कलेक्टर-कमिश्नर व्यवस्थापक: फिर भी मंदिरों की सरकारी जमीन पर कब्जा; प्रशासनिक चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

दान की भूमि और देवस्थान की संपत्तियों पर बसती जा रही अवैध कॉलोनियां
अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सरकारी तंत्र की जवाबदेही एक बार फिर कटघरे में है। खुलासा फर्स्ट द्वारा सामने लाए गए तथ्यों ने यह खुलासा कर दिया है कि इंदौर जिले में न सिर्फ सरकारी जमीन, बल्कि सैकड़ों साल पुरानी देवस्थान, मंदिरों, तालाबों और ग्रीन बेल्ट की जमीन भी भूमाफियाओं के कब्जे में जा चुकी हैं।
शिकायतों के बावजूद वर्षों से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना यह दर्शाता है कि यह जमीन घोटाला नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का एक संगठित और संरक्षित मॉडल बन चुका है।
सरकारी ग्रीन बेल्ट, देवस्थान की सैकड़ों साल पुरानी भूमि, तालाबों और मंदिरों की जमीन पर अवैध कॉलोनियां, हजारों फर्जी रजिस्ट्रियां, करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान और वर्षों से लंबित शिकायतें इशारा करते हैं कि प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता ने भूमाफियाओं को खुली छूट दे रखी है।
चौंकाने वाला तथ्य यह कि कलेक्टर के नाम दर्ज सरकारी जमीन पर भी सैकड़ों अवैध कॉलोनियां काट दी गईं, भूखंडों की खुलेआम खरीदी-बिक्री हुई और यह खेल आज भी बदस्तूर जारी है। मुद्दा यह नहीं कि भूमाफिया सक्रिय हैं, बल्कि सवाल यह है कि जिम्मेदार प्रशासन इस ओर आंखें मूंदकर क्यों बैठा है?
40 मंदिरों की जमीन पर कब्जा
जिले में 40 सरकारी मंदिरों की जमीन पर कब्जा हो चुका है। इनमें तहसील मल्हारगंज में 19, जूनी इंदौर में 11, बिचौली हप्सी में 4, हातोद और देपालपुर में 2-2 तथा सांवेर और राऊ में 1-1 मंदिर शामिल हैं। इनमें से 17 मंदिरों पर कलेक्टर, 1 पर कमिश्नर और 1 पर अपर कलेक्टर व्यवस्थापक नियुक्त हैं।
कुछ मंदिरों पर पुजारी नियुक्त हैं, जबकि कई पर नहीं। इसके बावजूद इनकी जमीन पर अवैध रूप से मेडिकल कॉलेज, कॉलोनियां, गोशालाएं, महाविद्यालय, गोदाम, मिल, पेट्रोल पंप, बैंक, गार्डन, धर्मशालाएं, कारखाने, पानी की टंकियां, बस डिपो, अहिल्या वन, आईडीए की योजनाएं और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। अतिक्रमण हटाने की दिशा में प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा, जिससे भूमाफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
हिंदुत्व का ढिंढोरा केवल दिखावा
भाजपा जहां एक ओर हिंदुत्व की बात करती है, वहीं इंदौर जिले में मंदिरों की जमीन कब्जे से मुक्त कराने में कोई गंभीर रुचि नहीं ले रही। इससे उसकी कथनी और करनी के बीच का अंतर साफ नजर आता है।
मंदिरवार अतिक्रमण की भयावह तस्वीर
कबीरखेड़ी खेड़ापति हनुमान मंदिर (सर्वे 48 रकबा 0.138 हे. और सर्वे 49 रकबा 1.125 हे.) की जमीन पर आईडीए की स्कीम के तहत प्लॉट काट दिए गए। भमोरी दुबे खेड़ापति हनुमान मंदिर के खसरा 24/1 (0.907 हे.) और 25/1 (0.388 हे.) पर अवैध मकान बने हुए हैं।
भोंरासला के श्री बैजनाथ मंदिर (खसरा 13/1, कुल 2.680 हे.) में से 0.800 हे. भूमि पर अरबिंदो मेडिकल कॉलेज की पार्किंग और गुमटियां बनी हुई हैं। भोंरासला स्थित श्रीराम मंदिर (सर्वे नंबर 17/1, 27, 114, 151) की आधी से अधिक जमीन पर मकान खड़े हो चुके हैं।
नरवल स्थित श्री महादेव मंदिर (2.914 हे.) और श्री राम मंदिर (1.137 हे.) की जमीन पर रिहायशी भवनों का अतिक्रमण है। छोटा बांगड़दा के श्री राम मंदिर (सर्वे नंबर 342/1, 342/2, रकबा 5.115 हे.) में से 4.300 हे. पर अवैध कॉलोनी काट दी गई, शेष पर खेती और एमआर-5 का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है।
सुल्काखेड़ी में श्री गोवर्धननाथ मंदिर (6.481 हे.) पर महेश नगर बस चुका है, जबकि श्री रणछोड़ मंदिर (8.737 हे.) की जमीन पर गोशाला, क्लॉथ मार्केट कन्या महाविद्यालय, गोदाम और आवासीय मकान बने हैं। सिरपुर क्षेत्र के सात मंदिरों में से श्री इनामदेव स्थान महादेव मंदिर (2.248 हे.) पर गंगा कॉलोनी, श्री खेड़ापति और श्री मारुति मंदिर (3.387 हे.) पर मारुति पैलेस कॉलोनी बसाई गई।
धार रोड स्थित श्री लाबरिया भैरू मंदिर (0.676 हे.) के पीछे पेट्रोल पंप, बैंक और गार्डन संचालित हैं। इसी तरह श्री कृष्ण मंदिर, श्री राम मंदिर, श्री मुरली मनोहर मंदिर, श्री मारुति मंदिर, श्री गणपति मंदिर, श्री कनकेश्वर महादेव मंदिर सहित दर्जनों मंदिरों की जमीन पर अवैध बस्तियां, कॉलोनियां और व्यावसायिक निर्माण खड़े हैं।
हातोद, देपालपुर, सांवेर और राऊ तहसीलों में भी मंदिरों की जमीन पर खेती, मकान, पंचायत भवन और अन्य निर्माण कर खुलेआम कब्जा किया गया है।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल: सवाल साफ है- जब 40 सरकारी मंदिरों के लिए कलेक्टर और कमिश्नर तक व्यवस्थापक नियुक्त हैं, फिर भी इनकी जमीन सुरक्षित नहीं तो आखिर जिम्मेदारी किसकी है?
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