एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की उम्र पर गहराया विवाद: जालसाजी के आरोपों से बढ़ी सियासी मुश्किलें
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी एक गंभीर कानूनी और राजनीतिक संकट में घिरते नजर आ रहे हैं। उन पर चुनावी हलफनामों और शासकीय दस्तावेजों में अपनी वास्तविक उम्र छिपाने तथा जन्म तारीख में हेरफेर करने के सनसनीखेज आरोप लगे हैं।
भाजपा नेता श्याम साहू द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों के अनुसार पटवारी की हाईस्कूल की मार्कशीट और विधानसभा रिकॉर्ड में दर्ज जन्म तारीख में करीब 22 महीने का बड़ा अंतर पाया गया है। इस विसंगति को लेकर अब राज्य पुलिस महानिदेशक, विधानसभा अध्यक्ष और निर्वाचन आयोग तक शिकायत पहुंच चुकी है, जिससे प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है।
साल 2008 में किया था हेरफेर
मामले का खुलासा करते हुए दस्तावेजों के साथ यह दावा किया गया है कि इंदौर के बिजलपुर निवासी जीतू पटवारी की हाईस्कूल अंकसूची में जन्म तारीख 25 जनवरी 1973 अंकित है। इसके विपरीत, विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड और उनके द्वारा प्रस्तुत अन्य चुनावी दस्तावेजों में जन्म तारीख 19 नवंबर 1974 दर्शाई गई है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह हेरफेर साल 2008 में उस वक्त किया गया था, जब पटवारी युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में थे। उस समय इस पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित थी और मार्कशीट के अनुसार वह इस सीमा को पार कर रहे थे।
आरोप है कि पद की पात्रता हासिल करने के लिए जन्म तारीख को बदला गया और बाद में इसी ‘तैयार’ की गई तारीख का उपयोग विधानसभा चुनावों और अन्य वैधानिक लाभ प्राप्त करने के लिए किया जाता रहा।
हाईस्कूल की अंकसूची में बदलाव करना दंडनीय अपराध
भाजपा ने प्रकरण को एक जालसाजी करार दिया है। भाजपा नेता श्याम साहू ने तंज कसते हुए यह सवाल उठाया कि क्या पटवारी की नई जन्म तारीख जानबूझकर 19 नवंबर चुनी गई, जो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की जयंती है?
शिकायतकर्ता का तर्क है कि हाईस्कूल की मूल अंकसूची में बदलाव करना एक दंडनीय अपराध है और यदि इस आधार पर पासपोर्ट, पैन कार्ड या आधार कार्ड जैसे दस्तावेज तैयार किए गए हैं, तो यह सीधे तौर पर धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आरोप सिद्ध होते हैं तो यह मामला संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आएगा, जिसमें न केवल सदस्यता पर संकट आ सकता है बल्कि कारावास तक का प्रावधान है।
फिलहाल इस गंभीर विवाद पर जीतू पटवारी और कांग्रेस खेमे की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन निर्वाचन आयोग और पुलिस प्रशासन की संभावित जांच पटवारी की राजनीतिक राह को कांटों भरी बना सकती है।
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