एमवायएच की तानाशाही: सच छिपाने के लिए मीडिया पर लगा दिया पहरा; कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों से सुरक्षाकर्मियों ने की बदसलूकी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एमवाय अस्पताल एक बार फिर अपनी बदइंतजामी और सुरक्षाकर्मियों की गुंडागर्दी को लेकर सुर्खियों में है। थाने में अपमानित होने व झूठे आरोपों से आहत एक महिला द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास करने के मामले में कवरेज के लिए पहुंचे मीडियाकर्मियों के साथ अस्पताल की सुरक्षा एजेंसी बीवीजी के कारिंदों ने जमकर अभद्रता की।
महिला का हाल जानने और पुलिस की कार्रवाई को कवर करने से रोकने के लिए बाउंसर्स और सुरक्षा अधिकारियों ने पूरी ताकत झोंक दी। पत्रकारों ने जब अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी हर हरकत रिकॉर्ड हो रही है, तो भी जिम्मेदार अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं हुआ।
सुरक्षाकर्मी विनीता और बाउंसर वसीम खान ने मीडिया का रास्ता रोका, वहीं बीवीजी कंपनी के सीएसओ स्वदेश व्यास और एसओ सर्वेश सिंह ने बेशर्मी से कहा कि चूहा कांड और एक्सपायरी डेट की बोतल चढ़ाने जैसे शर्मनाक खुलासे होने के बाद से डॉक्टर मीडिया से बेहद नाराज हैं।
डॉक्टरों के निर्देश का पालन करते हुए पत्रकारों को अस्पताल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। मीडियाकर्मियों ने जब तर्क दिया कि वे किसी नियम का उल्लंघन नहीं कर रहे और पुलिस व महिला अधिवक्ता की मौजूदगी में केवल जरूरी कवरेज कर रहे हैं, तब जाकर सुरक्षा अधिकारी पीछे हटे।
अस्पताल प्रबंधन का यह रवैया साफ जाहिर करता है कि वह अपनी नाकामियों और डॉक्टरों की गलतियों पर पर्दा डालने के लिए सुरक्षाकर्मियों को ‘निजी सेना’ की तरह इस्तेमाल कर रहा है। सरकारी अस्पताल में जनता के पैसे पर तैनात सुरक्षाकर्मी अगर सच को दबाने के लिए मीडिया से भिड़ने लगें, तो समझा जा सकता है कि एमवायएच में प्रबंधन की क्या खिचड़ी पक रही है।
सवाल यह है कि जब अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, तो प्रबंधन को पारदर्शिता से इतना डर क्यों है? क्या ये कैमरे सिर्फ जनता की निगरानी के लिए हैं या फिर सुरक्षाकर्मियों की इस बदसलूकी को रिकॉर्ड करने के काम भी आएंगे?
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