आखिर कॉन्स्टेबल ने दहेज में ऐसा क्या मांग लिया: नौकरी से बर्खास्त तो हुआ ही; दो साल की सजा भी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, गुना।
एक पुलिस कॉन्स्टेबल को दहेज प्रताड़ना के मामले में न्यायालय ने दो वर्ष की सजा सुनाई है। मूल रूप से शिवपुरी जिले का रहने वाला आरक्षक अमित रघुवंशी गुना जिले के मधुसूदनगढ़ थाने में पदस्थ था।
25 लाख लेने के बाद कार भी मांगी
जानकारी के अनुसार आरोपी ने अपनी शादी में 25 लाख रुपए दहेज के रूप में लेने के बावजूद कार की मांग को लेकर अपनी पत्नी को प्रताड़ित किया।
अन्य महिला से भी थे संबंध
मामले की जांच में यह भी सामने आया कि उसके एक अन्य महिला से संबंध थे और उससे एक बच्ची भी है। आरोप साबित होने पर पुलिस विभाग पहले ही उसे नौकरी से बर्खास्त कर चुका था।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने गुरुवार को फैसला सुनाया, जिसकी जानकारी शनिवार को सामने आई। शासन की ओर से एडीपीओ सपना गुप्ता ने पैरवी की।
वारंट तामीली के दौरान हुआ प्रेम
साल 2021 में अमित रघुवंशी नोटिस-वारंट की तामीली के लिए एक गांव में जाया करता था, जहां उसकी पहचान गांव की ही एक युवती से हुई। दोनों के बीच प्रेम संबंध बने।
बेटी का जन्म भी हुआ
29 सितंबर 2021 को युवती ने एक बेटी को जन्म दिया। अस्पताल और अन्य दस्तावेजों में बच्ची के पिता के रूप में अमित रघुवंशी का नाम दर्ज है। लाड़ली लक्ष्मी योजना के दस्तावेजों में भी पिता के कॉलम में अमित का ही नाम दर्ज पाया गया।
फिर कर ली दूसरी युवती से शादी
बेटी के जन्म के 3-4 महीने बाद अमित रघुवंशी का रिश्ता गुना की एक युवती से तय हुआ। गुना के एक निजी होटल में दोनों की शादी हुई। शादी में लड़की के पिता ने घरेलू सामान, नकदी सहित करीब 25 लाख रुपए दहेज दिया।
मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी
आरक्षक ने कार की मांग को लेकर पत्नी को मानसिक और शारीरिक रूप से काफी प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। एक साल बाद महिला मायके चली गई। महिला ने कैंट थाने में पति के खिलाफ शिकायत की।
यह सफाई दी आरक्षक ने
आरक्षक अमित रघुवंशी ने अपने बचाव में कहा कि वह काम के कारण घर नहीं जा पाता था। गांव में एक महिला के घर पानी मांगने से उसकी बेटी से दोस्ती हो गई। उसने दावा किया कि दस्तावेजों में उसका नाम कैसे दर्ज हुआ, इसकी उसे जानकारी नहीं है।
विभागीय जांच के बाद नौकरी से बर्खास्त
एसडीओपी की जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद अगस्त 2024 में एसपी ने उसे पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया। कैंट पुलिस के चालान के बाद न्यायालय ने आरोपी को दो वर्ष का सश्रम कारावास और 2 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।
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