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आखिर कौन बचा रहा है डॉ. पंकज जैन को: जांच पर जांच फिर भी बरकरार नियुक्ति

KHULASA FIRST

संवाददाता

29 जनवरी 2026, 11:02 पूर्वाह्न
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आखिर कौन बचा रहा है डॉ. पंकज जैन को

महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
तमाम फाइलें खुलीं, जांचें बैठीं, शिकायतें हुईं, लोकायुक्त तक मामला पहुंचा, लेकिन नतीजा शून्य। सीहोर के शा. महिला पॉलिटेक्निक महा. में पदस्थ विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज जैन की नियुक्ति पर सवाल अब एक व्यक्ति या महा. तक सीमित नहीं रहे।

मामला सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता, और जवाबदेही पर सीधा प्रश्नचिह्न है। फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों से लेकर वेतन लाभ व विस को दी गई गलत जानकारी की परतें इतनी हैं कि हर जांच के बाद एक नया सवाल जन्म ले रहा है। इतनी आपत्तियों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं? आखिर कौन बचा रहा है डॉ. पंकज जैन को?

जानकारी के अनुसार शा. महिला पालिटेक्निक महा. में डॉ. जैन की नियुक्ति जिन अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर हुई, वे शुरू से ही विवादित रहे हैं। दस्तावेजों में ‘मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट’ से संबंधित जिस अनुभव प्रमाण पत्र का उल्लेख है, जांच में वो फर्जी पाया गया, क्योंकि जिस समयावधि में संस्थान से अनुभव प्रमाण पत्र हासिल होना दर्शाया गया, उस समय संस्थान में यह पाठ्यक्रम था ही नहीं।

अनुभव प्रमाणपत्रों पर गंभीर आपत्ति
तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2019, 2022 और 2023 में कराई गई जांचों का हवाला शिकायतों में दिया गया है। आरोप है कि विज्ञापन में जिन विषयों-मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट, मॉडर्न ऑफिस प्रैक्टिस, सेक्रेटेरिएट प्रैक्टिस और कमर्शियल प्रैक्टिस-में अनुभव अनिवार्य था, उस अनुरूप अनुभव डा. जैन के उपलब्ध दस्तावेजों से प्रमाणित नहीं होता।

डॉ. जैन द्वारा यह अनुभव प्रमाणपत्र भोपाल स्थित विद्यासागर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से प्राप्त किए गए थे, और ऐसे प्रमाणपत्र कथित रूप से एक बार नहीं, बल्कि दो-दो बार अलग-अलग तारीखों में जारी किये गये।

ऐसे में सवाल है कि एक ही व्यक्ति को समान प्रकृति के अनुभव प्रमाणपत्र दो-दो बार जारी किए जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी और उनकी प्रामाणिकता की जांच किस स्तर पर की गई?

वेतन लाभ भी जांच के दायरे में
मामला केवल नियुक्ति तक सीमित नहीं रहा। लोकायुक्त में दर्ज प्रकरण (क्रमांक 0090/ई/2023) के संदर्भ में शिकायतकर्ता का कहना है कि डॉ. जैन को सातवें वेतनमान का लाभ नियमों के विपरीत दिए जाने का मुद्दा भी जांच के दौरान सामने आया। जिसमें जिला प्रशासन स्तर पर जांच के बाद डा जैन से अतिरिक्त भुगतान की वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई।

गुमराह किया
संवेदनशील पक्ष विधानसभा से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार विधायक उमाकांत शर्मा द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के उत्तर में डॉ. जैन से संबंधित लंबित शिकायतों व जांचों का विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया। इस तरह डा. जैन द्वारा अधूरी या भ्रामक जानकारी देकर विधानसभा को गुमराह किया गया।

नियम क्या कहता है
वरिष्ठ अधिवक्ता आत्माराम जाटव का कहना है कि फंडामेंटल रूल 31-ए के तहत यदि कोई शासकीय सेवक प्रारंभिक नियुक्ति के समय निर्धारित पात्रता नहीं रखता हो, या उसने गलत अथवा भ्रामक दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की हो, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। ऐसे मामलों में नियुक्ति की वैधता पर पुनर्विचार और सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव है।

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