दूषित पानी ने रोजी-रोटी छीनी: सेहत के साथ रोजगार भी संकट में; डर के कारण लोग कर रहे पलायन
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी अब केवल स्वास्थ्य संकट नहीं रही, बल्कि इसने स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी पर भी गहरा असर डाल दिया है। हालात इतने भयावह हो गए हैं कि कुछ परिवारों ने इलाका छोड़कर अपने मूल शहर लौटने का फैसला तक कर लिया है। क्षेत्र में डर का माहौल बना हुआ है।
फास्ट फूड और ठेले-खोमचे ठप
दूषित पानी की खबर सामने आने के बाद भागीरथपुरा में फास्ट फूड, चाय-नाश्ता और पानीपुरी-चाट जैसे छोटे व्यवसाय कई दिनों तक पूरी तरह बंद रहे। कुछ दुकानदारों ने हाल ही में दुकानें खोल तो ली हैं, लेकिन ग्राहकों की संख्या न के बराबर है।
लोग बाहर का खाना खाने से कतरा रहे हैं, जिससे कारोबार लगभग ठप हो चुका है। दुकानें बंद रहने और बिक्री न होने का सीधा असर छोटे व्यापारियों की आर्थिक हालत पर पड़ रहा है। कई दुकानदारों का कहना है कि जब तक पानी की गुणवत्ता को लेकर भरोसा नहीं बनता, तब तक हालात सुधरने की उम्मीद कम है।
बीमारी की भयावह स्थिति
मंगलवार रात तक की स्थिति के अनुसार 99 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। 16 मरीज आईसीयू में हैं। 3 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। अब तक 429 लोग भर्ती हो चुके हैं। 330 मरीज डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़े बताते हैं कि हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं।
नए साल पर भी नहीं चली दुकानें
भागीरथपुरा में फास्ट फूड की दुकान चलाने वाले राजवीर सिंह कुशवाह बताया कि वे चायनीज फूड जैसे बर्गर, पिज्जा, सैंडविच और मंचूरियन बेचते हैं। पिछले एक-डेढ़ हफ्ते से दुकान बंद थी। पानी खराब आ रहा था और हमारे ज्यादातर आइटम पानी से ही बनते हैं। माहौल भी डर का था, इसलिए दुकान बंद रखना बेहतर लगा।
उन्होंने बताया कि 31 दिसंबर और 1 जनवरी को सबसे ज्यादा कमाई होती है, लेकिन 28 दिसंबर से 5 जनवरी तक दुकान बंद रही। 6 जनवरी को दुकान खोली, लेकिन ग्राहक नहीं आ रहे। इससे हमारे बिजनेस को भारी नुकसान हुआ है।
रोज कमाओ-रोज खाओ वालों पर सबसे ज्यादा मार
पानीपुरी-चाट का ठेला लगाने वाले महेश हार्डिया ने बताया कि वे करीब 8–10 दिनों से ठेला नहीं लगा पा रहे हैं। पानी गंदा आने के कारण अधिकारियों ने ठेले बंद रखने को कहा था। पहले रोज 700–800 रुपए कमा लेते थे, अब पूरी आमदनी बंद है। जो थोड़ी बहुत बचत थी, उसी से काम चला रहे हैं।
ग्राहकी पहले जैसी नहीं रही
इलाके में नाश्ते की दुकान चलाने वाली सीमा सिकरवार का कहना है कि दूषित पानी के कारण ग्राहकों का भरोसा टूट गया है। अब पहले जैसी ग्राहकी नहीं रही। थोड़ा-बहुत काम चल रहा है। मजबूरी में बोरिंग का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं।
डर के कारण भागीरथपुरा से पलायन
बीमारी और दूषित पानी के डर से कुछ परिवारों ने इलाका छोड़ने का फैसला भी कर लिया है। रोशनी कोरी ने बताया कि वे कपड़ों की दुकान पर काम करती हैं और पिछले 8–9 महीने से भागीरथपुरा में किराए से रह रही थीं।
कई दिनों से गंदा पानी आ रहा था। बेटे की तबीयत बहुत बिगड़ गई थी, अब वह ठीक है, लेकिन सास की भी तबीयत खराब हुई। अब हम परिवार के साथ वापस सागर जा रहे हैं।
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