अंगद के पांव की तरह जमे रहे टीआई पर गिरी गाज: सुप्रीम कोर्ट की फटकार से आखिर हिल ही गई वर्दी की कुर्सी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अंगद की पांव की तरह जमे चंदननगर थाना प्रभारी टीआई इंद्रमणि पटेल की कुर्सी आखिरकार सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के आगे नहीं टिक सकी। सालों से आरोपों, शिकायतों और सवालों के बावजूद जस-के-तस बने रहे टीआई पटेल को सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली ने तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच करने के मौखिक आदेश दे दिए।
यह कार्रवाई उस गंभीर मामले में हुई है, जिसमें एक आरोपी पर चार मामलों की जगह आठ आपराधिक प्रकरण दर्शाकर गलत हलफनामा पेश किया गया और बाद में पॉकेट गवाह खड़े कर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप सामने आया।
इससे पहले हाईकोर्ट इंदौर भी टीआई पटेल के मामले में पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह को कार्रवाई के निर्देश दे चुका था, लेकिन उस वक्त याचिका विड्रॉल हो गई और पुलिस ने चुप्पी साध ली थी।
तब से लेकर अब तक टीआई पटेल बिना डिगे, बिना हिले अंगद की पांव की तरह कुर्सी पर जमे रहे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचते ही तस्वीर बदल गई।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
13 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस एहसानुद्दीन अमानउल्ला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने पूरे मामले को बेहद गंभीर मानते हुए तीखी टिप्पणी की।
कोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता को निर्देश दिए कि शासन और पुलिस कमिश्नर को तुरंत सूचित किया जाए।संबंधित टीआई इंद्रमणि पटेल को बिना देरी लाइन अटैच किया जाए।
आदेश अपलोड होने का इंतजार न किया जाए।अगले आदेश तक उन्हें किसी भी थाने में कोई काम न दिया जाए।कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित किया जाए।
कैसे हुआ मामले का खुलासा
यह पूरा मामला अनवर हुसैन की जमानत याचिका के दौरान उजागर हुआ। पुलिस ने हाईकोर्ट में हुसैन के खिलाफ चार की जगह आठ आपराधिक मामले दर्शाए, जिसके चलते उसे जमानत नहीं मिल सकी।
जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो पुलिस ने सफाई दी कि एक ही नाम के आरोपी होने से गलती से आठ केस दर्ज दिखा दिए गए।लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और इसे गंभीर लापरवाही माना।
इसी केस में असद वारसी इंटरविनर बने और थाने में चल रहे पॉकेट गवाहों के खेल को अदालत के सामने रखा।इंटरविनर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कोर्ट को बताया कि 25 नवंबर को पॉकेट गवाहों का मुद्दा पहले ही सामने आ चुका था।इसके बावजूद 30 नवंबर को उसी केस में फिर पॉकेट गवाह पेश किए गए।इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई थी।
पुलिस की ओर से कोर्ट में शपथपत्र देकर कहा गया कि टीआई के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।लेकिन याचिकाकर्ता के अधिवक्ता रितम खड़े ने इस शपथपत्र पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि यहसिर्फ आंखों में धूल झोंकने जैसा है, जबकि मामला सख्त कार्रवाई का है।कोर्ट ने इन आपत्तियों को रिकॉर्ड में लेते हुए अगली सुनवाई में और विस्तृत जवाब मांगा है।
अब पूरे सिस्टम पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद अब यह मामला सिर्फ एक टीआई तक सीमित नहीं रहा।सीपी, एडिशनल डीसीपी और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली भी सीधे सवालों के घेरे में है।अब देखना यह होगा कि अंगद की पांव की तरह जमे रहे अफसर पर कार्रवाई यहीं थमेगी या मिसाल बनेगी।
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