मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा: 24 रूटों पर 96 बसों का संचालन शुरू; 46 नए इंटरसिटी रूट जुड़ेंगे
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत शनिवार से इंदौर में इंटरसिटी और इंट्रासिटी बस सेवा का विस्तार शुरू हो गया। पहले दिन इंदौर से अलग-अलग शहरों के लिए 24 रूटों पर 96 बसें रवाना हुईं।
इन बसों में करीब 10.5 हजार यात्रियों ने सफर किया। शुरुआती चरण में ऐसे कई मार्ग शामिल हैं, जिन पर पहले से बसों का संचालन हो रहा था। अब इन रूटों को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के एकीकृत नेटवर्क में शामिल किया गया है।
भोपाल से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत के बाद अब इंदौर में भी इसका संचालन शुरू किया गया है। आने वाले दिनों में मौजूदा रूटों पर इलेक्ट्रिक बसें उतारने के साथ नए मार्गों को नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके लिए परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
पुराने रूट भी मुख्यमंत्री सुगम सेवा में शामिल
एआईसीटीसीएल की ओर से पहले से संचालित बसों के सिस्टम को अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत संचालित किया जा रहा है। पुराने और नए रूटों को आपस में जोड़कर बस नेटवर्क का विस्तार करने की योजना है।
करीब 180 बसों पर मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा की ब्रांडिंग की गई है। ये बसें अलग-अलग मार्गों पर संचालित हो रही हैं। योजना का उद्देश्य इंदौर सहित आसपास के क्षेत्रों और दूसरे शहरों के बीच सार्वजनिक परिवहन की कनेक्टिविटी को बेहतर करना है।
पहले दिन इंदौर से धार, अशोकनगर, खंडवा, बुरहानपुर, नीमच, मंदसौर, उज्जैन, सागर, मुलताई और भोपाल सहित अन्य शहरों के लिए बसें रवाना हुईं।
46 नए इंटरसिटी रूट जोड़ने की तैयारी
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अगले चरण में 46 नए इंटरसिटी रूट जोड़े जाने की योजना है। इन मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी की जा रही है। बसों का संचालन पीपीपी मॉडल के माध्यम से किए जाने का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित नेटवर्क में बड़वानी-खंडवा, खंडवा-खरगोन, खरगोन-धार और ओंकारेश्वर-बुरहानपुर सहित कई प्रमुख मार्ग शामिल हैं। इन रूटों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।
सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक परिवहन को बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना है, ताकि गांवों और छोटे कस्बों से शहरों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को नियमित बस सुविधा मिल सके।
55 जिलों में हुआ रूट सर्वे
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए प्रदेशभर में रूट सर्वे कराया गया है। सर्वे के दौरान 55 जिलों में 150 शहरी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट रूट चिह्नित किए गए हैं।
इन रूटों के आधार पर आने वाले चरणों में बस नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। योजना के तहत प्रदेश के अधिक से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों को सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
इंदौर को बनाया गया संभागीय मुख्यालय
सुगम परिवहन सेवा के संचालन में इंदौर की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। इंदौर को संभागीय मुख्यालय बनाया गया है। यहां से संभाग स्तर पर बसों के संचालन, रूट और परिवहन व्यवस्था की निगरानी की जाएगी। इस व्यवस्था के जरिए अलग-अलग शहरों और कस्बों के बीच बस नेटवर्क को एकीकृत करने की कोशिश की जाएगी।
शहर में 32 रूटों पर 301 बसें
इंदौर शहर में भी इंट्रासिटी बस सेवा का विस्तार किया जा रहा है। फिलहाल 32 रूटों पर 301 बसें संचालित हो रही हैं। शनिवार को इन बसों से करीब एक लाख यात्रियों के सफर करने की जानकारी सामने आई।
शहर में जोड़े गए नए रूटों में सेमलिया चाऊ-रंगवासा, नायता-मुंडला-अरविंदो, बेस्ट प्राइस-चोइथराम नेत्रालय, नायता-मुंडला-आईएसबीटी कुमेड़ी और बेस्ट प्राइस-महू नाका शामिल हैं।
इन रूटों के जरिए शहर के अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़ने और यात्रियों को प्रमुख क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी देने पर जोर दिया जा रहा है।
ऑनलाइन होगी बसों की बुकिंग और निगरानी
सुगम परिवहन सेवा के तहत बसों की बुकिंग और निगरानी के लिए सिंगल विंडो सिस्टम विकसित किया जाएगा। बसों की गतिविधियों की निगरानी के लिए इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) का उपयोग किया जाएगा।
इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIl) और उसकी सात सहायक कंपनियों में कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बसों की लोकेशन, संचालन, समयबद्धता और अन्य गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी की जाएगी।
ग्रामीण इलाकों तक बस सेवा पहुंचाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुगम बस परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा की शुरुआत पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने संकल्प पत्र में बस सेवा शुरू करने का वादा किया था, जिसे अब पूरा किया गया है।
सरकार की योजना आने वाले चरणों में नए रूट और इलेक्ट्रिक बसें जोड़कर सार्वजनिक परिवहन के नेटवर्क का विस्तार करने की है, जिससे शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों को भी बेहतर बस कनेक्टिविटी मिल सके।
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