दबंग दुनिया की आड़ में काले-सफेद का कारोबार: चार्जशीट में गुटखा माफिया किशोर वाधवानी का बड़ा खुलासा
KHULASA FIRST
संवाददाता

ईडी का शिकंजा और कसा, मनी लांड्रिंग केस में विशेष अदालत ने लिया संज्ञान
एलोरा टोबैको से कमाई, अखबार में लगाई सफेदी, बढ़ी मुश्किलें
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
गुटखा माफिया किशोर वाधवानी और उसके रिश्तेदारों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इंदौर द्वारा दर्ज मनी लांड्रिंग के मामले में विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए नियमित सुनवाई शुरू करने के आदेश दे दिए हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद वाधवानी परिवार के खिलाफ कानूनी शिकंजा और कस गया है।
ईडी ने यह चार्जशीट 30 अक्टूबर को कोर्ट में पेश की थी, जिस पर 12 जनवरी को विशेष कोर्ट ने संज्ञान लिया। इस प्रकरण में किशोर वाधवानी, नितेश वाधवानी, पूनम वाधवानी और दबंग दुनिया पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया गया है। ईडी का आरोप है कि सभी ने मिलकर काली कमाई को वैध दिखाने की सुनियोजित साजिश रची।
एलोरा टोबैको से अवैध कमाई
ईडी के अनुसार आरोपितों ने एलोरा टोबैको कंपनी लिमिटेड के माध्यम से अवैध रूप से सिगरेट का निर्माण और बिक्री की। इस अवैध कारोबार से करोड़ों रुपए की कमाई की गई, जिसे बाद में दबंग दुनिया अखबार की आड़ में सफेद करने की कोशिश की गई।
जांच में खुलासा हुआ कि टैक्स चोरी और काली कमाई छिपाने के लिए अखबार का सर्कुलेशन बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। विज्ञापन के नाम पर नकली बिल और टैक्स इनवॉइस बनाए गए। पैसों को अलग-अलग खातों और लेन-देन में घुमाकर मनी लांड्रिंग की पूरी चेन तैयार की गई। ईडी का दावा है कि इस प्रक्रिया से सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाया गया।
प्रेस के नाम पर खेल
ईडी ने कोर्ट के समक्ष यह भी स्पष्ट किया कि एलोरा टोबैको और दबंग दुनिया पब्लिकेशंस के बीच सीधा और गहरा संबंध है। जांच में पाया गया कि तंबाकू उत्पाद ढोने वाले वाहनों पर अखबार के प्रेस स्टिकर लगाए गए थे। वाहनों के ड्राइवरों के पास मीडिया आईडी कार्ड थे। इसका मकसद जांच और चेकिंग से बचना था। ईडी के मुताबिक यह सब अवैध कारोबार को मीडिया संस्थान की आड़ में सुरक्षित रखने की रणनीति का हिस्सा था।
फर्जी विज्ञापन और सर्कुलेशन
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दबंग दुनिया अखबार में ऐसे विज्ञापन दिखाए गए, जिनका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं था। विज्ञापनों के नाम पर बड़ी रकम खर्च दिखाकर टैक्स देनदारी कम की गई। साथ ही अखबार का सर्कुलेशन वास्तविकता से कई गुना ज्यादा दर्शाया गया।
ईडी के अनुसार यह पूरा तंत्र कालेधन को वैध रूप देने के लिए तैयार किया गया था। ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि वाधवानी ने अवैध सिगरेट कारोबार से 11.66 करोड़ से अधिक की आय की। अब तक 11.33 करोड़ की संपत्तियों पर प्रोविजनल अटैचमेंट की कार्रवाई की जा चुकी है। अन्य संपत्तियों की पहचान और कुर्की की प्रक्रिया जारी है।
2000 करोड़ की जीएसटी चोरी
इससे पहले जीएसटी विभाग भी एलोरा टोबैको के खिलाफ अवैध सिगरेट कारोबार और टैक्स चोरी के मामले में करीब 2000 करोड़ रुपए की डिमांड खड़ी कर चुका है।
अब उठ रहे ये बड़े सवाल
यह मामला अब केवल किशोर वाधवानी परिवार तक सीमित नहीं रहा।
सवाल यह है कि-
अखबार की आड़ में काले कारोबार का खेल कब से चल रहा था?
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