बाज आ जाओ हत्यारे पतंगबाजों: मौत का मांझा; पुलिस-प्रशासन की मैदानी मेहनत पर फिरा पानी
KHULASA FIRST
संवाददाता

आसमान में ड्रोन से निगरानी, जमीन पर जनजागरूकता अभियान के बाद भी थम नहीं रहे हादसे
ये कैसा जानलेवा शौक? पुलिस की सख्ती के बावजूद नहीं रुक रही चीन की डोर से पतंगबाजी
हत्यारी डोर से रविवार को एक की मौत, दो गंभीर घायल, त्योहार के मुहाने पर मुहिम पर प्रश्नचिह्न
अब हर हाल में ऐसे तत्वों की हो धरपकड़, जो पुलिस-प्रशासन को रख
रहे ठेंगे पर, सख्ती की अब बेहद जरूरत
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अरे…बाज आ जाओ, हत्यारे पतंगबाजो। ये कैसे तुम पतंगबाज? तुम्हारा मन नहीं पसीजता? रत्तीभर भी डर नहीं लगता कि तुम हाथों में मौत की डोर थामे हुए हो। ये जो गर्दन कल फिर कटी और भल-भल कर सड़क पर खून बहा, ये गर्दन तुम्हारे अपने बेटे, भाई, मां, बहन, पिता, चाचा की भी तो हो सकती थी?
बावजूद इसके तुम्हारे हाथ से मौत का मांझा नहीं छूट रहा। क्या भारत में पतंगबाजी का कभी कोई रक्तरंजित इतिहास रहा है? क्या तुम्हारे पुरखों ने इस शौक से किसी की जान ली? फिर तुम पतंगबाजी के शौक में कब और क्यों हत्यारे बन गए?
ये कैसा शौक पाला है, जो खूनखराबे से जाकर जुड़ गया है। क्या पहले ये रंग-बिरंगी पतंगें कभी खून बहाती थीं? पतंगबाजी तो तुम्हारे हाथ का हुनर थी, फिर इस हुनर को छोड़ चाकू की धार से भी ज्यादा घातक व गहरी डोर कैसे थाम ली। हाथ नहीं कांपते तुम्हारे इस डोर से शौक पूरा करते?
इसी हत्यारी डोर से मासूम गुलशन की महीनेभर पहले गई जान से भी तुम नहीं डरे, न पसीजे जो फिर से एक हत्या कर दी इंदौर में। दो घायल हैं, जिनमें एक गंभीर है। ईश्वर गंभीर घायल की रक्षा करें, लेकिन उन्हें बिल्कुल न बख्शें, जो सब कुछ जानते हुए इस मौत की डोर से नाता जोड़े हुए हैं।
सड़क पर कल काल के गाल में असमय समा गए रघुवीरसिंह की जगह कोई तुम्हारा अपना भी तो हो सकता था न? किस्मत से अगर कल नहीं था तो क्या ग्यारंटी की भविष्य में भी आपका अपना कोई चपेट में नहीं आएगा?
ध्यन रखना... जिस मौत की डोर से तुमने नाता जोड़ा है वह अपना पराया नहीं देखती?
आज उनकी, तो कल तुम्हारी रोने की बारी है। भूलना मत, मौत के मांझे की किसी से भी रिश्तेदारी नहीं है। कोई तुम्हारा अपना जब इसकी चपेट में आएगा तब जाकर अहसास होगा क्या? ये अच्छे से जान लो, भले ही गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज हो रहा है, लेकिन कहलाओगे हत्यारे ही।
मौत के मांझे से एक और मौत ने पुलिस प्रशासन की अब तक की मेहनत पर फिर एक बार पानी फेर दिया। कलेक्टर व पुलिस कमिश्नर के वक्त रहते आगाह करने के कारण इस बार सरकारी सख्त नजर आ रही थी। पुलिस की मेहनत ने इस बार बाजार से तो एक तरह से चाइना का मांझा बिकना दुष्कर कर दिया था। पुलिसिया सख्ती ने मौत के इस कारोबार से जुड़े लोगों में भी भय व धमक व्याप्त कर दी थी। दुकानदारों ने तो साथ दे दिया, लेकिन खरीदार मान नहीं रहे।
मौत की डोर के व्यापारियों की गिरफ्तारी से लेकर जिलाबदर तक की हुई सख्त कार्रवाई ने इस जानलेवा धंधे की एक तरह से कमर तोड़ दी थी। रही सही कसर रोज चाइना मांझे के साथ गिरफ्तारी ने पूरी कर दी थी। पुलिस इस बार जमकर पसीना बहा रही थी।
सड़क पर वह जनजागरूकता रैलियां निकाल रही है तो आसमान पर ड्रोन से निगरानी तक कर रही थी। बावजूद हत्यारे पतंगबाज बाज नहीं आ रहे। कल कनाड़िया क्षेत्र में हुई मौत ने एक बार फिर पुलिस प्रशासन के साथ शहर को झकझोर दिया।
अब वक्त आ गया है कि चाइना के मांझे से पतंगबाजी का शौक पूरा करने वालों थ कोई ढिलाई न बरती जाए। पूरी कोशिश ये की जाए कि उन चेहरों की पड़ताल हो जिन्होंने रविवार को एक शख्स की जान ले ली और दो को गंभीर घायल कर दिया।
जब तक ऐसे तत्वों को तोड़ा न जाएगा, बेशर्म पतंगबाज बाज नहीं आएंगे। अब समय छत पर चढ़ जाने का आ गया है। खासकर पुराने इंदौर के मल्हारगंज, जिंसी, सदर बाजार व पूर्वी क्षेत्र के खजराना, आजाद नगर वाले हिस्से में। पतंगबाजी से जुड़े इन क्षेत्रों में पुलिस की सख्ती को अब भी मजाक में ही लिया जा रहा है।
अन्यथा यूं जान नहीं जाती। मल्हारगंज की छतों से आज भी चाइना डोर का इस्तेमाल हो रहा है। दुकानों पर तो ये मांझा नदारद है, लेकिन बताते हैं कि इसकी ब्लैक मार्केटिंग हो रही है। जब तक मौत की डोर से जुड़े तत्वों को कड़ा सबक सिखाया नहीं जाएगा, लोग बाज नही आएंगे। अब मकर सक्रांति का त्योहार मुहाने पर आ गया है और पुलिस को अब ज्यादा चौकन्ना होने की जरूरत है।
चाइनीज मांझे से फिर एक मौत
अब प्रण हम इंदौरवासियों को ही लेना होगा, ताकि फिर किसी की जान न जाए
आदरणीय इंदौरवासियो!
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि चाइनीज मांझा कैसे हमारे शहर में जानलेवा साबित होता जा रहा है। रविवार को इससे एक और जान चली गई। क्या हम इंदौरी इस चाइनीज मांझे से मुक्ति नहीं पा सकते। हम तो वह इंदौरी हैं, जो ठान लेते हैं तो फिर असंभव को भी संभव बनाकर ही मानते हैं।
हमारी इसी जिद ने हमें आठ बार लगातार सफाई में नंबर वन का तमगा दिलवाया है और यह केवल प्रशासनिक इच्छाशक्ति से संभव नहीं हुआ, बल्कि संभव हुआ है हम इंदौरवासियों की इच्छाशक्ति से। अगर हम अपनी आदतें नहीं सुधारते तो किसी भी हालत में यह तमगा पाना आसान नहीं था।
ठीक इसी तरह की एक अपील चाइनीज मांझे के मामले में भी आप सभी से करता हूं कि आओ, हम सभी इंदौरवासी मिलकर आज और अभी यह शपथ लें कि चाहे जो हो जाए, हम स्वयं या अपने परिचितों व बच्चों या अपने से बड़ों को किसी भी हाल में चाइनीज मांझे से पतंग नहीं उड़ाने देंगे।
हम आज और अभी से चाइनीज मांझे का उपयोग तो बंद कर ही देंगे, साथ ही उसे तुरंत आग के हवाले कर देंगे, ताकि गलती की कोई गुंजाइश ही नहीं बचे।
सिर्फ इतना ही नहीं, हम सभी शपथ लें कि अपनी गली, कॉलोनी और मोहल्ले में भी सभी के घर-घर जाकर बच्चों से बुजुर्गों तक को समझाकर उनके घर में उपलब्ध चाइनीज मांझा तुरंत मौके पर ही जलाकर नष्ट करने का आग्रह करेंगे और इसके लिए उन्हें मनाने का हरसंभव प्रयास करेंगे।
पुलिस प्रशासन की भी यही अपील है कि अगर कहीं से चाइनीज मांझा जब्त करें तो वीडियोग्राफी कर सबूत जुटा लीजिए, किंतु जब्त चाइनीज मांझे को मौके पर ही नष्ट कर दीजिए, ताकि किसी के मन में किसी भी तरह की शंका-कुशंका न रहे।
इंदौरवासियों के साथ ही यह अपील उन सभी पतंग और डोर बेचने वाले दुकानदारों से भी है कि कुछ रुपयों के मुनाफे का लालच छोड़ जानलेवा इस मांझे को बेचना बंद करने के साथ ही बड़ा दिल करते हुए अपने पास यदि चाइनीज मांझा हो तो उसे जलाकर नष्ट कर दें।
अगर हम सभी ठान लेंगे तो चाइनीज मांझे का नामो-निशान खत्म हो जाएगा। हमें दृढ़तापूर्वक यह शपथ लेना होगी और लोगों की गालियां सुनते हुए भी उन्हें मनाना होगा। माना कि यह संभव नहीं है, किंतु हम इंदौरी हर बार वही कार्य करते हैं, जो असंभव होता है और इस असंभव कार्य को भी हम सभी को एकजुट होकर संभव बनाना होगा।
अगर हम इसमें सफल हो जाते हैं, तो हमारी देखादेखी ऐसी ही मुहिम पूरे देशवासी शुरू कर दें और उसके लिए हर बार की तरह अग्रणी इंदौर ही कहलाएगा। जैसा कि सफाई के लिए आज देशभर के साथ ही दुनिया के अनेक देशों में कहलाने लगा है।
एक और बात... हालांकि पुलिस प्रशासन चाइनीज डोर के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, किंतु पुलिस प्रशासन भी छत, घर या दुकान पर तो निगरानी नहीं कर सकता। यह जिम्मेदारी तो हम सभी शहरवासियों की भी बनती है। इसलिए शपथ लें कि हम इंदौरवासी इस असंभव कार्य को संभव बनाकर ही छोड़ेंगे।- अरुण अग्रवाल
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