवासियों में संक्रामक जानलेवा बीमारियों को लेकर डर का माहौल बनने लगा है। कई बार जोनल कार्यालय पर शिकायत के बाद भी जिम्मेदार रहवासियों की समस्या को अनदेखा कर रहे हैं। इससे लोगों में निगम के प्रति नाराजगी पनपने लगी है।

नगर निगम अफसरों की अफसरशाही हावी है। इसके चलते ही निगम जोन 5 के परदेशीपुरा क्षेत्र में लगातार हो रहे ड्रेनेजयुक्त गंदे व दूषित पानी की सप्लाय को लेकर अब तक अफसरों ने सुध नहीं ली है।

रहवासियों का कहना है कि परदेशीपुरा गली नंबर तीन, चार और छह में बदबूदार गंदा पानी नलों से निकल रहा है। कई बार निगम जोन 5 के जोनल अधिकारी आशीष राठौर को शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे पूरे क्षेत्र में लोगों को संक्रामक बीमारियों का डर सताने लगा है। ज्ञात रहे कि भागीरथपुरा से सटे परदेशीपुरा क्षेत्र में लंबे समय से गंदे व दूषित पानी को लेकर रहवासी परेशान है।

रहवासियों को भागीरथपुरा में फैली संक्रामक जानलेवा बीमारी जैसी बीमारी फैलने का डर भी सता रहा है। लोगों का कहना है कि भागीरथपुरा में अब तक 25 लोगों की मौत हो गई है। जब कि हजारों लोग बीमार हुए। सैकड़ों लोगों का अब तक अस्पतालों में इलाज हो रहा है। ऐसे में नलों से आ रहे गंदे पानी का इस्तेमाल करने से ही बीमारी का डर सताने लगता है, लेकिन निगम के जिम्मेदार इस मामले में मौन साधे बैठे हैं।

भागीरथपुरा में दूषित पानी ने ली एक और जान, संक्रमण से अब तक 26 ने तोड़ा दम
शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में फैला जल जनित संक्रमण अब एक विकराल त्रासदी का रूप ले चुका है। सरकारी दावों और नगर निगम की मुस्तैदी के दावों के उलट दूषित पानी से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

इसी क्रम में संक्रमण की चपेट में आईं 85 वर्षीय बुजुर्ग विद्या बाई यादव ने गुरुवार रात उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस मौत ने क्षेत्र में व्याप्त भय को और गहरा कर दिया है, साथ ही नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के उन दावों की कलई खोल दी है जिनमें स्थिति नियंत्रण में होने की बात कही जा रही थी।

विद्या बाई के पुत्र शिवनारायण यादव ने स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी की मर्मस्पर्शी दास्तां बयां की है। उन्होंने बताया कि उनकी मां 12 जनवरी से ही लगातार उल्टी और दस्त की शिकायत से जूझ रही थीं, जिसके बाद उन्हें एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

दूषित पानी के संक्रमण ने उन्हें शारीरिक रूप से इस कदर कमजोर कर दिया था कि वे घर में ही चक्कर खाकर गिर गईं, जिससे उनके दाहिने पैर के कूल्हे की हड्‌डी टूट गई थी।

उम्र अधिक बताकर सर्जरी से कर दिया इंकार... परिजन गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एमवाय अस्पताल के हड्‌डी रोग विशेषज्ञों ने वृद्धा की अधिक उम्र का हवाला देते हुए सर्जरी करने से साफ इनकार कर दिया था।

उचित इलाज के अभाव और संक्रमण की जटिलता के बीच गुरुवार को अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अरबिंदो अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। भागीरथपुरा में बढ़ती मृत्यु दर अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।

प्रदर्शन किया
परदेशीपुरा के रहवासियों ने ड्रेनेजयुक्त गंदे व दूषित पानी की सप्लाय से नाराज होकर प्रदर्शन भी किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेसी भी शामिल हुए। उस समय निगम जोन 5 के जोनल अधिकारी आशीष राठौर ने आश्वासन दिया था कि गंदे पानी की समस्या दूर कर दी जाएगी।

लेकिन निगम अफसर ने अब तक कोई प्रयास नहीं किए है। इससे हजारों परिवार के समक्ष गंदे पानी की समस्या बनी हुई है। रहवासियों ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव व निगमायुक्त क्षितिज सिंघल से भी गुहार लगाई है कि गंदे पानी की समस्या से राहत दिलाई जाए।

नहीं होती कार्रवाई
निगम जोन 5 के जोनल अधिकारी आशीष राठौर सहित जलयंत्रालय व ड्रेनेज विभाग के अफसर पूरी तरह लापरवाह बने हुए हैं। इसके चलते ही क्षेत्र के रहवासियों द्वारा की जाने वाली शिकायतों को अनदेखा किया जा रहा है।

जबकि क्षेत्र में सैकड़ों रहवासियों के द्वारा गंदे पानी और कम प्रेशर से पानी सप्लाय किए जाने की शिकायतें की गई है, लेकिन अब तक उनका कोई निराकरण नहीं किया गया। इसके चलते रहवासियों को पर्याप्त पानी भी नहीं मिल रहा है जो पानी मिल रहा है वह ड्रेनेजयुक्त गंदा व दूषित पानी है।

कई बच्चों को पीलिया, नाले से गुजर रही पाइप लाइन, लोग बोले: शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं हुई
महू के पत्ती बाजार और मोतीमहल इलाके में दूषित पानी की सप्लाई की समस्या चंदर मार्ग से शुरू होकर मोतीमहल तक पहुंच चुकी है। जहां नलों से आ रहे गंदे पानी ने बच्चों की सेहत बुरी तरह प्रभावित किया है। पिछले 10 से 15 दिनों के भीतर लगभग 25 लोग पीलिया और हैजा जैसी बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं।

दूषित पानी के कारण कई परिवारों के बच्चे एक साथ बीमार पड़े हैं। मिठोरा परिवार के छह बच्चे, जिनमें 11 साल की वाणी से लेकर 19 साल का भावेश शामिल है, कई दिनों से बीमार है। बीमारी का असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ा है। 12वीं की छात्रा अलीना संक्रमण के कारण परीक्षा तक नहीं दे पाई। वहीं, 9 साल की लक्षिता और 12 साल के गीतांश सहित कई अन्य बच्चे पीलिया से जूझ रहे हैं।

मोतीमहल में भी फैला संक्रमण अस्पताल में भर्ती बच्चे
मोतीमहल इलाके के हालात भी चिंताजनक बने हुए हैं। यहां के रहने वाले आदर्श (5), कृशु (4) और यथार्थ (10) को संक्रमण के बाद रेडक्रॉस अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। इसके अलावा, बुजुर्ग जगदीश चौहान की हालत बिगड़ने और लिवर इंफेक्शन होने पर उन्हें इंदौर रेफर किया गया है। लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से गंदे पानी की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही है।

डीएचएल कॉलोनी के रहवासी जहरीला पानी पीने को हैं मजबूर...
इंदौर भागीरथ पूरा मै गंदे पानी पीने के कारण कई लोगो की जान चली गई जिसके बाद सफाई अभियान चलाया गया था, लेकिन महू विधानसभा के डोंगर गांव ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाली कॉलोनी मै घर तो खरीद लिए, लेकिन मूलभूत सुविधाएं नहीं है।

अगर यह दूषित पानी पीकर कर किसी की जान चली जाती है तो ऐसे में इसका जिम्मेदार कोन होगा। कॉलोनी के अध्यक्ष पंकज जोशी और अन्य रेहवासियों ने मिलकर पत्रकार वार्ता लेकर अधिकरियों को शिकायत भी की थी, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया।

भागीरथपुरा कांड के बाद भी शहर में रातोरात बोरिंग का खेल जारी!
भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण हुई मौतों के बाद जहां पूरे शहर में जल आपूर्ति व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे, वहीं अब एक बार फिर इंदौर के कई इलाकों में रातोरात बोरिंग कर भूमिगत जल का दोहन किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

हालत यह है कि नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा मीडिया के माध्यम से दिए गए स्पष्ट संदेश और निर्देशों के बावजूद शहर के बायपास क्षेत्र और नई बसाहटों में बोरिंग मशीनों की आवाजें रात में लगातार सुनाई दे रही हैं।

रहवासियों का कहना है कि कुछ स्थानों पर देर रात अचानक मशीनें पहुंचती हैं और सुबह तक जमीन में गहरे छेद कर दिए जाते हैं, जिससे लोगों की नींद भी प्रभावित हो रही है और भविष्य में जलसंकट की आशंका भी गहराती जा रही है।

भूमिगत जल स्तर पर नकारात्मक प्रभाव... शहर के बायपास क्षेत्र स्थित निपानिया, लसूड़िया और आसपास की कई कॉलोनियों में प्लॉट मालिकों द्वारा अपनी जरूरत से अधिक स्थानों पर बोरिंग कराए जाने की बातें सामने आ रही हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार एक ही क्षेत्र में एक-दो नहीं, बल्कि कई-कई बोरिंग होने से भूमिगत जल स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। जानकारों का कहना है कि यदि इसी तरह अनियंत्रित तरीके से बोरिंग होते रहे, तो आने वाले समय में इन क्षेत्रों में जल स्तर तेजी से नीचे जा सकता है, जिसके चलते रहवासियों को गंभीर जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है।

मंत्री विजयवर्गीय ने यह कहा था
गौरतलब है भागीरथपुरा घटना के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से चर्चा में यह स्पष्ट किया था कि फिलहाल शहर में बोरिंग न कराए जाएं, क्योंकि दूषित पानी और अव्यवस्था के चलते कई लोगों की जान जा चुकी है और इस मामले ने शहर की छवि को भी नुकसान पहुंचाया है।

हालांकि जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। मंत्री के उक्त मौखिक आदेश को नगर निगम और पुलिस विभाग द्वारा प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा रहा, जिसके चलते बोरिंग की गतिविधियां फिर से बढ़ रही हैं। लोगों का कहना है प्रशासन को रात में होने वाली इस तरह की गतिविधियां सख्ती से रोकना चाहिए, ताकि भविष्य में जलसंकट के हालात न हों।

2019 में आया था सख्त आदेश
जलसंकट और अनियंत्रित रूप से बढ़ते बोरिंग को रोकने के लिए वर्ष 2019 में प्रशासन द्वारा एक सख्त और व्यवस्थित आदेश जारी किया गया था। उस समय भूमिगत जल स्तर तेजी से गिरने और कई इलाकों में पेयजल संकट की आशंका को देखते हुए बोरिंग की अनुमति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया था।

आदेश के तहत कोई भी व्यक्ति या संस्था बोरिंग कराना चाहे तो आसपास रहने वाले करीब 40 लोगों की सहमति लेना अनिवार्य होगा, ताकि क्षेत्र के जल स्तर और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर ही अनुमति दी जा सके।

इतना ही नहीं, यह भी प्रावधान था कि यदि जलसंकट की स्थिति गंभीर हो जाती है, तो सरकार जरूरत पड़ने पर निजी बोरिंग को अधिग्रहित कर सकती है, ताकि संकट के समय आम जनता को पानी उपलब्ध कराया जा सके। इन्हीं शर्तों के आधार पर बोरिंग की अनुमति दी जाएगी और बिना प्रक्रिया पूरी किए बोरिंग कराना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल
रहवासियों का यह भी कहना है कि रात में होने वाले बोरिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली का खुलासा कर रहे हैं। आमतौर पर इतनी बड़ी गतिविधि बिना संबंधित विभागों और स्थानीय स्तर पर निगरानी के संभव नहीं मानी जाती।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां अनुमति मिलने में दिक्कत होती है, वहां ‘मैनेजमेंट’ के माध्यम से रास्ता निकालकर रात के अंधेरे में काम शुरू कर दिया जाता है।

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