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शव रखकर किया प्रदर्शन: सेवानिवृत्त होने के बाद महेंद्र पथरोड़ को नहीं मिली पेंशन; मौत के बाद भड़के परिवारजन, निगम मुख्यालय में

KHULASA FIRST

संवाददाता

16 जनवरी 2026, 8:03 पूर्वाह्न
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खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम अफसरों की अफसरशाही के कारण वर्ष 2024 में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी को महीनों बाद भी पेंशन मिलना शुरू नहीं हुई। इससे वह मानसिक रुप से परेशान हो गया। मुख्यालय के कई चक्कर लगाने के बाद अंतत: उसकी मौत हो गई। इससे परिजन भी नाराज हो गए और निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन कर महापौर व निगमायुक्त के खिलाफ नारेबाजी कर आक्रोश जताया।

मिली जानकारी के अनुसार रिटायर्ड नगर निगम कर्मचारी महेंद्र पथरोड़ पिता जगदीश निवासी उषाफाटक जेल रोड को सेवानिवृत्त होने के बाद भी निगम द्वारा उसे पेंशन सहित किसी भी मद में कोई भी भुगतान नहीं किया गया।

महीनों से चक्कर लगा रहे सेवानिवृत्त कर्मचारी मानसिक रुप से परेशान हो गया। इसके चलते गतदिवस उसकी मृत्यु हो गई। इससे गुस्साए परिवारजनों ने उसका शव निगम मुख्यालय लाकर प्रदर्शन किया। लोगों का कहा कि निगम अफसरों की लापरवाही के कारण जान गई है। छह महीने पहले सेवानिवृत्त होने के बाद भी पेंशन सहित अन्य शासकीय सुविधाओं का लाभ नहीं दिया गया। इससे वह परेशान हो गया और उसकी मौत हुई है। सेवानिवृत्त कर्मचारी की मौत के लिए महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल को दोषी ठहराते हुए शव के साथ लोगो ने प्रदर्शन कर महापौर व निगमायुक्त के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

स्थाई कर्मचारी

बताया जाता है कि महेंद्र पथरोड़ निगम मे सीधी भर्ती मे वर्ष 1997 में नौकरी पर लगा था और 30 जून 2024 तक नगर निगम के जीपी एफ विभाग में नियमित कर्मचारी के पद पर कार्यरत रहा। 30 जून 2024 को रिटायर्ड होने के बाद से वह पेंशन के लिए लगातार निगम मुख्यालय के चक्कर लगा रहा था, लेकिन आज दिनांक तक उसे पेंशन नहीं मिली। न ही किसी तरह का अन्य भुगतान प्राप्त हुआ। जब कि महेंद्र पथरोड़ के दो पुत्री हैं एक पुत्र है पत्नी बीमार है, लेकिन भुगतान न होने के कारण और पेंशन नहीं मिलने की वजह से उसके परिवारजन परेशान होने लगे। इससे वह मानसिक रुप से परेशान रहने लगा और गुरुवार को उसकी मौत हो गई। इससे नाराज परिजन उसकी शवयात्रा लेकर दोपहर बाद करीब 4 बजे निगम के गेट पर पहुंचे और निगम प्रशासन और महापौर के खिलाफ नारे लगाकर अपनी नाराजगी जताई।

नियमो की अनदेखी

बताया जाता है कि धारा 64 के तहत किसी भी कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने पर उसकी पेंशन या वेतन रोकने का अधिकार किसी को भी नहीं है। शासन के नियमो की निगम अफसरो द्वारा अनदेखी करते हुए जानबूझकर सेवानिवृत्त कर्मचारी व उसके परिवार को परेशान किया गया। जब कि वर्ष 1997 में महेन्द्र पथरोड के साथ नियुक्त हुए कर्मचारी मे से दो कर्मचारियों के बच्चो को अनुकंपा नियुक्ति मिल गई। वहीं 11 कर्मचारियों को पेंशन का लाभ भी मिल रहा है। जब कि महेंद्र पथरोड़ को पेंशन का भुगतान भी नहीं किया गया। शव लेकर प्रदर्शन करने वालों ने निगम अफसरों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग करते हुए हंगामा किया।

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