जहरीले पानी कांड के बीच सियासी हलचल तेज: मंत्री ने की संगठन महामंत्री से गोपनीय मुलाकात
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
इंदौर में दूषित पानी से मौतों के मामले के बीच भाजपा के भीतर राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय गुरुवार को बीजेपी प्रदेश कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा से मुलाकात की।
दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत
यह मुलाकात पूरी तरह से गोपनीय थी, जिसमें कार्यकर्ताओं और अन्य नेताओं को दूर रखा गया। सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को लेकर पार्टी के भीतर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
भाजपा की सफाई
हालांकि भाजपा की ओर से सफाई दी गई कि रोस्टर डे के तहत कैलाश विजयवर्गीय प्रदेश कार्यालय पहुंचे थे। उल्लेखनीय है कि मंत्री विजयवर्गीय को Z श्रेणी की CISF सुरक्षा प्राप्त है।
आरएसएस कार्यालय में हाईलेवल मीटिंग
इधर, इंदौर में बुधवार देर रात आरएसएस कार्यालय सुदर्शन में एक हाईलेवल बैठक आयोजित की गई थी। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में भागीरथपुरा दूषित पानी कांड पर करीब डेढ़ घंटे से अधिक समय तक गंभीर चर्चा हुई।
महापौर और कलेक्टर रहे मौजूद
इस मीटिंग में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव को विशेष रूप से तलब किया गया था। बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा भी उपस्थित थे। जानकारी के अनुसार, संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने जल संकट, प्रशासनिक लापरवाही और जन आक्रोश को लेकर विस्तार से चर्चा की। बैठक को संगठनात्मक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
विवाद थमने का नाम नहीं
इंदौर में दूषित पानी पीने से अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। इस मामले को लेकर पहले ही भाजपा सरकार और नगर निगम विपक्ष के निशाने पर हैं। बीते दिनों जब इस विषय पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल किया गया था, तब उन्होंने विवादित बयान देकर मामला और गरमा दिया था।
मीडिया के सवाल पर नाराज होते हुए विजयवर्गीय ने कहा था
छोड़ो यार, तुम फोकट प्रश्न मत पूछो, क्या घंटा हो गया है। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद से मंत्री लगातार सुर्खियों में हैं।
विपक्ष के हमले तेज
जहरीले पानी कांड के बाद से विपक्ष भाजपा पर लगातार हमला बोल रहा है और सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है। वहीं, पार्टी के भीतर चल रही बैठकों और बंद कमरे की चर्चाओं ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि मामला अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक चुनौती भी बन चुका है।
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