एक ही जमीन पर दूसरा खाता नहीं खुलेगा....जाइये आप
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एक जमीन पर दो खाते खुलवाने की एक उद्योगपति की कोशिश नगर निगम में नाकाम हो गई। राजस्व अधिकारियों ने साफ कह दिया कि ऐसा नहीं हो सकता, जाइए आप। उद्योगपति ने कई नेताओं और अधिकारियों से भी उन्हें फोन लगवा दिए थे, लेकिन बात फिर भी नहीं बनी।
ये उद्योगपति हैं जितेंद्र गर्ग, जो महंगी कार में गनमैन के साथ चलते हैं। ग्राम अरंडिया में रशीदा और शब्बीर टिनवाला की जमीन है जिस पर गर्ग अपने बेटे के लिए लक्जरी होटल का प्रोजेक्ट ला रहे हैं, जिसका नाम ओरा स्काय है। समस्या ये है कि खसरा नंबर 211/2/1/2 के दो खसरे हैं।
इनमें से एक पर गर्ग कमर्शियल डायवर्शन करवा चुके हैं, लेकिन दूसरे पर बायपास का कंट्रोल एरिया होने से डायवर्शन नहीं हो पाया। गर्ग ने खेल करते हुए दोनों खसरों को मिलाया और टीएंडसीपी से नक्शा पास करवा लिया।
दोनों मालिकों यानी टिनवाला और गर्ग के नाम भी चढ़ गए। रशीदा की जमीन पीछे की ओर, जबकि शब्बीर की जमीन आगे की ओर है। शब्बीर की जमीन कंट्रोल एरिया में है। जमीन पर इनका कब्जा है, लेकिन बायपास कंट्रोल एरिया होने के कारण उस पर कोई निर्माण नहीं किया जा सकता।
टीएंडसीपी में रशीदा और शब्बीर का नाम चढ़ने के बाद गर्ग की इच्छा थी कि नगर निगम में संपत्तिकर के दो खाते दोनों के नाम से खुल जाएं। उन्होंने खुद को रसूखदार मानते हुए सारे दस्तावेजों के साथ निगम में आवेदन लगाया, लेकिन राजस्व उपायुक्त केशव सगर ने रोक दिया। जब खाता नहीं खुला तो गर्ग खुद नगर निगम पहुंचे और सगर से मिले। उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन बात बनी नहीं।
सगर ने संपत्तिकर का दूसरा खाता नियम विरुद्ध खोलने से इंकार कर दिया। नाराज होकर गर्ग ने उन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से कई नेताओं को फोन लगाया और कुछ अफसरों से भी कहा कि वे सगर को समझाएं और संपत्तिकर का दूसरा खाता उनके नाम से खोल दें।
लेकिन फिर भी बात नहीं बनी तो दो दिन पूर्व सगर लावलश्कर के साथ निगम परिसर जा पहुंचे। वे ऊपर राजस्व अपर आयुक्त श्रंृगार श्रीवास्तव से मिले। उन्हें समझाया और संपत्तिकर का दूसरा खाता खोलने का आग्रह किया। उन्होंने जैसे ही नियम विरुद्ध खाता खोलने से इंकार किया, गर्ग का पारा चढ़ गया।
गर्ग आपा खो बैठे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे। श्रीवास्तव ने इस मामले से जुड़े अफसरों को बुलवाया और पूरा मामला जांचा-परखा। लेकिन फिर भी कोई ऐसा बिंदु नहीं मिला जिस आधार पर गर्ग का संपत्ति कर का खाता खोला जा सके। गर्ग की चिल्लाचोट के दौरान निगम कर्मचारी भी एकत्र हो गए।
इसी दौरान श्रीवास्तव ने कहा कि तुम कितने फोन लगवाओगे? जाने किस-किस के फोन आ रहे हैं, लेकिन नियम विरुद्ध खाता नहीं खुलेगा। जाइए आप, लेकिन गर्ग का चिल्लाना नहीं रुका। वो बोल रहे थे कि वे टिनवाला के साथ मिलकर काम कर रहे हैं तो फिर अपनी बात कहने के लिए निगम तो आ ही सकते हैं लेकिन उनका दबाव फिर भी काम नहीं आया।
काफी देर तक चिल्लाने के बाद भी श्रीवास्तव टस से मस नहीं हुए। स्पष्ट रूप से कहा कि खाता रशीदा के नाम से ही खुलेगा जिसका डायवर्शन हुआ है। गर्ग काफी देर तक चिल्लाचोट करने के बाद आखिरकार चिल्लाते हुए वहां से निकल गए।
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