कम से कम फांसी हो: मैं राजी हो जाऊंगा; राजवाड़ा पर बेटे की हत्या की श्रद्धांजलि सभा में बोले कव्वाल पिता
KHULASA FIRST
संवाददाता

मामला 13 वर्षीय बच्चे की गलत न करने देने पर हत्या का
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पिछले दिनों एमआईजी थाना क्षेत्र में हुई 13 वर्षीय बच्चे की नृशंस हत्या के मामले में कल शहरवासियों में आक्रोश देखने को मिला। श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में श्रीनगर कांकड़ के रहवासी और मृत बच्चे के स्कूली साथी राजवाड़ा पर जमा हुए और दो मिनट का मौन रखकर मृतक की आत्मा की शांति की कामना की।
इस दौरान पूछे जाने पर मृतक के पिता ने दो टुक शब्दों में कहा कि हत्यारे को फांसी से भी बड़ी कोई सजा हो तो दी जाए, लेकिन कम से कम उसकी फांसी पर मैं राजी हो जाऊंगा।
उल्लेखनीय है कि 30 जनवरी की देर शाम श्री नगर कांकड़ स्थित श्रीदेवी अपार्टमेंट की पांचवे माले पर क्षेत्र के ही रहने वाले एक प्रसिद्ध कव्वाल के 13 वर्षीय बेटे की नृशंस हत्या हो गई थी। 21 वर्षीय आरोपी रेहान ने गलत नहीं करने देने पर उसे मौत के घाट उतार दिया था।
बाद में पिता अब्दुल शाकीर उर्फ बंटी, ताऊ अब्दुल रहमान पिता अब्दुल हक की मदद से शव को घर की पलंग पेटी में छिपा दिया। पुलिस ने रेहान और उसकी मां शहजादी बी सहित चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया, लेकिन बेटे को खोने वाले परिजन के घाव अब तक नहीं भरे।
कल राजवाड़ा पर सुदामा नगर से संचालित संत रामानंद सरस्वी सीधा रास्ता आश्रम की ओर से मृत बच्चे के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसमें बच्चे के परिजन, श्रीनगर कांकड़ के रहवासी और बच्चे के स्कूली साथी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
ज्यादातर के हाथों में तख्तियां थी जिनमें से कुछ पर शहर वासियों मेरी क्या गलती थी। कुछ पर बच्चे का नाम और उसके लिए न्याय की मांग संबंधी बातें लिखी थी। इस दौरान सभी ने दो मिनट का मौन रखकर मृतक की आत्मा की शांति की कामना की।
मेरी तो आवाज ही चली गई...
इस मौके पर बेटे को याद करते हुए कव्वाल पिता ने कहा कि जैसे मैंने अपना बेटा खोया है। वैसे किसी का बेटा ना जाए। लोग अपने बच्चों को लेकर अवेयर और सजग हो जाए। हम भी पूरी कोशिश करते और अवेयर होते तो शायद आज मेरा बेटा भी जिंदा होता।
पृथम दृष्टया तो ये बात ही सामने आई है कि आरोपी ने नशे की हालत में मर्डर किया है और उसके परिवार ने उसका साथ दिया है। मामला विवेचना में हैं और फिर कोर्ट जाएगा। मैं हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा चाहता हूं। फांसी से ज्यादा कुछ हो सकता है तो ठीक नहीं तो कम से कम फांसी पर मैं राजी हो जाऊंगा।
हम आर्टिस्ट लोग हैं। मेरी तो जैसे आवाज ही चली गई। देखें लोगों की तालियां क्या कहती है। लोग किस तरह मुझे आवाज देते हैं। अगर मेरे फेंस चाहेंगे तो फिर में कोशिश करूंगा। फिलहाल मेरा मन स्थिर नहीं है। तब तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
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