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21 मौतों के बाद खुली नींद: 200 से अधिक अब भी उपचाररत

Khulasa First

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संवाददाता

11 जनवरी 2026, 6:11 pm
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21 मौतों के बाद खुली नींद

भागीरथपुरा जल त्रासदी : ड्रेनेज से पूरी तरह अलग होगी पेयजल लाइन, नगर निगम ने तैयार किया विस्तृत मैप, बिछाया जाएगा नया नर्मदा नेटवर्क, ठेकेदारों को सौंपा काम

नई बोरिंग पर रोक, 30% इलाके में नर्मदा जल सप्लाई जल्द होगी

युवक कांग्रेस ने की मंत्री विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा क्षेत्र में भीषण जल त्रासदी के बाद नगर निगम ने आखिरकार ठोस और तकनीकी सुधार की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। नर्मदा जल पाइपलाइन में ड्रेनेज पानी मिलने से 21 लोगों की असमय मौत हो चुकी है जबकि 200 से अधिक रहवासी विभिन्न अस्पतालों में उपचाररत हैं।

इस हादसे ने प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ पूरे जल वितरण तंत्र की गंभीर तकनीकी खामियों का खुलासा किया है। अब नगर निगम ने नया नर्मदा जल नेटवर्क तैयार कर ड्रेनेज और पेयजल लाइनों को पूरी तरह अलग करने का दावा किया है।

26 किमी क्षेत्र के लिए तीन टेंडर, 15 किमी नई लाइन... भागीरथपुरा के चिराड मोहल्ला, न्यू बस्ती, मराठी मोहल्ला, रेडवाल कॉलोनी, यादव कॉलोनी और भट्टा बस्ती सहित प्रभावित इलाकों में 26 किमी क्षेत्र के लिए तीन टेंडर जारी किए गए हैं। इनमें 15 किमी नई पाइप लाइन बिछाई जानी है, ताकि दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो।

2017 का तकनीकी मैप बना आधार... नगर निगम द्वारा भागीरथपुरा ओएचटी (ओवरहेड टैंक) कमांड एरिया के अंतर्गत जल वितरण नेटवर्क का विस्तृत नक्शा वर्ष 2017 में तैयार किया गया था। इसी तकनीकी मैप के आधार पर सुधार कार्य को अंतिम रूप दिया गया है। निगम के जल विभाग के अनुसार मैप में मौजूदा और प्रस्तावित पाइप लाइन नेटवर्क, वाल्व, जॉइंट्स, पाइप साइज और जल प्रवाह व्यवस्था का पूरा विवरण है।

150 से 1500 मिमी तक की पाइप लाइन... योजना के तहत क्षेत्र में 150 मिमी से 1500 मिमी व्यास तक की पाइप लाइनें बिछाई जा रही हैं ताकि वार्ड की हर गली तक समान दबाव में पानी पहुंच सके। पुराने नेटवर्क में मिश्रित सामग्री और जर्जर लाइनों के कारण बार-बार लीकेज की स्थिति बन रही थी।

ड्रेनेज से पूरी तरह अलग होगी पेयजल लाइन... नई योजना का मुख्य उद्देश्य पेयजल पाइप लाइन को ड्रेनेज लाइन से पूरी तरह अलग रखना है। पूर्व में ड्रेनेज का गंदा पानी नर्मदा लाइन में मिलने की घटनाओं को देखते हुए यह नया नेटवर्क उच्च तकनीकी मानकों और अतिरिक्त सुरक्षा दूरी के साथ तैयार किया गया है।

मजबूत होगा वाल्व और कंट्रोल सिस्टम... तकनीकी मैप में स्लूइस वाल्व, एयर वाल्व, रिफ्लक्स वाल्व और वॉशआउट सिस्टम की स्थिति स्पष्ट दर्शाई गई है। इससे आपात स्थिति में जल आपूर्ति को तुरंत नियंत्रित किया जा सकेगा और लीकेज, प्रेशर असंतुलन व दूषित पानी की समस्या से बचाव होगा।

गलियों–मोहल्लों का बारीकी से सर्वे... सामने आए नए नर्मदा पाइप लाइन का ब्लूप्रिंट में उन सभी गलियों, मुख्य मार्गों और मोहल्लों को चिह्नित किया गया है, जहां पुरानी और ड्रेनेज के संपर्क में आई पाइपलाइनों के कारण दूषित पानी की आपूर्ति हुई।

योजना का ब्लू प्रिंट

पुरानी पाइप लाइनों को पूरी तरह हटाया जाएगा ड्रेनेज और पेयजल लाइनें अलग-अलग मार्ग से बिछाई जाएंगी। संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षित दूरी के साथ नई पाइप लाइन डाली जाएगी निगम का दावा है कि इससे भविष्य में पेयजल में गंदा पानी मिलने की आशंका समाप्त हो जाएगी।

ठेकेदार तकनीकी निगरानी में करेंगे चरणबद्ध काम... नगर निगम अधिकारियों के अनुसार कार्य ठेकेदार प्रमोद शर्मा सहित मालवा इंजीनियरिंग को सौंपा गया है। प्रभावित इलाकों में चरणबद्ध खुदाई कर नई पाइप लाइन डाली जाएगी। पूरे कार्य की निगरानी निगम के तकनीकी अधिकारी करेंगे, ताकि गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे।

मैप से खुलासा: तकनीकी अव्यवस्था बनी त्रासदी की जड़... तकनीकी नक्शे से स्पष्ट हुआ है कि भागीरथपुरा की जल त्रासदी किसी एक दिन की गलती नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही तकनीकी अव्यवस्था का परिणाम है। ड्रेनेज और पेयजल लाइनें खतरनाक रूप से ज्वॉइंट थीं।

मैप में दर्शाया विवरण
लाल रंग से ड्रेनेज/सीवर लाइन

हरे व पीले रंग से नर्मदा पेयजल लाइन

कई स्थानों पर दोनों लाइनें बेहद करीब या समानांतर बिछी हुई

पुराने जॉइंट, क्रॉसिंग पॉइंट्स और लीकेज संभावित क्षेत्र चिन्हित

नकारात्मक दबाव से पेयजल में घुसा गंदा पानी... विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रेनेज लाइन में रिसाव और पास में पेयजल लाइन होने पर नकारात्मक दबाव (सक्शन) से गंदा पानी पेयजल पाइप में प्रवेश करता है। भागीरथपुरा में यही स्थिति बनी, जिस कारण सैकड़ों लोग बीमार पड़े और 20 लोगों की मौत हो गई।

भागीरथपुरा ओएचटी कमांड एरिया का पूरा सच... नगर निगम का आधिकारिक मैप- ‘भागीरथपुरा ओएचटी कमांड एरिया, जल वितरण नेटवर्क’ पूरे तंत्र की सच्चाई का खुलासा करता है।

इसमें दर्ज विवरण
100 से 1500 मिमी तक पाइप लाइन

डीआई, सीआई और एसीपी सामग्री का उपयोग, स्लूइस वाल्व, एयर वाल्व, स्कॉर वाल्व, टी-जॉइंट, रिड्यूसर चिह्नांकन

ओएचटी से अंतिम उपभोक्ता तक का पूरा विवरण, तकनीकी जानकारों का मानना है पुराने डिजाइन और मिश्रित सामग्री के कारण नेटवर्क कमजोर हो चुका था, लेकिन समय रहते सुधार नहीं किया गया।

तकनीकी डेटा होते हुए भी नहीं हुई समय पर कार्रवाई

ड्रेनेज–पेयजल लाइन सेपरेशन नहीं हुआ

जर्जर पाइप लाइन नहीं बदली गई

संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए

अब आगे क्या?, पाइप लाइन ऑडिट, नई DI लाइन और स्थायी समाधान का दावा

नगर निगम का कहना है अब:
पूरे कमांड एरिया में पाइप लाइन ऑडिट होगा

ड्रेनेज और पेयजल लाइनें पूरी तरह अलग की जाएंगी

पुरानी सीआई/ एसीपी पाइप हटाकर नई डीआई पाइप लाइन डाली जाएगी

रहवासियों की मांग- स्थायी समाधान हो
स्थानीय नागरिकों का कहना है केवल मरम्मत नहीं, बल्कि मैप के अनुसार स्थायी और गुणवत्तापूर्ण सुधार किया जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। भागीरथपुरा का यह तकनीकी नक्शा साफ बताता है यह केवल दुर्घटना नहीं, लंबे समय से चली आ रही तकनीकी लापरवाही का भयावह परिणाम है।

भागीरथपुरा जल संकट पर जंबो बैठक
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैल रही बीमारी की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन, प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण जंबो बैठक रेसीडेंसी कोठी में आयोजित की गई। बैठक में तत्काल राहत, दीर्घकालीन समाधान और शहर में सुरक्षित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने को लेकर विस्तृत मंथन किया गया।

बैठक में अधिकारियों की कमी को देखते हुए नगर निगम में नई भर्तियां किए जाने पर सहमति बनी। साथ ही शहर में नई बोरिंग पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण रोक लगाने के आदेश जारी किए गए। प्रशासन ने साफ किया कि जल स्रोतों की अनियंत्रित खुदाई से स्थिति और गंभीर हुई है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

30 प्रतिशत क्षेत्र में नर्मदा जल, बाकी इलाकों में टैंकर... अधिकारियों ने जानकारी दी कि भागीरथपुरा के लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र में अगले दो से तीन दिनों में नर्मदा का शुद्ध जल सप्लाई शुरू कर दी जाएगी, जबकि शेष 70 प्रतिशत इलाकों में टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। नागरिकों को एहतियात के तौर पर पानी उबालकर ही उपयोग करने की सलाह दी गई है।

114 सरकारी व 600 से अधिक निजी बोरिंग का पानी दूषित... बैठक में बताया गया कि जांच के दौरान 114 सरकारी और 600 से अधिक निजी बोरिंगों का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है। इसके चलते बोरिंग के पानी के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं। शहर की 105 पानी की टंकियों पर पुनः जल गुणवत्ता जांच, क्लोरीन डोजिंग और निगरानी की नई व्यवस्था लागू की जाएगी।

50 से 60 हजार लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण... बैठक के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से चर्चा में बताया कि भागीरथपुरा ही नहीं, पूरे इंदौर शहर की जल एवं स्वास्थ्य स्थिति की समीक्षा की गई है। फिलहाल मरीजों की संख्या में कमी के संकेत मिले हैं और हालात नियंत्रण में हैं। स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से 50 से 60 हजार नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।

अमृत योजना के रुके काम शुरू करने के निर्देश... बैठक में अमृत योजना के तहत रुके सभी कार्यों को तेज गति से शुरू करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर को नई बोरिंग की अनुमति पर रोक लगाने और सभी जल स्रोतों की सघन निगरानी के आदेश दिए गए हैं।

ये रहे बैठक में शामिल प्रमुख चेहरे... इस उच्चस्तरीय बैठक में एसीएस नीरज मंडलोई, एसीएस अनुपम राजन, केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, जिला प्रशासन और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बड़े अधिकारियों ने लिया जायजा लेकिन मौत के आंकड़ों पर मौन
देश के सबसे स्वच्छ शहर के सबसे स्वच्छ वार्ड में ड्रेनेजयुक्त पानी पीने से 21 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि सैकड़ों अस्पतालों में हैं। देशभर में सुर्खियों में आए इस मामले में भी अफसरों ने लीपापोती शुरु कर दी है। शासन व प्रशासन के साथ निगम अफसरों ने शनिवार को भागीरथपुरा पहुंचकर हालात का जायजा लिया लेकिन मौतो के आंकड़े पर मौन साध गए।

15 दिन से मरीज मिल रहे है। ऐसे मामले में भी लीपापोती की कवायद शासन, प्रशासन व निगम अफसरों ने शुरु कर दी है। शनिवार को दो एसीएस अनुपम राजन और नीरज मंडलोई, जिला प्रशासन और निगम अफसरों के साथ भागीरथपुरा पहुंचे। दोनों को बताया गया पुरानी लाइन में जरूरत से ज्यादा लीकेज थे। इस वजह से नर्मदा लाइन बदली जा रही है। बस्ती के 30 प्रतिशत हिस्से में नर्मदा लाइन बिछाई जा चुकी है। दोनों अफसरों ने काम देखा, फिर आयुष्मान क्लीनिक पहुंचे। वहां मरीजों की स्थिति देखी।

जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक...अपर सचिव अनुपम राजन और नीरज मंडलोई ने दोपहर में रेसीडेंसी कोठी में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में उन इलाकों पर भी चर्चा हुई, जहां गंदे पानी की समस्या है। राजन ने कहा सरकार का फोकस ब शुद्ध जल की उपलब्धता पर है। जहां भी गंदे पानी की समस्या है, वहां तुरंत लाइन बदलने के प्रस्ताव तैयार करें और काम शुरू कराएं। बैठक के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा भागीरथपुरा बस्ती तेजी से सामान्य हो रही है।

मौत पर मौन... अफसर जब भागीरथपुरा का जायजा ले रहे थे तो पत्रकारों ने उनसे अब तक हुई मोतो के आंकड़ो की जानकारी लेनी चाही लेकिन दोनों अफसर पहले मौन साध गए फिर कहा कलेक्टर अधिक जानकारी दे सकेंगे। निष्कर्ष है शासन इस मामले को दबाने में लगा है।

दूषित जल से मौत प्रशासनिक विफलता- उदयभानु चिब
भागीरथपुरा में दूषित जल आपूर्ति के कारण 20 नागरिकों की मौत और लगभग 1500 लोगों के बीमार होने की हृदयविदारक घटना पूरी तरह प्रशासनिक विफलता का परिणाम है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को दूषित पानी से हुई मौतों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए और पीड़ित परिवारों को न्याय, दोषियों पर सख्त कार्रवाई तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार को ठोस और स्थायी कदम उठाने चाहिए।

यह बात कल इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कही। उनके साथ युवक कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सीवी चौहान, सह प्रभारी रूपेश भदौरिया, प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया, शहर युवक कांग्रेस अध्यक्ष अमित पटेल, प्रदेश सचिव वरेश पाल सिंह जादौन भी मौजूद थे।

भयावह स्थिति को लंबे समय तक नजरअंदाज किया: उन्होंने कहा कि कई निर्दोष नागरिकों की मौत ने न केवल इंदौर, बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना शासन-प्रशासन की घोर लापरवाही, संवेदनहीनता और जवाबदेही के पूर्ण अभाव का जीवंत उदाहरण है। भागीरथपुरा में वर्षों से पेयजल संकट, दूषित पानी की आपूर्ति तथा नागरिकों द्वारा बार-बार की गई शिकायतों के बावजूद प्रशासन की निरंतर अनदेखी ने हालात को इस हद तक पहुंचा दिया कि लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

उन्होंने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय न केवल प्रदेश के प्रभावशाली नेता हैं, बल्कि सत्ता और प्रशासन पर उनका प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष प्रभाव सर्वविदित है। इसके बावजूद भागीरथपुरा की भयावह स्थिति को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सत्ता पक्ष जनजीवन की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील हो चुका है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के मीडिया को लेकर दिए गए उनके आपत्तिजनक, धमकी भरे और अपमानजनक बयान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला हैं।

यह संघर्ष पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा
युवक कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि जब तक दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलता और प्रदेश की जनता को सुरक्षित एवं शुद्ध पेयजल की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक यह संघर्ष पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा। यह लड़ाई किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि जनता के जीवन, सम्मान और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है।

चिब पलासिया चौराहे पर युवक कांग्रेस द्वारा आयोजित धरना आंदोलन में भी शामिल हुए। धरने में इंदौर जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े के साथ बड़ी संख्या में युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया।

भागीरथपुरा त्रासदी में 21 वीं मौत; 49 वर्षीय महिला ने तोड़ा दम, फाइलों में सिर्फ 18 मौतें
शहर का भागीरथपुरा इलाका इस वक्त भयावह त्रासदी का गवाह बना हुआ है। दूषित पानी से फैली बीमारी ने शनिवार को एक और जिंदगी निगल ली। 49 वर्षीय सुनीता वर्मा की मौत के बाद इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल अब और भी गहरे होते जा रहे हैं।

भागीरथपुरा की फर्जी वाली गली निवासी सुनीता वर्मा को 7 जनवरी को गंभीर हालत में एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, दूषित पानी पीने से उनकी किडनी पूरी तरह खराब हो चुकी थी। कई दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद शनिवार दोपहर उन्होंने दम तोड़ दिया।

आज होगा पोस्टमार्टम... प्रशासन ने मौत के तकनीकी कारणों की पुष्टि के लिए रविवार को पोस्टमार्टम कराने की बात कही है। सवाल यह है कि जब मरीज की हालत शुरू से ही गंभीर थी, तब समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए।

45 मरीज अब भी अस्पताल में भर्ती... हालांकि नए मरीजों की संख्या में अब धीरे-धीरे कमी आ रही है, लेकिन पहले से भर्ती मरीजों की हालत प्रशासन की नींद उड़ाने के लिए काफी है। अब तक 414 मरीज अस्पताल पहुँच चुके हैं, जिनमें से 369 मरीजों को उपचार के बाद घर भेजा गया है। फिलहाल 45 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 11 मरीज आईसीयू में हैं।

चार वेंटिलेटर पर... चार वृद्ध मरीज करीब एक सप्ताह से वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। इन मरीजों को किडनी, लिवर और मल्टी ऑर्गन फेल्योर जैसी गंभीर समस्याएं हो चुकी हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन हालात अब भी बेहद नाजुक बताए जा रहे हैं।

15 नए डायरिया मरीज... शनिवार को डायरिया के 15 नए मामले सामने आए, जिनमें से दो मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। डॉक्टरों की विशेष टीम उन मरीजों पर खास निगरानी रख रही है, जो पहले से अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं। त्रासदी अब केवल बीमारी नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता और सिस्टम की नाकामी का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है।

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