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स्वच्छ शहर का दूषित पानी कांड: बद्रीप्रसाद का शव सड़क पर रख बोले परिजन; हमें न्याय चाहिए कोरे आश्वासन नहीं

Khulasa First

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संवाददाता

25 जनवरी 2026, 5:51 pm
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स्वच्छ शहर का दूषित पानी कांड

भागीरथपुरा जल त्रासदी : दूषित पानी से हो रही मौतों पर प्रशासन मौन पार्षद के खिलाफ फूटा गुस्सा, चक्काजाम के बाद जागी सरकार

दूषित पेयजल से मौतें सरकार की आपराधिक लापरवाही

इंदौर के माथे पर भागीरथपुरा का कलंक

डॉ. हसानी की हठधर्मिता ने सरकार की साख पर पोती कालिख

प्रभावित चंदर मार्ग क्षेत्र के 16 पानी के नमूनों की रिपोर्ट नॉर्मल

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा के निवासियों और शोकाकुल परिजन का गुस्सा कल उस समय फूट पड़ा जब दूषित जल के कारण हुई एक और मौत के बाद भी प्रशासन का कोई नुमाइंदा सुध लेने नहीं पहुंचा। आक्रोशित परिजन ने भागीरथपुरा पुल पर बद्रीप्रसाद का शव रखकर चक्काजाम कर दिया।

करीब दो घंटे चले इस विरोध प्रदर्शन ने न केवल यातायात व्यवस्था को ठप किया, बल्कि शहर के स्वास्थ्य ढांचे और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। भागीरथपुरा निवासी मृतक बद्रीप्रसाद के परिजन का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है, जिससे लोग बीमार पड़ रहे हैं।

बद्रीप्रसाद के बेटे शैलेंद्र ने रुंधे गले से बताया कि मेरे पिता पूरी तरह स्वस्थ थे, लेकिन दूषित जल के सेवन से उनकी तबीयत बिगड़ी। उन्हें 6 जनवरी को संजीवनी आरोग्य केंद्र से एमवाय अस्पताल और बाद में अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया, जहां 23 जनवरी को उन्होंने दम तोड़ दिया।

विडंबना यह है कि दो महीने पहले शैलेंद्र की पत्नी कंचन की भी इसी तरह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी, लेकिन तब भी प्रशासन ने कोई संज्ञान नहीं लिया। आज स्थिति यह है कि इस गरीब परिवार के पास अंतिम संस्कार तक के लिए पैसे नहीं बचे हैं।

पार्षद के खिलाफ की नारेबाजी, मुर्दाबाद के नारे लगाए...प्रदर्शन के दौरान स्थानीय भाजपा पार्षद कमल वाघेला के प्रति जनता में भारी असंतोष देखा गया। प्रदर्शनकारियों ने कमल वाघेला चोर है और जो शुद्ध जल दे न सके वो सरकार निकम्मी है…जैसे नारे लगाए।

रहवासियों का आरोप है कि पार्षद और नगर निगम प्रशासन धर्म की राजनीति में उलझे हैं, जबकि जनता बुनियादी सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रही है। दो घंटे तक चले हंगामे के कारण क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी रही और पुल के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

कांग्रेस ने घेरा, प्रशासन के हाथ-पांव फूले... मौके की गंभीरता को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे, पार्षद राजू भदौरिया, रानू मलोरिया, दीपू यादव सहित कई कांग्रेस नेता पीड़ित परिवार के समर्थन में धरने पर बैठ गए। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह मौत नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र द्वारा की गई हत्या है।

स्थिति बिगड़ती देख एसडीएम निधि वर्मा, नगर निगम अपर आयुक्त नरेंद्र पांडे और एसीपी विनोद दीक्षित सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि बद्रीप्रसाद और कंचन की मौत की जांच सीएमएचओ की रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी और शासन स्तर पर आर्थिक मदद दिलाई जाएगी।

मंत्री विजयवर्गीय के हस्तक्षेप के बाद थमा विरोध... मामले की गंभीरता को देखते हुए कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने व्यक्तिगत हस्तक्षेप किया और भाजपा मंडल अध्यक्ष चंदन सिंह बैस के माध्यम से पीड़ित परिवार तक तात्कालिक आर्थिक सहायता पहुंचाई।

प्रशासन के आश्वासन और सहायता मिलने के बाद ही परिजन ने चक्काजाम समाप्त करने पर सहमति दी। हालांकि, रहवासियों का कहना है कि यदि क्षेत्र में दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा बोले-मौतों को नकारना और सच दबाना भाजपा का अमानवीय चेहरा
पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा है कि भागीरथपुरा सहित इंदौर के प्रभावित क्षेत्रों में दूषित पेयजल से मौतें कोई प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि भाजपा सरकार की राजनीतिक संवेदनहीनता और प्रशासनिक नाकामी का सीधा परिणाम है। सरकार एक ओर जनता को जहर मिला पानी पिलाती है और दूसरी ओर डायरिया से हुई मौतों को नकारने, आंकड़े छुपाने और जिम्मेदारी से भागने में जुटी है।

यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मानव जीवन के साथ खुला अपराध है। सरकार सच को दबाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर डॉक्टरों पर झूठी रिपोर्ट बनाने का दबाव बना रही है।

उन्होंने कहा कि जब अखबारों में मौतों की पुष्टि हो रही है, अस्पतालों में मरीज भर्ती हैं, तब भी भाजपा सरकार का यह कहना कि दूषित पानी से मौत नहीं हुई सच पर पर्दा डालने की बेशर्म कोशिश है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव से पूछा की भाजपा शासन में दो लाख का मुआवजा या इंसानी जान की नीलामी हो रही है ?

पूर्व मंत्री ने मुआवजे की घोषणा पर तीखा सवाल खड़ा करते हुए कहा— सरकारी लापरवाही से हुई मौत पर भाजपा सरकार ने इंसानी जान की कीमत सिर्फ दो लाख रुपए लगा दी है। भागीरथपुरा में चार बच्चियों के पिता की मौत हो गई, परिवार पूरी तरह बेसहारा हो गया और सरकार समझती है कि 2 लाख में सब खत्म?

भाजपा सरकार के लिए जनता की जान सबसे सस्ती... वाहन दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को 25 से 50 लाख मुआवजा मिलता है ,उन्होंने कहा कि यही सरकार बेलेश्वर बावड़ी हादसे में 7 लाख,बड़ा गणपति ट्रक हादसे में 5 लाख का मुआवजा देती है,लेकिन अपनी भ्रष्ट, लचर और निकम्मी व्यवस्था से हुई मौतों पर सिर्फ 2 लाख।

यह साफ दिखाता है कि भाजपा सरकार के लिए जनता की जान सबसे सस्ती है। दोष पानी का नहीं, सरकार का है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते पाइपलाइन लीकेज ठीक किए जाते, जल की जांच होती, प्रशासन जागता तो 27 घरों के चूल्हे आज न बुझते। उन्होंने मांग की कि दूषित पेयजल से हुई सभी मौतों की न्यायिक जांच हो।

जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। मृतकों के परिजन को कम से कम एक करोड़ रुपए मुआवजा दिया जाए। प्रभावित क्षेत्र में शुद्ध जल की स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था तुरंत की जाए।

सिस्टम के जहर ने ली एक और सांस, मौत का आंकड़ा हुआ 28
इंदौर के दामन पर भागीरथपुरा की त्रासदी ने ऐसा गहरा दाग लगा दिया है, जिसे धो पाना अब मुमकिन नहीं है। जिस शहर को हम स्मार्ट कहते नहीं थकते, उसी शहर के एक हिस्से में सरकारी नलों से अमृत नहीं बल्कि यमराज की कालिख उतर रही है।

रविवार सुबह सेवानिवृत्त शिक्षक राजाराम बौरासी की मौत ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि प्रशासन के उन तमाम सफेद झूठ का भी खुलासा हो गया, जिनके पीछे अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश की जा रही थी।

राजाराम बौरासी की मौत के साथ ही इस दूषित जल कांड में होने वाली मौतों का अनौपचारिक आंकड़ा अब 28 तक जा पहुंचा है, लेकिन शर्मनाक पहलू यह है कि जिम्मेदार अधिकारी अब भी मौतों और दूषित पानी के बीच संबंध खोजने का कुतर्क गढ़ रहे हैं।

बौरासी को शनिवार को गंभीर हालत में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनके दिल ने महज 20 प्रतिशत काम करना शुरू कर दिया था। डॉक्टरों ने निमोनिया और हृदय संबंधी गंभीर विकृतियों की पुष्टि की थी, जिसका सीधा संबंध उस जहरीले पानी से है जो पिछले कई दिनों से भागीरथपुरा की रगों में घोला जा रहा है।

विडंबना देखिए कि जब पीड़ित का बेटा, जो स्वयं मीडिया जगत का हिस्सा है, कलेक्टर से लेकर तमाम आला अधिकारियों को स्थिति की भयावहता से अवगत करा रहा था, तब प्रशासन अपनी छवि चमकाने और आंकड़ों की बाजीगरी में व्यस्त था। कल तक जो तंत्र दूषित पानी की बात को सिरे से खारिज कर पूरी बेशर्मी के साथ सब ठीक है का राग अलाप रहा था, आज उसकी चुप्पी चीख-चीखकर अपनी विफलता स्वीकार कर रही है।

क्या प्रशासन यह बताएगा कि आयुष्मान कार्ड से इलाज होना क्या किसी की जान की भरपाई कर सकता है? क्या फाइलों में बंद जांच रिपोर्ट उन मासूमों और बुजुर्गों को वापस ला पाएगी जो नगर निगम की पाइपलाइनों में दौड़ते भ्रष्टाचार और लापरवाही के शिकार हो गए?

भागीरथपुरा आज एक मोहल्ला नहीं, बल्कि सिस्टम द्वारा किया गया नरसंहार स्थल बन चुका है। वहां की हवाओं में मातम है और नलों में मौत का रिसाव जारी है, लेकिन सत्ता के गलियारों में बैठे नुमाइंदों की संवेदनहीनता खत्म होने का नाम नहीं ले रही।

शहर के माथे पर लगे इन 28 बलिदानों का हिसाब आखिर कौन देगा? क्या जनता की जान इतनी सस्ती है कि उसे कागजी स्पष्टीकरणों और झूठे आश्वासनों की भेंट चढ़ा दिया जाए? यह त्रासदी दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र द्वारा की गई वह हत्या है जिसमें हथियार दूषित पानी है और कातिल नगर निगम की लापरवाही।

बद्रीप्रसाद की मौत पर सफेद झूठ का पर्दा
भागीरथपुरा में बद्रीप्रसाद की मौत ने प्रशासन के संवेदनहीन चेहरे का खुलासा कर दिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने अपनी कुर्सी और सरकारी फाइलों को बचाने के लिए मृतक की बीमारी को जलजनित मानने से साफ इनकार कर दिया, जिसे क्षेत्र की जनता डॉक्टर की तानाशाही और मुआवजे की राशि हड़पने की साजिश मान रही है।

डॉ. हसानी ने तमाम चिकित्सकीय तथ्यों को दरकिनार कर पुरानी बीमारियों का राग अलापते हुए मीडिया की खबरों को भ्रामक करार दिया, जो सीधे तौर पर पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। डॉक्टर की इस हठधर्मिता और लीपापोती से आक्रोशित जनता ने जब शव सड़क पर रखकर चक्काजाम किया, तो भाजपा सरकार की छवि पर गहरा दाग लग गया।

प्रशासन की इस नृशंस जिद ने यह साबित कर दिया है कि उसे आम आदमी की जान से ज्यादा अपने आंकड़ों की बाजीगरी प्यारी है। जलजनित बीमारी के सच को दबाने की यह कोशिश न केवल अमानवीय है, बल्कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी की घोर विफलता है, जिसने पूरी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

भागीरथपुरा के नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए धरना-प्रदर्शन 31 को
नगर निगम की लापरवाही से भागीरथपुरा में अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि प्रशासन मौत के आंकड़ों को छिपाने में जुट गया है। इसके चलते भागीरथपुरा के नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए कांग्रेस 31 जनवरी को धरना देकर प्रदर्शन करेगी। कांग्रेसियों की मांग है कि इस घटना के लिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री व महापौर इस्तीफा दें और इस घटना के दोषियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए।

शहर कांग्रेस अध्यक्ष एवं निगम के नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे और जिला कांग्रेस के अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने कहा है कि भागीरथपुरा में लापरवाही कर नगर निगम ने अपराध किया है। इस लापरवाही के कारण अब तक 28 लोगों की मौत हो गई है।

डॉक्टर्स की टीम कर रही मरीजों की मॉनिटरिंग, शनिवार को टैंकर से पहुंचा पानी
महू पत्तीबाजार क्षेत्र अंतर्गत आने वाले चंदर मार्ग व उससे जुड़ी सुरखी व नीम गली से लिए गए पानी के 16 सैंपलो की जांच रिपोर्ट शनिवार दोपहर नार्मल आई। इस खबर के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि शनिवार को रेड़क्रास हॉस्पिटल में दो नए बच्चे पीलिया की शिकायत पर भर्ती हुए हैं।

इनमें शुभ कश्यप (8) निवासी यादव मोहल्ला और वसाक करेशी (12) निवासी नीम गली शामिल है। जबकि राहत की बात भी है कि पूर्व से इसी हॉस्पिटल में भर्ती दिव्या, पार्थ और यर्थात को शनिवार डिसचार्ज कर दिया। फिलहाल तीन हॉस्पिटल में कुल 7 बच्चे और एक उपचाररत है।

ये है अस्पतालों में भर्ती
शुभ कश्यप (8), वसाक कुरैशी (12) रेडक्रास हॉस्पिटल में भर्ती है, वहीं मयंक (14) और कुणाल चरवे (13), पूर्वींश अरुण वर्मा (9) व रुद्र संदल एएमएनएच हॉस्पिटल भर्ती है, जबकि भूमिका स्वामी (19) और गावेन्द्र नागराज (37) मेवाड़ा हॉस्पिटल में भर्ती है।

पूर्व में भर्ती हुए तीन बच्चों को शनिवार को रेड क्रॉस हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया गया। शनिवार प्रभावित चंदर मार्ग सहित सुरखी व नीम गली में महू कैंट बोर्ड की टीम ने स्वास्थ्य अधीक्षक मनीष अग्रवाल के मार्गदर्शन में विशेष सफाई अभियान शुरू किया।

इस दौरान पूरे क्षेत्र की तंग नालियों की सफाई की गई। नीम गली में पानी की टंकी के नीचे से हो रहे पानी रिसाव को दुरुस्त किया गया। यही एक स्थान पर नालियों की गाद में दबी पाइप लाइन को बाहर निकाल कर जरूरी हिस्से में नए पाइप डाले गए।

15 टीम लगातार कर रही सर्वे
बीएमओ योगेश सिंघारे के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग की 10 टीमें प्रभावित क्षेत्र के लगभग 250 परिवारों के बीच शनिवार को भी पहुंची। लोगों से पुनः स्वास्थ्य की जानकारी जुटाई, नई सूची तैयार की गई। सर्दी जुकाम सहित अन्य लक्षण वाले मरीजों से स्वास्थ्य संबंधी चर्चा की।

जरूरी दवाओं का वितरण कर पानी को उबालकर उपयोग में लेने की हिदायत दी गई। वहीं डॉक्टर्स की टीम भी पूर्व में चिन्हित किए गए मरीजों की सेहत की मॉनिटरिंग कर रही है।

रीना बौरासी पहुंची प्रभावित क्षेत्र में... शनिवार को महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी चंदर मार्ग पहुंची। इस दौरान उनके साथ कई स्थानीय कांग्रेस नेता एवं पूर्व पार्षद शामिल थे।

बोरासी ने यहां के कई परिवारों के बीच पहुंचकर स्वास्थ्य सहित व्यवस्थाओं की जानकारी ली। कांग्रेस बौरासी के साथ हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों से मिलने भी पहुंचे है। लेकिन अब तक कांग्रेसियों को क्षेत्रीय कमजोरी की नब्ज नहीं मिली है।

भागीरथपुरा जैसे हालात महू में भी हो रहे... पत्ती बाज़ार क्षेत्र में गंदा पानी पीने से 19 मासूम बच्चों सहित 25 लोग बीमार यह हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर लापरवाही है। भागीरथपुरा के बाद भी न सिस्टम सुधरा, न जिम्मेदारी तय हुई।

ऐसे ही स्थिती महूगाँव नगर परिषद में हो रही है। यह जानकारी युवा नेता गौरव सिंह सोलंकी ने कहा कि पार्षद प्रतिनिधि एव नगर परिषद महूगाँव हमारा परिवार है इस नाते युवा नेता ने तुरंत पहल की और महिला प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी सेतिया, जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे, पूर्व जिला अध्यक्ष सदाशिव यादव के साथ महूगाँव नगर परिषद क्षेत्र में जगह-जगह कुए, बोरिंग और नलों की जांच की, लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को स्पष्ट रूप से अवगत कराया कि समस्या का समय रहते समाधान होना चाहिए।

यह मुद्दा राजनीति का नहीं, हमारे बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य का सवाल है। अगर लापरवाही जारी रही, तो जनता के साथ मिलकर मैं अपने पूरे कांग्रेस परिवार के साथ मजबूती से अपनी बात रखेंगे और जरूरत पड़ी तो उग्र आंदोलन भी करेंगे। इस दौरान जीतू ठाकुर, शक्ति गोयल, पप्पू खान, आनंद गोगलिया, हीराराम चौहान, संतोष सक्सेना, आलोक दीक्षित, प्रवीण पाटिल, आशीष वर्मा व वरिष्ठ कांग्रेस एवं युवा साथीगण उपस्थित रहे।

राहत की बात यह है कि सात नर्मदा लाइन और नौ बोरवेल लाइन के लिए गए सैंपल की रिपोर्ट नॉर्मल आई है। फिर भी हम क्षेत्र में ऐहतियात बरत रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार घर-घर पहुंचकर सर्वे का कार्य कर रही है। विभाग भी स्थितियों पर नजर बनाए हुए है। - राकेश परमार, एसडीएम महू

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