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नाम-रिश्तों की दलील दी: पर नहीं पिघली अदालत; गुटखा माफिया किशोर की कोर्ट बदलने की कोशिश नाकाम

KHULASA FIRST

संवाददाता

07 फ़रवरी 2026, 9:35 पूर्वाह्न
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नाम-रिश्तों की दलील दी

नाम-रिश्तों की दलील दी, पर नहीं पिघली अदालत

कहा- जारी रहेगी सुनवाई

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कई आपराधिक मामलों से घिरे ‘गुटखा माफिया’ और टैक्स चौर किशोर वाधवानी को अदालत से बड़ा झटका लगा है। अपने खिलाफ चल रहे गंभीर प्रकरण की सुनवाई से बचने और कार्यवाही को आगे बढ़ने से रोकने के उद्देश्य से दायर की गई कोर्ट ट्रांसफर याचिका को सत्र न्यायालय ने पूरी तरह खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान यह साफ संकेत मिला कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

आरोपी किशोर वाधवानी ने सत्र न्यायाधीश अजय श्रीवास्तव की अदालत में आवेदन देकर केस क्रमांक 636/26 की सुनवाई 26वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शुभ्रा सिंह की कोर्ट से हटाकर किसी अन्य कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की थी।

यह मामला तुकोगंज थाना क्षेत्र का है, जिसमें आरोपी वाधवानी पर धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी गंभीर धाराएं 420, 467 और 468 लगी हैं।

अपने आवेदन में वाधवानी ने यह तर्क दिया कि न्यायाधीश शुभ्रा सिंह के दिवंगत पिता न्यायमूर्ति शंभु सिंह से उसके करीबी संबंध रहे हैं। उसने यह भी लिखा कि वह पीठासीन अधिकारी पर कोई आरोप नहीं लगा रहा, लेकिन निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे, इसलिए केस ट्रांसफर कर दिया जाए। कानूनी जानकारों के मुताबिक इस तरह की दलीलें असामान्य हैं और अक्सर सुनवाई टालने की रणनीति के तौर पर देखी जाती हैं।

अदालत में रखे गए तथ्यों से स्थिति साफ
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश शुभ्रा सिंह ने स्पष्ट किया कि उनके पिता न्यायमूर्ति शंभु सिंह का आवेदक से कभी कोई व्यक्तिगत या पारिवारिक संबंध नहीं रहा। अपने पिता के जीवनकाल में उन्होंने कभी वाधवानी का नाम उनसे नहीं सुना और न ही कभी उसे उनके निवास पर आते-जाते देखा।

न्यायाधीश ने यह भी बताया कि इससे पहले भी वह तथाकथित वाधवानी से जुड़े एक अन्य मामले की सुनवाई कर चुकी हैं, जब वे 2009 से 2012 के बीच सीबीआई की विशेष न्यायाधीश थीं। उस समय इस तरह की कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी।

सुनवाई को प्रभावित करने का प्रयास
कोर्ट को यह भी अवगत कराया गया कि मौजूदा प्रकरण में नियमित सुनवाई हो रही है, लेकिन बार-बार ऐसे तर्क और आवेदन सामने आ रहे हैं, जिनसे कार्यवाही आगे बढ़ने के बजाय बाधित होती है। कोर्ट का रुख साफ रहा कि इस तरह के प्रयासों को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता।

सभी तथ्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद सत्र न्यायालय ने किशोर वाधवानी की कोर्ट ट्रांसफर करने संबंधी याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि मामला अब उसी कोर्ट में और उसी न्यायाधीश के समक्ष आगे बढ़ेगा।

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