दिग्विजय सिंह के इंकार के बाद नए चेहरे की तलाश तेज: राज्यसभा सीट को लेकर कांग्रेस में घमासान: अपडेट
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संवाददाता

महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी सियासत गरमा गई है। वजह है राज्यसभा की वह अहम सीट, जो वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली होने जा रही है। दिग्विजय सिंह ने तीसरी बार राज्यसभा जाने से इंकार कर दिया है, जिसके बाद कांग्रेस के भीतर एक तरह से ‘हाई-वोल्टेज वैकेंसी’ खुल गई है। हालांकि दिग्विजय सिंह मप्र में सक्रिय बने रहेंगे। दिग्विजय सिंह का राज्यसभा का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है।
दिग्विजय सिंह के हटते ही पार्टी में संभावित दावेदारों की लंबी कतार सामने आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल जैसे दिग्गजों के नाम चर्चा में हैं।
एक ही सीट के लिए कई मजबूत दावेदारों की मौजूदगी ने भोपाल से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल बढ़ा दी है। यदि पिछड़े वर्ग का कार्ड चलता है तो दिग्विजय के हटने से खाली हो रही खाली सीट पर अरुण यादव, जीतू पटवारी या कमलेश्वर पटेल में से कोई एक राज्यसभा में जाएगा।
इस बीच कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में सामाजिक समीकरणों का एंगल भी जुड़ गया है। कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मांग की है कि राज्यसभा में अनुसूचित जाति वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया जाए।
उनके इस पत्र के बाद मुकाबला सिर्फ नामों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक न्याय और जातीय संतुलन का सवाल भी केंद्र में आ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस हाईकमान के सामने अब दिग्गज नेताओं की दावेदारी और सामाजिक प्रतिनिधित्व दोनों के बीच संतुलन साधने की बड़ी चुनौती है।
विधानसभा का गणित क्या कहता है?
230 सदस्यीय मध्यप्रदेश विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। मौजूदा स्थिति में भाजपा के पास 165 विधायक, कांग्रेस के पास 64 विधायक, जबकि एक विधायक भारत आदिवासी पार्टी (बाप) से है। इस गणित के अनुसार भाजपा को दो सीटें आसानी से मिलती दिख रही हैं, जबकि कांग्रेस एक सीट पर अपनी दावेदारी मजबूत बनाए हुए है।
भाजपा की रणनीति पर भी रहेंगी नजरें
राज्यसभा चुनाव को लेकर सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि भाजपा की रणनीति पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं। भाजपा की ओर से सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। बड़वानी जिले से आने वाले सोलंकी को पार्टी का युवा चेहरा माना जाता है।
वे 2020 में राज्यसभा पहुंचे थे। अब सवाल यह है कि भाजपा उन्हें दोबारा मौका देती है या फिर किसी नए चेहरे को आगे बढ़ाती है। इसके अलावा तीसरी सीट पर जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। वे 2024 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद राज्यसभा पहुंचे थे।
चूंकि जॉर्ज कुरियन केरल से आते हैं और वहां 2026 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में भाजपा उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी रणनीतिक फैसला कर सकती है। माना जा रहा है कि पार्टी क्षेत्रीय संतुलन और चुनावी जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय लेगी।
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