BRTS पर बनेगा एलिवेटेड कॉरिडोर: बैठक में भी सहमति; अब होंगी पांच भुजाएं
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। BRTS मार्ग पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने को अंतिम मंजूरी मिल गई है।
यह कॉरिडोर LIG चौराहे से नवलखा चौराहे तक करीब 6 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें ट्रैफिक को सुचारू रखने के लिए पांच भुजाएं, रोटरी और रेस्क्यू लेन बनाई जाएंगी।
एलिवेटेड कॉरिडोर बनेगा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद शनिवार 7 फरवरी को सिटी बस ऑफिस में हुई बैठक में यह तय कर लिया गया कि BRTS पर एलिवेटेड कॉरिडोर ही बनेगा।
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में हुई बैठक में साफ कर दिया गया कि अब इस मुद्दे पर कोई और बैठक नहीं होगी।
बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल, इंजीनियर अतुल सेठ, इंदौर उत्थान समिति के सदस्य और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
तीन चौराहों पर उतरेंगी पांच भुजाएं
पहले योजना थी कि तीन प्रमुख चौराहों पर कुल तीन भुजाएं बनाई जाएं, लेकिन अब इसे बढ़ाकर पांच भुजाएं कर दिया गया है।
शिवाजी चौराहा – 2 भुजाएं
नवलखा चौराहा – 2 भुजाएं
गीताभवन चौराहा – 1 भुजा
इन भुजाओं से एलिवेटेड कॉरिडोर पर चढ़ने-उतरने में सुविधा मिलेगी और जाम की समस्या कम होगी।
रोटरी और रेस्क्यू लेन से मिलेगी राहत
जिन चौराहों पर भुजाएं बनेंगी, वहां रोटरी सिस्टम भी विकसित किया जाएगा ताकि ट्रैफिक का दबाव संतुलित किया जा सके। इसके साथ ही रेस्क्यू लेन भी बनाई जाएगी, जिससे एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपात वाहनों को रास्ता मिल सके। हालांकि, यह तय किया गया है कि एलिवेटेड ब्रिज टू-लेन ही रहेगा, थ्री-लेन संभव नहीं होगी।
हाईकोर्ट में मामला, 25 फरवरी को सुनवाई
इस परियोजना को लेकर इंजीनियर अतुल सेठ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कॉरिडोर की उपयोगिता पर सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल हाईकोर्ट ने स्टे नहीं दिया है और मामले की सुनवाई 25 फरवरी को तय की गई है।
15 फरवरी से काम शुरू करने की तैयारी
पीडब्ल्यूडी ने कॉरिडोर क्षेत्र में मिट्टी परीक्षण (सॉइल टेस्टिंग) शुरू कर दी है। प्रशासन की योजना है कि 15 फरवरी से निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाए। कलेक्टर शिवम वर्मा सभी विभागों के बीच समन्वय बनाकर प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट को भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यह परियोजना मुख्यमंत्री स्तर पर स्वीकृत है और इसे तय समय में पूरा किया जाएगा।
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