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चौकसे का षड्‌यंत्र फेल, एमओयू वैध नहीं: लेक पार्क कॉलोनी को-ऑपरेटिव सोसायटी के प्लॉटों का मामला

KHULASA FIRST

संवाददाता

07 फ़रवरी 2026, 12:08 अपराह्न
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चौकसे का षड्‌यंत्र फेल, एमओयू वैध नहीं

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बहुचर्चित लेक पार्क कॉलोनी को-ऑपरेटिव सोसायटी में सदस्यों के प्लॉट अध्यक्ष यशराज तिवारी द्वारा बेचने और संस्था के 100 प्लॉट खरीदने को लेकर किए गए एमओयू को सहकारिता विभाग ने जांच में झूठा पाया है।

इस रिपोर्ट से संस्था पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे भूमाफिया और षड्‌यंत्रकारी महेंद्र चौकसे के मंसूबे धरे रह गए। विभाग ने जांच में एमओयू को ही अवैध करार दे दिया। मामले में तिवारी का कहना है कि एमओयू उनकी गर्दन पर पिस्तौल रखकर चौकसे और उसके साथियों ने करवाया, जिसकी शिकायत उन्होंने राजेंद्र नगर थाने में दर्ज कराई है।

सोसायटी ने चोइथराम अस्पताल के पास लेक पार्क कॉलोनी विकसित की है, जिसका खसरा नंबर 248, 251/1, 253/1, 253/2, 254, 256, 257, 258/2, 259/1, 260/1 व 269/1 व कुल रकबा 8.643 हेक्टेयर है। इसके साथ ही ग्राम पीपल्याराव तहसील व जिला इंदौर की जमीन खसरा क्र. 8/4, 9 व 10 भी है, जिसका रकबा 0.774 हेक्टेयर है।

कुल मिलाकर कॉलोनी का क्षेत्रफल लगभग 23.26 एकड़ है। इस कॉलोनी में प्लॉट खरीदने वाले भूमाफिया महेंद्र चौकसे ने शिकायत दर्ज कराई कि कॉलोनी के पूर्व अध्यक्ष स्व. शैलेंद्र तिवारी के पुत्र यशराज ने 25 जुलाई 2023 को 100 प्लॉटों का अनुबंध किया था और उनके व उनकी माता माया तिवारी के अलग-अलग खातों में 80 लाख रुपए जमा कराए गए।

निजी संपत्ति के रूप में बताए प्लॉट
चौकसे का आरोप था कि दोनों ने उसे इन प्लॉटों को निजी संपत्ति के रूप में दिखाया था। चौकसे के साथ नीरज बार्गल, जिन्होंने स्वयंभू कॉलोनी की संघर्ष समिति बना ली, ने भी आरोप लगाया कि संस्था के वर्तमान अध्यक्ष यशराज और उनकी माता माया तिवारी ने स्व. शैलेंद्र तिवारी के समय के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर बिना किसी वैध अधिकार के कॉलोनी के प्लॉट गैर सदस्यों को बेचे।

बार्गल का ये भी आरोप था कि संस्था के सदस्य और संचालक अब्दुल कलीम ने भी उनका साथ दिया। लेकिन सहकारिता विभाग के तत्कालीन उपायुक्त एमएल गजभिये द्वारा अंकेक्षक जीएस परिहार, निरीक्षक संजय कुचनकर से जांच करवाई गई तो चौकसे और उनके साथियों के षड्‌यंत्र का खुलासा हो गया।

अनुबंध नहीं, एमओयू किया गया था
जांच में पाया गया कि चौकसे द्वारा तिवारी से अनुबंध नहीं, बल्कि एमओयू किया गया था, जो व्यक्तिगत था और ये संस्था पर बंधनकारी नहीं, क्योंकि न केवल ये अपंजीकृत, बल्कि जिस 24 जुलाई 2023 को ये एमओयू किया गया था, उस तारीख में यशराज तिवारी संस्था के अध्यक्ष नहीं थे।

80 लाख रुपए देने की बात झूठी
मामले में तिवारी ने कहा है कि उक्त एमओयू उन्होंने व्यक्तिगत हैसियत से किया था, जिसके बदले में चौकसे से 42 लाख रुपए का कर्ज प्राप्त किया था। इस प्रकार चौकसे द्वारा 80 लाख रुपए दिए जाने की बात पूरी तरह झूठी है। तिवारी को ये अधिकार नहीं था कि वह व्यक्तिगत कर्ज के बदले संस्था के प्लॉटों का सौदा करते।

25 जुलाई 2023 को इस एमओयू को नोटराइज्ड कराया गया और उस दिन सहकारिता विभाग के उपअंकेक्षक एमएम श्रीवास्तव संस्था के प्रशासक थे। यानी तिवारी अध्यक्ष नहीं थे, जैसा कि चौकसे दावा कर रहे हैं। तिवारी व अब्दुल कलीम सदस्य मात्र थे।

दस्तावेज में की थी यह डील
जांच रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि चौकसे जो राशि तिवारी और उनकी माता के खाते में जमा करवाना बता रहे हंै, वो किस बैंक के किस खाते में जमा कराई गई, इसकी चौकसे कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं दे सके। चौकसे ने जो अवैध एमओयू तिवारी के साथ करना बताया, उसके बाद कोई जाहिर सूचना भी प्रकाशित नहीं करवाई।

साथ ही इससे संबंधित कोई जानकारी भी अपनी शिकायत में पेश नहीं की। इसके बावजूद तिवारी ने 42.93 लाख रुपए की राशि प्राप्त होने से इनकार नहीं किया है। जांच रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि महेंद्र चौकसे, यशराज तिवारी व अब्दुल कलीम के बीच निष्पादित एमओयू में चौकसे ने स्टाम्प क्र. सीसी395508 लगायत सीसी 395517 तक 100 रुपए के कुल 10 गैर न्यायिक स्टाम्प 31 जुलाई 2023 को क्रय किए गए थे और इसमें चौकसे ने केशव पिता रामचंद्र कौल निवासी 158, अनूप नगर, नितिन पिता राधेश्याम हार्डिया निवासी 6/1, नौलखा मेनरोड, मो. नईम पिता अब्दुल करीम खान निवासी 78, नंदनवन कॉलोनी, राहुल पिता भारद्वाज पांडे निवासी 106, मंगलमूर्ति नगर खजराना, अनीश पिता अनूप पांडे निवासी 21/1, सदर बाजार के साथ रेशो डील की, वो भी अवैध है। डील के अनुसार चौकसे 50 और बाकी 10-10 प्रतिशत राशि देंगे।

डरा-धमकाकर साइन करवाए
मामले में तिवारी ने कहा है कि एमओयू पर उनके हस्ताक्षर चौकसे और उनके साथियों द्वारा डरा-धमकाकर करवाए गए। उनकी कनपटी पर पिस्तौल रखकर हस्ताक्षर करने पर मजबूर किया, जिसकी रिपोर्ट उन्होंने राजेंद्र नगर थाने में की थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

ये भी झोल है कि तिवारी ने स्टाम्प पर 12 दिसंबर 2024 को हस्ताक्षर करवाए जाने की बात कही है, जबकि इसकी खरीदी चौकसे ने 31 जुलाई 2023 को की थी। ये एमओयू भी 4 अगस्त 2023 को नोटराइज्ड करना बताया, जबकि बिना हस्ताक्षर दस्तावेज नोटराइज्ड नहीं हो सकते।

तिवारी ने ये भी बताया कि महेंद्र चौकसे व उनके साथियों ने जान से मारने की धमकी देकर रसीदों और आवंटन-पत्रों पर हस्ताक्षर कराए, जिसकी रिपोर्ट भी उन्होंने राजेंद्र नगर थाने में की थी। रिपोर्ट में कहा गया कि इन मामलों में राजेंद्र नगर पुलिस से संपर्क करने के लिए संचालक मंडल को कहा जाना उचित है।

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