एजुकेशन बोर्ड बदलने से खतरे में बच्चों का भविष्य: आरटीई के तहत शिक्षा ले रहे 40 से अधिक बच्चे अधर में
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नियमों और निजी स्कूलों की मुनाफाखोरी ने दर्जनों मासूम बच्चों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। मामला मास्टर माइंड स्कूल संपत हिल्स बिचौली मर्दाना का है, जहां शिक्षा का अधिकार के तहत पढ़ रहे 40 से अधिक छात्र-छात्राओं को नए सत्र से बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी है। आश्चर्यजनक यह स्कूल को मप्र बोर्ड से सीबीएसई में शिफ्ट करने की अनुमति देते समय शिक्षा विभाग ने इन गरीब बच्चों की पूरी तरह अनदेखी कर दी।
बदली मान्यता
सूत्रों के अनुसार स्कूल प्रबंधन ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की मान्यता (क्र. 261721949) छोड़कर सीबीएसई (मान्यता क्र. 1031472) का दामन थाम लिया है। आरोप है यह बदलाव केवल मोटी फीस और बड़े मुनाफे के उद्देश्य से किया गया है।
स्कूल प्रबंधन का कहना है नए सीबीएसई पैटर्न में आरटीई के पुराने छात्रों को पढ़ाना संभव नहीं है। मान्यता बदलते समय विभाग को यह सुनिश्चित करना था आरटीई के तहत पढ़ रहे बच्चों का समायोजन कैसे होगा ?
अधिकारियों की चुप्पी
शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में फिलहाल मौन साधे हुए हैं। सवाल है क्या विभाग ने जानबूझकर स्कूल को खुली छूट दी? क्या गरीब बच्चों का भविष्य चंद कागजी बदलावों की भेंट चढ़ जाएगा? स्कूली बच्चों के माता-पिता नीतेश परमार,लोकेश प्रजापत, राकेश कांडे, शुभम सोलंकी ने उच्च स्तरीय जांच और बच्चों के तत्काल शिक्षा से वंछित करने वाले स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
बाधित नहीं होने देंगे पढ़ाई...
शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए बच्चों के ‘शिक्षा के अधिकार’ (आरटीई) को सुरक्षित रखना प्राथमिकता है। डीपीसी संजय मिश्रा को विस्तृत जांच के लिए निर्देशित किया है, ताकि वस्तुस्थिति स्पष्ट हो सके। उद्देश्य सुनिश्चित करना है किसी विवाद के कारण बच्चों की शिक्षा बाधित न हो। जांच प्रतिवेदन के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।- शांतास्वामी भार्गव, जिला शिक्षा अधिकारी
कलेक्टर तक पहुंचा मामला
पीड़ित अभिभावकों ने कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है। उन्हें सौंपे आवेदन में स्पष्ट कहा है स्कूल प्रबंधन के पास बच्चों की फाइल आगे बढ़ाने या ट्रांसफर करने का कोई स्पष्ट अधिकार नहीं है।
सरकार को इस पर तुरंत निर्णय लेना चाहिए। अभिभावकों का कहना है प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया तो शिक्षा का अधिकार कानून महज कागजों तक सीमित रह जाएगा।
विभागीय मिलीभगत और भ्रष्टाचार के आरोप
अभिभावकों का सीधा आरोप है सीबीएसई मान्यता दिलाने के खेल में मापदंडों को ताक पर रखा गया। भ्रष्टाचार और सौदेबाजी के दम पर स्कूल को बोर्ड बदलने की अनुमति तो दे दी गई, लेकिन उन 40 बच्चों की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली जो विगत सालों से यहां निःशुल्क शिक्षा पा रहे थे। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए भारी-भरकम निजी फीस देना असंभव है, जिससे इन बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छूटने की कगार पर है।
दो वर्ष से किया जा रहा था संचालन
स्कूल का संचालन दो वर्ष से किया जा रहा था। सीबीएसई से स्थाई संबद्धता प्राप्त होने के उपरांत, मप्र बोर्ड की मान्यता निरस्ती के लिए बीआरसी कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया है। - नवीन चौधरी, डायरेक्टर, मास्टर माइंड स्कूल, इंदौर
बच्चों का भविष्य सुरक्षित करेंगे
मास्टर माइंड स्कूल द्वारा स्वेच्छा से मान्यता बंद किए जाने के प्रकरण में नियमों एवं निर्देशों के अंतर्गत जांच तय होगी। विभाग की प्राथमिकता बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना है।
बच्चों के शिक्षा के अधिकार और उनके व्यापक हित में समस्त आवश्यक वैधानिक कार्यवाही समय-सीमा में पूर्ण की जाएगी। - संजय कुमार मिश्रा, डीपीसी, इंदौर
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