खबर
Top News

20 मौतों के मातम के बीच निगम की घोर लापरवाही: भागीरथपुरा जल त्रासदी; क्षेत्र में फिर फूटी नर्मदा पाइप लाइन

KHULASA FIRST

संवाददाता

08 जनवरी 2026, 11:10 पूर्वाह्न
413 views
शेयर करें:
20 मौतों के मातम के बीच निगम की घोर लापरवाही

ठेकेदार के भरोसे खुदाई, इंजीनियर नदारद, सड़कों पर बहा हजारों लीटर पानी

स्वच्छ पेयजल जीवन का मौलिक अधिकार, इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं

बड़ी संख्या में शामिल हुई महिलाएं

पानी भी बंद और पेंशन भी, कहां जाएं?

स्वास्थ्य विभाग ने स्वस्थ होकर घर लौटे 189 मरीजों का लिया फॉलोअप

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के भागीरथपुरा में सिस्टम की संवेदनहीनता एक बार फिर सरेआम हुई। यह वही इलाका है, जहां कुछ दिन पहले दूषित पानी के तांडव ने 20 परिवारों के चिराग बुझा दिए थे। बुधवार को इस संवेदनशील क्षेत्र में निगम के ठेकेदार ने ड्रेनेज लाइन की खुदाई के दौरान जेसीबी से नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन फोड़ दी।

देखते ही देखते हजारों लीटर पानी सड़कों पर सैलाब बनकर बहने लगा और नालियों की गंदगी में मिल गया। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि मौके पर न तो निगम का कोई जिम्मेदार इंजीनियर मौजूद था और न ही किसी अधिकारी ने इस काम की निगरानी करना जरूरी समझा। पूरी खुदाई सिर्फ दिहाड़ी मजदूरों और एक बेपरवाह ठेकेदार के भरोसे छोड़ दी गई।

मौके पर मौजूद दुकानदार सब्जी विक्रेता ने बताया पाइप लाइन फूटते ही पानी का प्रेशर इतना तेज था कि वह आसपास की दुकानों और घरों की दहलीज तक जा पहुंचा। स्थानीय रहवासी गोपाल, मंगल वर्मा और राजाराम बौरासी ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा पिछली मौतों के जख्म अभी भरे भी नहीं हैं और निगम फिर वही जानलेवा गलतियां दोहरा रहा है। ड्रेनेज और पीने के पानी की लाइनों का इस तरह पास-पास होना भविष्य में किसी बड़ी महामारी को खुला निमंत्रण है।

वहां मौजूद मजदूर ठेकेदार अंतर सिंह ने बेझिझक कहा कि उन्हें ड्रेनेज लाइन के काम की कोई तकनीकी समझ नहीं है। उन्हें नंदा नगर मजदूर चौक से दिहाड़ी पर काम के लिए लाया गया है। ठेकेदार की इस बात से निगम के सुरक्षा मानकों और तकनीकी पर्यवेक्षण के दावों का खुलासा होता है।

फिलहाल पूरे इलाके में पानी की बर्बादी और संभावित संक्रमण को लेकर दहशत का माहौल है। जनता के बीच यह चर्चा भी जोरों पर रही कि कलेक्टर शिवम वर्मा और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल सिर्फ मैदानी दौरों की फोटोबाजी तक सीमित हैं या वास्तव में धरातल पर कोई सुधार होगा। भागीरथपुरा की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं है, उसे जवाबदेही चाहिए।

भागीरथपुरा जलसंकट पर हाई कोर्ट सख्त
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने भागीरथपुरा (नगर निगम वार्ड-11) में हुई जल संदूषण त्रासदी को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल मानते हुए राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत ‘स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का अधिकार’ जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।

यह निर्देश विवाद याचिका क्रमांक 50641/2025 (महेश गर्ग एवं अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य) सहित अन्य संबंधित याचिकाओं (50628/2025, 247/2026, 496/2026) की संयुक्त सुनवाई के दौरान दिए गए। मामले की सुनवाई 6 जनवरी को न्यायमूर्तिद्वय विजय कुमार शुक्ला एवं आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने की।

पहले भी दिए जा चुके हैं निर्देश
न्यायालय ने उल्लेख किया कि 31 दिसंबर 2025 को पारित आदेश में राज्य सरकार और नगर निगम को प्रभावित क्षेत्रों में नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा अस्पतालों में भर्ती मरीजों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आज भी भागीरथपुरा एवं अन्य क्षेत्रों में दूषित पानी की आपूर्ति जारी है और पीड़ितों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा।

नगर निगम और प्रशासन पर गंभीर आरोप
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बगड़िया ने कोर्ट को बताया वर्ष 2022 में महापौर द्वारा नई पेयजल पाइपलाइन बिछाने के आदेश दिए गए थे, लेकिन लापरवाह अधिकारियों द्वारा फंड जारी न किए जाने से यह कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका। यह भी बताया कि 2017-18 में इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों से लिए गए 60 जल नमूनों में से 59 पीने योग्य नहीं पाए गए।

इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। याचिकाकर्ताओं ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई, भारी मुआवजा तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय समिति से जांच कराने की मांग भी की।

हाई कोर्ट ने सभी मुद्दों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत करते हुए तत्काल ये निर्देश जारी किए-

प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों एवं पैकेज्ड पानी के माध्यम से सरकारी खर्च पर सुरक्षित पेयजल आपूर्ति।

दूषित स्रोतों और पाइपलाइनों से जल आपूर्ति पर तत्काल रोक।

प्रभावित नागरिकों के लिए स्वास्थ्य शिविर और मेडिकल जांच।

सरकारी व पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में निःशुल्क उपचार।

एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से जल गुणवत्ता परीक्षण।

सीवर और जल लाइनों के समानांतर हिस्सों में पाइपलाइनों की मरम्मत/बदलाव। ऑनलाइन जल गुणवत्ता निगरानी प्रणाली, क्लोरीनीकरण व कीटाणुशोधन प्रोटोकॉल लागू करना।

इंदौर शहर के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा योजना तैयार करना।

राज्य स्तर पर कार्रवाई की मांग
हाई कोर्ट ने कहा जल संदूषण की समस्या केवल इंदौर तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की है। इस पर मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया गया कि राज्य स्तर पर जल प्रदूषण रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

अधिकारियों की जवाबदेही तय
हाई कोर्ट ने आयुक्त इंदौर, कलेक्टर इंदौर, नगर निगम आयुक्त, स्वास्थ्य अधिकारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, पीएचईडी के मुख्य अभियंता और शहरी विकास विभाग के अधिकारियों को अंतरिम आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नगर निगम को नई पेयजल पाइपलाइन की निविदाओं तथा 2017-18 के जल नमूनों से संबंधित सभी फाइलें कोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा है। मामले में अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी।

भागीरथपुरा में हालात सुधरने के सरकारी दावे;- घर-घर जाकर बांटी ओआरएस व जिंक किट
भागीरथपुरा क्षेत्र में सरकारी तंत्र की लापरवाही से दूषित जल के कारण उपजी जलजनित बीमारी और इससे अब तक हुई 20 मौतों के बाद अब स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आने का दावा किया जा रहा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी का असर क्षेत्र में दिखाई देने लगा है।

कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने पूरे प्रभावित इलाके में सघन दौरा किया। इस दौरान टीम ने उन 189 मरीजों का घर-घर जाकर फॉलोअप लिया, जो अस्पतालों से डिस्चार्ज होकर अपने घर लौट चुके हैं।

वहीं घर-घर जाकर ओआरएस किट भी बांटी गई। स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता अब संक्रमण को पूरी तरह खत्म करने और रिकवर हो चुके लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी करने पर है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हासानी ने बताया बुधवार को विभाग की टीम ने क्षेत्रीय नागरिकों को संक्रमण से बचाने के लिए 686 ओआरएस और जिंक की किट वितरित की। इसके साथ ही टीम ने लोगों को ओआरएस घोल बनाने की सही विधि और हाथों की सफाई के तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया।

स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने प्रचार-प्रसार सामग्री के माध्यम से उल्टी-दस्त से बचाव के तरीकों को प्रदर्शित किया। प्रशासन ने क्षेत्र में मेगा माइकिंग के जरिये यह संदेश भी पहुंचाया कि वर्तमान में पाइप लाइनों की सफाई के लिए नर्मदा जल छोड़ा जा रहा है, इसलिए अगले आदेश तक नागरिक इस पानी का सेवन बिलकुल न करें।

इलाज की पुख्ता व्यवस्था के लिए भागीरथपुरा क्षेत्र में 24 घंटे चिकित्सकों की तैनाती की गई है और आपात स्थिति के लिए दो एम्बुलेंस भी मौके पर मौजूद हैं। वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में कुल 56 मरीज उपचाराधीन हैं, जिनमें से 9 का इलाज आईसीयू में चल रहा है।

प्रभावितों को एमवाय, अरबिंदो और बच्चों को चाचा नेहरू अस्पताल भेजा जा रहा है। डॉ. हासानी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई मरीज निजी अस्पताल में इलाज कराना चाहे तो वहां भी उसकी जांच और दवाइयों की व्यवस्था पूरी तरह निःशुल्क रहेगी।

मूकबधिरों ने वीडियो जारी कर लगाई गुहार
भागीरथपुरा में रहने वाले मूकबधिरों ने भी वीडियो जारी कर अपनी समस्या हल करने की गुहार लगाई है। चेतन निम और उनके साथियों ने इस वीडियो में कहा है कि हमें आर्थिक संकट के बावजूद आरओ का पानी खरीदना पड़ रहा है। हमारी पेंशन भी बंद कर दी गई है। ऐसे में हम क्या करें, कहां जाएं?

कलेक्टर शिवम वर्मा के नाम जारी इस वीडियो में वो कह रहे हैं कि हम बोल-सुन नहीं सकते, लेकिन हमारी पीड़ा भी कम गहरी नहीं है। हमें रोज आरओ का पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। पहले ही हमारी आर्थिक स्थिति कमजोर है, ऊपर से हमारी दिव्यांग पेंशन भी लंबे समय से बंद है।

यह क्यों बंद की गई, कोई बताने को तैयार नहीं है। ऐसे में रोज महंगा पानी खरीदकर पीना हमारे लिए बेहद मुश्किल हो गया है। कम से कम हमारे लिए आरओ पानी की व्यवस्था करा दी जाए, ताकि इस परेशानी से मुक्ति मिल सके।

दूषित पानी का मामला सामने आने के बाद सभी चिंतित... उन्होंने बताया कि क्षेत्र में उनके जैसे छह से अधिक दिव्यांग परिवार सहित रहते हैं। दूषित पानी का मामला सामने आने के बाद सभी बेहद चिंतित हैं और मजबूरी में रोज आरओ का पानी खरीदकर पी रहे हैं।

निम ने कलेक्टर शिवम वर्मा को पत्र भी लिखा है। उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा में सरकारी नलों से आने वाले पानी में ड्रेनेज का पानी मिला हुआ है, जो पीने योग्य नहीं है। वे स्वयं दिव्यांग हैं और इस कारण अत्यंत असहाय स्थिति में हैं। दूषित पानी के चलते उन्हें पीने के लिए आरओ का पानी खरीदना पड़ रहा है, जिस पर उनकी आय से कहीं अधिक खर्च हो रहा है। यह स्थिति उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद कठिन हो चुकी है।

दिव्यांग व्यक्तियों की सुरक्षा एवं सहायता सरकार का दायित्व... उन्होंने आशंका जताई है कि क्षेत्र में हैजे का गंभीर खतरा बना हुआ है। यह हालात अब एक प्रकार की आपदा बन चुके हैं। निम ने पत्र में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का भी उल्लेख किया है।

धारा 8 के तहत किसी भी आपदा या आपातकालीन स्थिति में दिव्यांग व्यक्तियों की सुरक्षा एवं सहायता सरकार का दायित्व है। वहीं धारा 24 के अंतर्गत दिव्यांग व्यक्तियों को स्वास्थ्य सेवाओं तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंच प्रदान करना अनिवार्य है। उन्होंने पत्र में मांग की कि भागीरथपुरा क्षेत्र में तत्काल स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था कराई जाए, दूषित जल आपूर्ति के कारणों की आपात जांच कराई जाए, चिकित्सा शिविर और दवाएं उपलब्ध हों, दिव्यांगों को प्राथमिक सहायता और राहत दी जाए।

महिला कांग्रेस नेत्रियों ने मृतकों को दी श्रद्धांजलि
मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस कमेटी द्वारा भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतों को लेकर रीगल तिराहे पर श्रद्धांजलि दी गई। इसमें पूरे शहर की महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुईं। मप्र महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने रीगल तिराहा पर भागीरथपुरा के मृतकों को श्रद्धांजलि देने और कैंडल मार्च का आयोजन रखा था।

इस में शहर से बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंची और कैंडल हाथ में लेकर गांधी प्रतिमा के चक्कर लगाए। इसके बाद गांधी प्रतिमा के सामने लगाए गए सभी मृतकों के चित्र के सामने श्रद्धांजलि दी।

इस मौके पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त की गई प्रभारी उषा नायडू, महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शोभा ओझा, अर्चना जायसवाल, सोनिला मिमरोट, रीटा डागरे, साक्षी शुक्ला आदि भी उपस्थित थीं।

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!

20 मौतों के मातम के बीच निगम की घोर लापरवाही - खुलासा फर्स्ट