काटा मासूम का अंगूठा: एमजीएम कॉलेज या मासूमों का कसाईखाना
KHULASA FIRST
संवाददाता

चूहे के कुतरने के बाद अब नर्सिंग ऑफिसर की कैंची ने
डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया की कागजी सख्ती के बीच आरती श्रोत्रिय जैसी स्टाफ की संवेदनहीनता ने सिस्टम को किया लहूलुहान
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज और उससे संबद्ध अस्पताल अब जीवन देने के बजाय मासूमों को उम्रभर का जख्म देने वाले संस्थान बन चुके हैं। प्रबंधन की रूह कंपा देने वाली लापरवाही का ताजा और वीभत्स चेहरा न्यू चेस्ट वार्ड में तब दिखा, जब नर्सिंग ऑफिसर आरती श्रोत्रिय ने डेढ़ माह के मासूम का इंट्राकैथ बदलते समय ऐसी निर्दयता दिखाई कि कैंची से बच्चे का अंगूठा ही काटकर शरीर से अलग कर दिया।
यह वही अस्पताल है, जहां पहले नवजात बच्चों को चूहों द्वारा कुतरने की रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने मानवता को शर्मसार किया था। मासूम के कटे हुए अंगूठे को आनन-फानन में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने सर्जरी के बाद उसे जोड़ा तो है, लेकिन सिस्टम द्वारा दिए गए इस घाव की भरपाई शायद ही कभी हो पाए।
हैरानी की बात यह कि डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया के दावों और तथाकथित प्रयासों के बावजूद अस्पताल का निचला स्टाफ पूरी तरह बेलगाम और जल्लाद बन चुका है। आरोपी आरती श्रोत्रिय को निलंबित करना और तीन इंचार्जों का वेतन रोकना केवल एक प्रशासनिक ढकोसला है, क्योंकि जब तक व्यवस्थाओं में सड़न मौजूद है, तब तक ऐसे हादसे नहीं रुकेंगे।
कभी एक्सपायर हो चुकी सलाइन चढ़ाना तो कभी नवजातों को चूहों के भरोसे छोड़ देना यह साबित करता है कि यहां गरीब मरीजों की जान की कीमत कौड़ियों के बराबर भी नहीं है। अस्पताल प्रशासन की इस आपराधिक चुप्पी और आधी-अधूरी कार्रवाई ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि इन सरकारी बूचड़खानों में मासूमों की चीखें सुनने वाला कोई नहीं है।
यदि समय रहते इस नाकारा सिस्टम पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो कल किसी और मासूम का अंग ही नहीं, बल्कि जान भी इन्हीं लापरवाही की कैंचियों की भेंट चढ़ जाएगी।
एमवाय अस्पताल में लापरवाही पर उपमुख्यमंत्री ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के दिए निर्देश
एमवाय अस्पताल में चिकित्सकीय लापरवाही को लेकर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने इस पूरी घटना को स्वास्थ्य सेवाओं की गरिमा के विरुद्ध बताते हुए दोषी चिकित्सकों और सहायक कर्मचारियों की भूमिका की गहन जांच के निर्देश जारी किए हैं।
उपमुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर लापरवाह स्टाफ के खिलाफ ऐसी दंडात्मक कार्रवाई की जाए, जो भविष्य के लिए नजीर बने। उपमुख्यमंत्री ने पीड़ित शिशु के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अस्पताल प्रशासन को उसे उच्च स्तरीय उपचार मुहैया कराने के सख्त निर्देश दिए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण और समय पर उपचार देना ही सरकार का मुख्य संकल्प है, जिसमें किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार्य नहीं होगी। मासूमों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
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